लाल सागर में मोखा से लेकर बाब अल-मंदेब जैसे तमाम रणनीतिक ठिकानों पर हूती के कब्जे के बाद रियाद में 'मक्का सुरक्षा समझौते' के सदस्य देशों सऊदी अरब साम्राज्य, पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य प्रमुखों की रणनीतिक बैठक हुई. इस मंत्रणा में पूरे मिडिल ईस्ट के सुरक्षा हालातों समेत सऊदी अरब साम्राज्य के सामने मौजूद खतरों की समीक्षा हुई. इस तरह काफी लंबे असमंजस और 'वेट एंड वॉच' के बाद सऊदी अरब की मदद करने से कन्नी काट चुके पाकिस्तान ने मक्का और सऊदी के नागरिक व आर्थिक बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की.
मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब और हूतियों की जंग का असर पाकिस्तान पर सीधे तौर पर पड़ा है. पाकिस्तान में अचानक पैदा हुआ यह आपातकालीन कूटनीतिक संकट हूतियों की उस खुली चेतावनी के मद्देनजर आया, जिसमें हूती के नेता ने न्यूज़ एजेंसी एपी से बातचीत में दावा किया था कि हूती अब अंतरराष्ट्रीय युद्ध लड़ने में सक्षम है, इसलिए जो सऊदी अरब को बचाने आएगा, उसे तुरंत निपटाया जाएगा.
इस बैठक की जानकारी देते हुए सऊदी सेना प्रमुख ने कहा, 'हमने इस बात पर जोर दिया कि कैसे 'मक्का समझौते' में किए गए वादों को तुरंत प्रभावी सैन्य सहयोग में बदला जाए. इसके लिए सऊदी अरब की अध्यक्षता में पाकिस्तान और तुर्किये के सैन्य प्रमुखों ने सामूहिक रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती से दोहराया.'
جانب من اجتماع رئيس قوات الدفاع ورؤساء هيئات الأركان العامة للدول الأطراف في اتفاقية مكة للدفاع المشترك. pic.twitter.com/8IJkt5Cm2b
— وزارة الدفاع (@modgovksa) September 25, 2026
मुश्किल हालातों में सऊदी अरब के दबाव के बीच हूती के दिए जख्मों पर मरहम लगाने रियाद पहुंचे पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर के दौरे से पहले पाकिस्तान में धारा 144 लगाने के साथ-साथ कड़े एहतियाती प्रतिबंध लागू हो चुके हैं. पाकिस्तान दो-धारी तलवार पर चलते हुए तीन-तीन चुनौतियों का सामना कर रहा है.

हूती ने जब सऊदी के मिलिट्री बेस समेत अहम ठिकानों पर पहला बड़ा हमला किया तब पाकिस्तान ने उस समय इसे सऊदी-हूती (यमन) पड़ोसियों का आपसी मामला बता कर कन्नी काट ली थी. उस दौरान PAK ने तैयारी और हालात समझने के लिए समय मांगा.
हाल ही में अफगानिस्तान की ओर से यह दावा किया कि पाकिस्तान उसकी धरती पर बिना वजह हवाई हमले कर रहा है. तब इसका मतलब ये निकाला गया कि इस तरह पाकिस्तान ने खुद को अंदरूनी चुनौतियों से घिरा दिखाने के लिए हूती पर हमलों के बजाए अफगानिस्तान पर बम बरसा रहा है.
ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं पाकिस्तान अपनी 'परमाणु ताकत' के दम पर चार पैसे कमाने के साथ इस्लामिक देशों का नया रहनुमा बनने के लिए मक्का सुरक्षा समझौता करके मझदार में तो नहीं फंस गया.
एसोसिएटेड प्रेस की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक सीनियर हूती नेता मोहम्मद अल बुखैती ने बिना किसी का नाम लिए कहा था कि कोई भी देश अगर यमन के खिलाफ सऊदी अरब के साथ सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है तो वह ये जान ले कि आज हूती कई मोर्चों पर युद्ध लड़ सकता है. हम अंतरराष्ट्रीय युद्ध लड़ने में सक्षम है.' इस तरह हूतियों ने सीधे उस पाकिस्तान और तुर्किये को चेतावनी दी जिन्होंने कुछ समय पहले सऊदी अरब के साथ मिलकर 'मक्का सुरक्षा समझौता' साइन किया था.

मिडिल-ईस्ट में फिलहाल छाई शांति किसी बड़ी अनहोनी के संकेत दे रहे हैं. सऊदी अरब पर हूतियों के हमले रुक नहीं रहे हैं. यानी ये जंग अब और तेज हो सकती है. मोखा पोर्ट छिनने से पहले ही हूती ने सऊदी अरब पर चौतरफा हमले शुरू कर दिए थे. ऐसे में अब सऊदी अरब ने अंदरखाने अपनी जनता को युद्ध जैसे हालातों से निपटने के लिए मजबूत तैयारी करने से संकेत दिए हैं.
हूती बता चुके हैं कि किसी भी दूसरे देश के सऊदी अरब के साथ युद्ध में शामिल होने पर संघर्ष का दायरा यमन की सीमाओं से बाहर जा सकता है, क्योंकि उनके पास एक साथ कई मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता है.
इस संदर्भ में सऊदी के ग्रैंड मुफ्ती शेख सालेह बिन फौजान अल-फौजान ने सैनिकों से हूतियों के खिलाफ लड़ाई में जान देने तक के लिए तैयार रहने की अपील की है.

अभी दो दिन पहले हूतियों ने सऊदी ठिकानों पर दर्जनों मिसाइल और ड्रोन दागने का दावा किया, हालांकि सऊदी प्रशासन ने छह बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की बात कही. इससे पहले रियाद, मक्का, जेद्दा और यनबू समेत कई इलाकों में इमरजेंसी अलर्ट जारी करना पड़ा था.
ऐसे में जब सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सवा महीने पहले सऊदी के हालिया बड़े हमले और बाब अल-मंदेब की ओर बढ़ने से पहले ट्रंप और शहबाज शरीफ से गुहार लगाई तब अमेरिका ने कहा दिया था कि वो हूती पर सीधा हमला नहीं करेगा. उस समय दो थ्योरी सामने आईं.

ऐसे सवालों के बीच हूती नेता अल बुखैती ने कहा था कि यमन के पश्चिमी तटों की ओर हमारे कब्जे के बाद अमेरिका ने मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान के जरिये हमसे इनडायरेक्ट बातचीत की है. इस दावे की पुष्टि तब हुई जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते कहा कि उनके प्रशासन की हूतियों से बातचीत हुई है.
हूती नेताओं का कहना है कि हमारे सैन्य अभियान का मकसद स्ट्रेट ऑफ बाब अल-मंदेब को बंद करना नहीं है. हम महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से सभी के लिए नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना चाहते हैं. मोखा का बंदरगाह और लाल सागर के कई अहम द्वीप हूती के नियंत्रण में आए हैं, जिससे उन्हें समुद्री यातायात पर नजर रखने में रणनीतिक बढ़त मिली है.
हूती नेता अल बुखैती ने कहा है कि सऊदी अरब जब तक यमन के हूती नियंत्रित इलाकों की करीब एक दशक पुरानी नाकेबंदी पूरी तरह से खत्म नहीं करता और लाल सागर के हूती के नियंत्रण वाले बंदरगाहों तक जहाजों की सुरक्षित पहुंच को मंजूरी नहीं देगा, तब तक सऊदी अरब की धरती पर हमारे हमले जारी रहेंगे.
हूती की मजबूती से अरब जगत में सऊदी अरब की साख और उसके दबदबे दोनों को तगड़ा डेंट लगा है. अमेरिका की खाड़ी में प्राथमिकताएं बदलती दिख रही हैं. ऐसे में जब तक ईरान और अमेरिका का कोई बयान न आ जाए तब तक खाड़ी क्षेत्र में अनहोनी के बादल छाए रहेंगे. ईरान जब चाहे तब हूती को रोक सकता है. इस तरह ईरान हार कर भी 'बाजीगर' बनने के तैयार बैठा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका अघोषित कब्जा है. बाब अल-मंदेब पर उसके प्रॉक्सी हूती हावी हैं.
दुनिया में तेल-गैस के समुद्री कारोबार के इन दो अहम रास्तों पर मजबूत ईरान आज भी किसी के आगे झुकने को तैयार नहीं है. इसलिए फिलहाल मिडिल ईस्ट का भविष्य क्या होगा कोई नहीं जानता.
‘इस्लामिक NATO’ के नाम से हुआ ये समझौता सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हुआ है. इसमें अन्य इस्लामिक देशों के शामिल होने का विकल्प खुला है. इसमें असली नाटो की तरह किसी भी एक देश पर हुआ, साथी देशों पर हुआ हमला माना जाएगा. ऐसी स्थिति में सब मिलकर एक दूसरे की सुरक्षा करेंगे.