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भारत का पक्का यार, क्या बहेगी बदलाव की बयार: नेतन्याहू की हार या जीत से इजरायल से संबधों पर क्या पड़ेगा असर?

इजरायल में संसदीय चुनाव के लिए 27 अक्टूबर को वोट डाले जा रहे हैं. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने हैं पूर्व आर्मी चीफ गादी आइजेनकोट. आधिकारिक नतीजे 4 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. लेकिन सवाल है कि नेतन्याहू की हार-जीत से भारत पर क्या असर पड़ेगा?

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 27, 2026, 08:38 AM IST | Updated: Oct 27, 2026, 08:40 AM IST
Image Credit: इजरायल में नतीजे 4 नवंबर को आएंगे.
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27 अक्टूबर यानी मंगलवार को इजरायल की जनता अपनी 26वीं संसद (नेसेट) के 120 सदस्यों को चुनने के लिए वोट डालेगी. आधिकारिक नतीजे 4 नवंबर को घोषित होंगे. मतदान खत्म होने के बाद आज रात 10 बजे से एग्जिट पोल आने शुरू हो जाएंगे.

रॉयटर्स के मुताबिक, जब आधिकारिक नतीजे आ जाएंगे, उसके बाद इजरायल के राष्ट्रपति अलग-अलग पार्टियों के नेताओं से बातचीत करके बहुमत जुटाने वाले नेता को सरकार बनाने का न्योता देंगे. गठबंधन सरकार बनने की इस पूरी प्रक्रिया में कई हफ्ते से लेकर 100 दिन तक का समय लग सकता है.

लेकिन, इजरायल से  4,541 किमी दूर स्थित भारत वहां के राजनीतिक घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए है. भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यहूदी मुल्क में सत्ता परिवर्तन होता है तो दोनों देशों के संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?

मुकाबला किनके बीच है?

यह आपको बताएंगे, लेकिन पहले जानिए कि इजरायल में मुकाबला किनके बीच है. चुनावी मैदान में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट और पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट समेत कई अन्य लोगों से कड़ी चुनौती मिल रही है. चुनाव से पहले हुए ज्यादातर सर्वे में 'त्रिशंकु संसद' बनने का अनुमान जताया गया है, जिसका मतलब है कि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना कम है.

हालांकि, डिफेंस, टेक्नोलॉजी और आर्थिक सहयोग के क्षेत्रों में भारत और इजरायल की साझेदारी आगे भी बनी रहने की उम्मीद है.

सोमवार को न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए भारत में इजरायली दूतावास की प्रवक्ता मिशेल सिरोटा ने कहा,'भारत और इजरायल के संबंधों में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आएगा, चाहे सत्ता में कोई भी आए.'

उन्होंने आगे कहा कि अगली सरकार बनाने के लिए जो भी पार्टी चुनकर आएगी, दूतावास उसे अपना समर्थन देगा.इजरायली लेखक और राजनीतिक विश्लेषक एलेक पोलार्ड ने कहा,'चुनाव कोई भी जीते, इजरायल और भारत अच्छे दोस्त बने रहेंगे और उनके बीच करीबी रिश्ते कायम रहेंगे.'उन्होंने कहा कि इजरायल इन संबंधों को बहुत तवज्जो देता है.

पोलार्ड ने आगे कहा कि लीडरशिप में बदलाव से दोनों देशों के रिश्तों में एक नया आयाम आ सकता है. इसमें सबसे अहम बात यह होगी कि नया प्रधानमंत्री, पीएम नरेंद्र मोदी के साथ कैसा तालमेल बिठा पाता है.

डिफेंस और टेक्नोलॉजी हैं मुख्य आधार

भारत और इजरायल ने 4 नवंबर, 2025 को डिफेंस को-ऑपरेशन पर दस्तखत किए थे. फरवरी 2026 में पीएम मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने अपने संबंधों को पीस, इनोवेशन और समृद्धि के लिए खास रणनीतिक साझेदारी के लेवल तक पहुंचाया. साथ ही, उन्होंने डिफेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, एग्रीकल्चर, वाटर मैनेजमेंट और स्पेस जैसे क्षेत्रों में और को-ऑपरेशन करने का संकल्प लिया.

कारोबार और रीजनल नेटवर्क

दोनों देशों के बीच कारोबार, इन्वेस्टमेंट और प्रस्तावित फ्री ट्रेड वॉर को लेकर होने वाली बातचीत भी ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर नजर रखना जरूरी होगा. भारत और इजरायल, I2U2 ग्रुप (भारत, इजरायल, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात) और प्रस्तावित भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) जैसी क्षेत्रीय पहलों में भी शामिल हैं.

लीडरशिप में बदलाव से राजनयिक प्राथमिकताओं और बातचीत के तौर-तरीकों पर असर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव का माहौल है. लेकिन मौजूदा समझौते और म्यूचुअल इंट्रस्ट आगे भी सहयोग बनाए रखने के लिए काफी हैं.

इसलिए, इस चुनाव से मोदी और इजरायल के अगले प्रधानमंत्री के बीच राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के आपसी संबंधों में कोई बहुत बड़ा या बुनियादी बदलाव आ जाएगा.

अगर नेतन्याहू जीतते हैं तो क्या होगा?

इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू ने मोदी के साथ करीबी रिश्ते बनाए हैं. अगर नेतन्याहू जीतते हैं, तो दोनों देशों के बीच लीडपशिप का वही पुराना दोस्ताना अंदाज बना रहेगा. हालांकि, दोनों देशों के संबंधों की आगे की दिशा नीतिगत फैसलों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी निर्भर रहेगी.

भारत के लिए, ईरान और उसके सहयोगियों के साथ फिर से संघर्ष शुरू होने से एनर्जी सप्लाई, क्षेत्रीय कारोबार और कनेक्टिविटी को लेकर मुश्किलें पैदा हो सकती हैं. भारत को इजरायल के साथ अपनी डिफेंस पार्टनरशिप और खाड़ी व पश्चिम एशिया में अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाना होगा.
 

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रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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