ईरान के हाथ लगा US का ‘अंडरवॉटर राज’: पकड़ी US की हाईटेक Dive-LD, खुलेंगे खुफिया तकनीक के पत्ते
ईरान को अमेरिका के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी मिली है. IRGC ने दावा किया है कि उसने अमेरिका की बेहद खतरनाक और नई तकनीक से लैस पनडुब्बी को अपने कब्जे में ले लिया है.
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. अब खबर आ रही है कि ईरान की IRGC ने एक अमेरिकी पनडुब्बी को खुफिया ऑपरेशनल कार्रवाई के दौरान पकड़ लिया है. यह पनडुब्बी मानवरहित है. ईरान का दावा है कि यह अमेरिका की सबसे आधुनिक और स्मार्ट सबमरीन है, जिसका नाम Dive-LD है. ईरान की तरफ से बाकायदा इस पनडुब्बी की तस्वीरें भी जारी की हैं. दूसरी तरफ अमेरिका का कहना है कि यह कोई ऑपरेशनल पनडुब्बी नहीं थी, बल्कि पानी पड़ी एक खराब मशीन है. साथ ही यह बेहद पुराना मॉडल है. CENTCOM इस कदम को कोई बड़ा नुकसान नहीं मान रहा है.
क्या है अमेरिका की Dive-LD?
अमेरिका की Dive-LD एक ऐसा अंडरवॉटर वाहन है, जो बिना इंसान के अंदर बैठे खुद मिशन पूरा कर सकता है. जिस तरह अक्सर ड्रोन हवा में उड़कर काम करते हैं, ठीक उसी तरह यह पनडुब्बी पानी में रहकर टार्गेट को भेदती है. इस पनडुब्बी की लंबाई लगभग 5.8 मीटर और 1.2 मीटर चौड़ाई है. इसका वजन लगभग 2.7 टन है. Dive-LD की खासियत है कि यह समुद्र की सतह से लेकर बेहद गहरे पानी में जाकर अपना काम करती है. एक जानकारी के मुताबिक यह समुद्र में लगभग 6000 मीटर की गहराई तक अपना काम कर सती है. इसकी एक और खासियत है कि यह समुद्र के अंदर बहुत कम आवाज में चलता है, इससे दुश्मन को भनक भी नहीं लगती.
कितना बड़ा है यह प्रोजेक्ट?
इस पनडुब्बी का निर्माण Dive Technologies ने किया है. हालांकि 2022 में इसे अमेरिकी डिफेंस कंपनी Anduril Industries ने खरीद लिया था. जिसके बाद Dive-lD Anduril के अंडरवॉटर सिस्टम का हिस्सा बन गया. एक जानकारी के मुताबिक अमेरिकी नौसेना ने Anduril को करीब 18.6 मिलियन डॉलर का शुरुआती कॉन्ट्रैक्ट दिया था. इसके तहत 5 डाइव अंडरवाटर व्हीकल खरीदने की बात सामने आई थी. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना के पास Dive-LD के कुछ वाहन आ चुके हैं. वह अभी इनका इस्तेमाल करके यह देख रही है कि ये असल समुद्र में कितने अच्छे से काम करते हैं.
ईरान के लिए क्यों खास है यह कदम
ईरान अपने इस कदम को एक बहुत बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश कर रहा है. उसकी इस खुशी के पीछे सबसे अहम वजह इस पनडुब्बी की तकनीक है. क्योंकि अमेरिका की यह एडवांस पनडुब्बी ईरान के हाथ लग जाने से इसकी बहुत सी तकनीक भी उसके हाथ में जा सकती है. ईरान इसको खोलकर इसकी तकनीक को देखेगा. जैसे कि इसके अंदर कौन-कौन से सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोटर और नेविगेशन सिस्टम लगे हैं. तकनीक हाथ लगने के बाद ईरान अमेरिका की इस चाल से आगे के लिए खबरदार हो जाएगा. यह कहना भी गलत नहीं होगा कि ईरान भी इस तकनीक की मदद से खुद के लिए इस तरह पनडुब्बी तैयार करे.
क्या ईरान के पास पहले से मौजूद हैं मानवरहित पनडुब्बी?
हालांकि ईरान के पास समुद्र के अंदर जाकर ऑपरेशन के अंजाम देने वाला हथियार पहले से ही मौजूद है. ईरान ने ईरान ने मानवरहित अंडवराटर व्हीकल भी बनाए हैं. 2022 में IRGC ने हथियार दिखाए भी थे. इसमें एक नाम 'Azhdar' है जो मानवरहित व्हीकल के तौर पर तैयार किया गया था. ईरान ने Azhdar को बिना इंसान के चलने वाले सिस्टम में बदलकर माइन बिछाने और हमले जैसे कामों के लिए इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया है. इसके अलावा ईरान के पास 'Ghadir' जैसी छोटी पनडुब्बियां हैं. इनका इस्तेमाल निगरानी, तटीय ऑपरेशन और हथियारों के लिए किया जाता है. हालांकि यह मानवरहित नहीं हैं. ऐसी स्थिति में ईरान के हाथ में अमेरिकी की एडवांस्ड पनडुब्बी मिलना उसके लिए कई मायनों में और बेहतर हो सकता है.