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आसमान में राफेल-सुखोई की गर्जना, तेजस की हुंकार...ताकत देख सूख जाता है दुश्मन का हलक, समझिए भारतीय वायुसेना की सुपर पावर

वायुसेना दिवस पर पूरी दुनिया ने भारत की हवाई ताकत को बड़े ध्यान से देखा. 2026 के इस एडिशन की थीम रही- 'भारतीय वायुसेना: अचूक, अभेद्य और सटीक.' यानी वायुसेना दुश्मन के सामने नहीं हारती, कोई गलती नहीं करती और हर काम सही करती है. इस खास मौके पर जानते हैं कि दुनिया की प्रमुख वायु सेनाओं के मुकाबले भारत कहां खड़ा है और उसकी ताकत किन क्षेत्रों में है.

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Oct 08, 2026, 07:47 AM IST | Updated: Oct 08, 2026, 01:56 PM IST
Image Credit: (AI)
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8 अक्टूबर 1932 को ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स की सहयोगी के रूप में स्थापित भारतीय वायुसेना कुल सैन्य विमानों के बेड़े के हिसाब से दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना बन चुकी है. करीब एक शताब्दी के इतिहास में गिनाने को हजारों उपलब्धियां हैं, तो मौजूदा भू-राजनैतिक परिस्थितियों की वजह से कुछ चुनौतियां भी हैं. 'एयरफोर्स डे' के मौके पर आंकड़ों के जरिए समझते हैं ग्लोबल Air Power का पूरा खेल.

भारत की वायुसेना बहादुरी और नवाचार की समृद्ध विरासत का प्रतीक है. एयरफोर्स के पास राफेल, सुखोई, जगुआर जैसे लड़ाकू विमान हैं. ट्रांसपोर्ट कैरियर C-17 ग्लोबमास्टर, बाज की तरह दुश्मन को झपटने वाला अपाचे हेलीकॉप्टर, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के अलावा एयरफोर्स की आंख यानी एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) जैसी कई क्षमताओं से लैस है. 

मेक इन इंडिया और ड्रोन फोर्स 

भारत में 'मेक इन इंडिया' के तहत कई प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, उसमें एयरफोर्स का एक बड़ा हिस्सा है. स्वदेशी हल्का, सुपरसोनिक फाइटर जेट तेजस Mk-1A, तेजस Mk-2 और भारत में बन रहे तो 5वीं पीढ़ी का ट्विन-इंजन स्टेल्थ मल्टी-रोल लड़ाकू विमान एडवांस मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट (AMCA) अगले कुछ सालों में एयरफोर्स की ताकत बढ़ाने वाले हैं. 

तेजस, आकाश और ब्रह्मोस ये सभी 'मेक इन इंडिया' के तहत विकसित हुए हैं. मौजूदा वैश्विक चुनौतियों में लड़ाकू विमानों के अलावा, सैकड़ों मील दूर दुबके दुश्मन को सही निशाना लगाकर ढेर करने वाली मिसाइलें और ड्रोन भी जरूरी हैं. 

राफेल फ्रांस से खरीदा गया फाइटर जेट है. डसॉल्ट एविएशन का ये जेट तकनीक, सेंसर और बेहतरीन मिसाइलों से लैस है. राफेल 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर है, जिसमें AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और लंबी दूरी की मिसाइलों जैसी आधुनिक क्षमताएं हैं. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी रफ्तार 1,912 किमी/घंटा और रेंज 3,700 किमी बताई जाती है. एयर-टू-एयर हमला करने में सक्षम राफेल मिड एयर रिफ्यूलिंग फीचर से भी लैस है.

भारत में बनी मिसाइलें और ड्रोन सैकड़ों किलोमीटर दूर किसी भी बिल में छिपे दुश्मनों को एक क्लिक में खत्म कर देते हैं, इसकी जीवंत मिसाल ऑपरेशन सिंदूर में दिखी थी जब महज एक बटन दबाने भर से ऐसा कहर बरपा की आतंकी फैक्ट्रियों का नामोनिशान मिट गया था.

मिडएयर फ्यूलिंग

भारत के पास लगभग एक दशक पहले ऐसे विमान लगभग न के बराबर थे. बीते कुछ सालों में खासकर तेजस और राफेल के एयरफोर्स में शामिल के बाद भारत की ये ताकत तेजी से बढ़ी है. तेजस, सुखोई और जगुआर मिडएयर रिफ्यूलिंग से लैस हैं. तेजस नया स्वदेशी जेट है, इसलिए उसे इस तकनीक के साथ बनाया गया. मिराज-2000 और सुखोई-30 को बाद में अपग्रेड करके इस क्षमता से लैस किया गया.

भारतीय वायुसेना के पास कई इल्यूशिन 2-78 ऑयल टैंकर एयरक्राफ्ट हैं, जो हवा फ्यूलिंग में सक्षम है. लेकिन जिस तरह से भारत अपने फाइटर जेट्स का बेड़ा बढ़ा रहा है, उस हिसाब से ऐसे ऑयल रिफ्यूलर टैंकर एयरक्राफ्ट की काफी कमी है.

एयर मार्शल ने गिनाई चुनौतियां

भारतीय वायुसेना दुनिया की टॉप फाइव एयर पावर लिस्ट में शुमार है. एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने एयरफोर्स डे से पहले अपने संबोधन में कहा, 'वायुसेना सही दिशा में बढ़ रही है, बस इसकी रफ्तार बढ़ाकर बदलती प्रौद्योगिकी के इस दौर में वायुसेना को अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने की जरूरत है.' उन्होंने ये भी कहा, 'भारत को मौजूदा परिस्थितियों में हर साल कम से कम 35 से 40 फाइटर जेट की जरूरत है.' 

वायुसेना प्रमुख ने एयरफोर्स डे से पहले अपने संबोधन में एलसीए एमके-1ए परियोजना में देरी पर भी चिंता जताई है. इस बयान से एक बार फिर संकेत मिलते हैं कि एयरफोर्स में फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या में कमी, 5th और 6th जेन जेट के सौदों में देरी जैसी बड़ी चुनौतियों से जूझ रही है.

भारत का 5th जेन पर्चेज प्लान

भारत के सामने समस्या यह है कि अभी भारतीय वायुसेना के पास कोई पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट नहीं है. फ्रांस से आया रॉफेल (4.5 जेन है). चीन स्टेल्थ फाइटर (राडार से बचने) की क्षमता काफी पहले विकसित कर चुका है. पाकिस्तान, चीन के स्टेल्थ जेट खरीदने की फिराक में है. इसी वजह से AMCA को तेजी से आगे बढ़ाने के साथ-साथ अंतरिम विकल्प पर फैसला लेने की प्रक्रिया को रफ्तार मिली है.

हालांकि, ऐसा नहीं है कि भारत हाथ पर हाथ धरे चुप-चाप बैठा है. फाइटर जेट खरीदने की तैयारियां चल रही हैं. बीते दो सालों में अमेरिका अपना F-35 और रूस ने SU-57 स्टेल्थ जेट भारत को देने का ऑफर दिया है. 

भारत एकलौता देश है, जिसकी धरती पर अमेरिका और रूस कई बार अलग-अलग मौकों पर अपने स्टेल्थ जेट एक साथ लैंड कराकर उसे बेचने का ऑफर/डेमो दे चुके हैं. हालांकि भारत ने अब तक ये फैसला नहीं किया है कि कौन सा 5th Gen जेट खरीदना है.

आसमान में भारत की रणनीतिक चुनौतियां कम नहीं है. पहली स्टेल्थ क्षमता का तत्काल इंतजाम. दूसरी- घटते फाइटर स्क्वाड्रन, तीसरी- लंबी अवधि की आत्मनिर्भरता और चौथी- महंगे दाम.

अमेरिकी F-35 सेंसर और नेटवर्किंग पावर में आगे है तो रूसी Su-57 रफ्तार, ट्विन-इंजन डिजाइन और भविष्य में तकनीकी ट्रांसफर की संभावना के चलते अलग आकर्षण रखता है. लेकिन भारत के लिए सबसे जरूरी बात ये है कि ऐसा जेट खरीदा जाए तो खिफायती आज की तात्कालिक जरूरतों को भी पूरी करे और फ्यूचर के AMCA प्लान को भी कमजोर न करे. 

मार्च, 2025 में एयर चीफ एयर मार्शल अमरप्रीत सिंह ने कहा था कि सिक्स्थ जेन फाइटर जेट कोई फ्रिज नहीं है कि दरवाजा खोलकर देखा और घर ले आए. 

भारत की 5th जेन स्टेल्थ जेट तैयारी

AMCA यानी पूरी तरह स्वदेशी निर्माण और डिजाइन डबल इंजन वाले स्टेल्थ फाइटर जेट की सुपरसोनिक स्पीड 2500 किमी/घंटा होगी. 12 हार्डपॉइंट्स होंगे. ये घातक मिसाइलों से लैस होगा.
राडार से पकड़ में न आने वाले इस फाइटर जेट में F-35 जैसे हाइटेक सेंसर, डेटा फ्यूजन, नेटसेंट्रिक वॉरफेयर क्षमता भी होगी.

रक्षा सचिव राकेश कुमार सिंह ने एक मीडिया हाउस के आयोजन में बताया था कि इसका पहला प्रोटोटाइप सितंबर, 2028 तक तैयार होने की संभावना है.

रक्षा सचिव राकेश कुमार सिंह ने इसी मंच से यह भी कहा था कि वैश्विक स्रोत से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के शामिल करने को लेकर भारत सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है. फिलहाल तो हमारा पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम एएमसीए है. लेकिन, देखते हैं आगे क्या होता है.'

हालांकि भारत के रक्षा सौदों में लगने वाले समय यानी देरी के मद्देनजर एक संभावना यह भी बनती है कि अगर भारत के स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के ट्विन-इंजन स्टेल्थ मल्टी-रोल लड़ाकू विमान प्रोग्राम में और देर होती है, तब भारत सरकार अमेरिकी F-35 या रूस के Su-57 या 5वीं पीढ़ी का कोई और जंगी जेट तत्काल खरीदने पर विचार कर सकती है.

PAK-चीन जुगलबंदी

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने पाकिस्तान के चीन के साथ मिलकर 5वीं पीढ़ी के फाइटर हासिल करने की योजना को चिंता का विषय बता चुके हैं. पाकिस्तान दो साल से भारत पर दबाव बढ़ाने के मकसद से चीन के पांचवीं पीढ़ी के विमान हासिल करने की कोशिश में जुटा है. पाकिस्तान, चीन के स्टेल्थ जेट लेने के लिए लगातार सौदेबाजी कर रहा है. बीते कुछ महीनों में वो अपने दर्जनों पायलट, ट्रेनिंग के लिए चीन भेज चुका है. 

हालांकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा के बावजूद, चीन द्वारा पाकिस्तान को J-35 स्टेल्थ लड़ाकू विमान सौंपने की संभावना कम है. 'द डिप्लोमैट' की एक हालिया रिपोर्ट में इसके पीछे कई कारण बताए गए थे.

उसी रिपोर्ट में बीजिंग के थिंक टैंक रिसर्चर यांग शियाओतोंग के हवाले से कहा था PAK को J-35 फाइटर जेट देने की संभावना न के बराबर है, क्योंकि ऐसा होने से दक्षिण एशिया का सैन्य संतुलन गड़बड़ा सकता है. भारत और पाकिस्तान दोनों के परमाणु बम होने को भी इसकी वजह माना गया.

चीन का फोकस और जियोपॉलिटिक्स

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की इसी साल प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का फोकस कुछ समय से साउथ एशिया के बजाए, पश्चिमी प्रशांत महासागर पर है. जहां वो अमेरिका और उसके सहयोगियों (जापान-ऑस्ट्रेलिया) के साथ संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की लॉन्ग टर्म कोशिशों को अमली जामा पहनाने के लिए काम कर रहे हैं.

इस थ्योरी का सबसे मजबूत आधार ये है कि चीन, भारत से सैन्य संघर्ष में उलझने के बजाए बीते दो सालों से लगातार कोर कमांडर लेवल और डिप्लोमेटिक चैनल दोनों के जरिए बातचीत करते हुए ट्रेड और सीमा विवाद सुलझाने पर काम कर रहा है. ऐसे में माना जा रहा है कि चीन ने फिलहाल अपने पिछलग्गू और कथित ऑल वेदर फ्रेंड पाकिस्तान को ताक पर रख दिया है.

वहीं चाइना डेली की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीनी फौज पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी की घरेलू जरूरतों की रिकॉर्ड हाई है. इसलिए चीनी एयरफोर्स और चीनी नेवी ने J-35 की तैनाती को तेजी से बढ़ाया है. वह खुद अपने 5th जेन जेट बेड़े का विस्तार कर रहा है, इसलिए उसकी पहली प्राथमिकता घरेलू सेना का आधुनिकीकरण है, इसलिए वो अपना सैन्य सामान पाकिस्तान जो पहले से ही बीजिंग के कर्ज तले दबा है, उसे इतनी आसानी से स्टेल्थ जेट नहीं देगा. 

दुनिया की स्टेल्थ पावर

चाइना डेली की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल चीन के पास करीब 500 से ज्यादा स्टेल्थ जेट है. उसने अपना पहला पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट J-20 को 2017 में ऑपरेशनल किया. उसका दूसरा स्टेल्थ शेनयांग J-35 हाल ही में आया. पाकिस्तान उससे यही उधार मांग रहा है.

पश्चिमी रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका, चीन, रूस और फ्रांस के पास ही पूरी तरह से ऑपरेशनल पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट हैं. अन्य देश जैसे तुर्की, दक्षिण कोरिया, भारत, जापान और स्वीडन इस तकनीक पर काम कर रहे हैं या उनके पास सीमित प्रोटोटाइप हैं.

आसमान की बादशाहत 

2026 FlightGlobal/Cirium की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में 161 देशों के पास 52 हजार से ज्यादा सैन्य विमान हैं. अमेरिका 13,000 से अधिक फाइटर जेट्स के साथ ग्लोबल लीडर है. दूसरे पायदान पर भारत का सबसे बड़ा रक्षा सहयोगी रूस है जिसके पास करीब 4,500 फाइटर जेट माने जाते हैं. 

चीन 3500 से ज्यादा फाइटर जेट्स के साथ तीसरे स्थान पर है. भारत के पास 2,183 सैन्य विमान हैं, जिनमें 600 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हैं. जापान के पास मौजूदा समय में करीब 1,429 और फ्रांस के पास करीब 1000 विमान हैं.

चीन को छोड़कर बाकी देशों से भारत के सुरक्षा समझौते यानी रणनीतिक रिश्ते हैं. भारतीय एयरफोर्स के बेड़े में मौजूद लेटेस्ट राफेल मेड इन फ्रांस है तो सुखोई और अन्य फाइटर जेट रूस से मिले हैं. इसी तरह अमेरिका का अपाचे और ग्लोबमास्टर भी भारतीय वायुसेना के बेड़े में काफी समय से शुमार है.

अमेरिका के पास B-2 और F-35 जैसे हजारों लड़ाकू विमानों के अलावा उन्हें हजारों किलोमीटर दूर दुनिया के किसी भी कोने में लड़ने के लिए भेजने के लिए दुनियाभर में मिलिट्री बेस हैं. उसके पास इन हजारों लड़ाकू विमानों में मिड एयर रिफ्यूलिंग करने के लिए ऑयल टैंकर्स का सबसे बड़ा बेड़ा मौजूद है. उसके पास दुनिया में सबसे ज्यादा, AWACS निगरानी जहाज हैं. रूस की सबसे बड़ी ताकत Su-57 है. उसकी Su-30/35 फैमिली का जलवा है.

जापान की ताकत 

इलेक्ट्रिकल और टेक्निकल मामलों में वर्ल्ड लीडर जैसा दबदबा रखने वाले जापान की एयरफोर्स की तूती दुनियाभर में बोलती थी. दूसरे विश्व युद्ध में जापानी एयरफोर्स और जापान की इंपीरियल नेवी ने अमेरिका के पर्ल हार्बर मिलिट्री बेस पर हमला करके यूएस नेवी के कई युद्धपोत और लड़ाकू विमानों को उड़ाकर सबकुछ मटियामेट कर दिया था. जापान के हमले में 2500 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. इसका बदला अमेरिका ने उसके ऊपर परमाणु बम दागकर लिया था.

भारत महाशक्तियों के बीच कहां खड़ा?

'ड्रैगन' से किसको कितना खतरा! 

जिस दौर में अमेरिका, सोवियत संघ (रूस) और जापान की तिकड़ी जब टॉप थ्री में थी तब चीन की फौज कहीं स्टैंड नहीं करती थी. आज उस चीन से पूरी दुनिया के देश खतरा महसूस करने लगे हैं. 10 अक्टूबर 1947 में नए नाम से सामने आई चीन की सेना पीएलए, को इससे पहले 'चाइनीज वर्कर्स एंड पीपुल्स रेड आर्मी' यानी चीन की रेड आर्मी कहा जाता था. आज चीन रिवर्स इंजीनियरिंग का बादशाह है.

बीते कुछ दशकों में चीन ने अकल्पनीय रूप से हर मामले में अपनी ताकत बढ़ाई है. जमीन हड़पने से लेकर समंदर (दक्षिण-चीन सागर) निगलने को आतुर 'ड्रैगन' यानी चीन की चतुराई और आक्रामकता से निपटने के लिए अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने क्वाड का गठन करके क्षेत्रीय समुद्री सीमाओं को सुरक्षित और मजबूत किया है. 

अगले दशक में भारतीय वायुसेना के लिए क्या जरूरी?

आने वाले 10 सालों में भारतीय वायुसेना के सामने सबसे बड़ी चुनौती लड़ाकू विमानों की संख्या और तकनीक के बीच संतुलन बनाने की होगी. मिग-21 की पूरी खेप रिटायर हो चुकी है. वहीं फ्यूचर की लड़ाई ड्रोन, AI, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, नेटवर्किंग और सटीक हथियारों पर ज्यादा निर्भर होने के आसार हैं. ऐसे में वायुसेना अध्यक्ष के अनुमान के मुताबिक वायुसेना को अगले एक दशक यानी 2037 तक अपना स्क्वाड्रन गैप भरने के साथ-साथ स्वदेशी और अत्याधुनिक एयर-पावर इकोसिस्टम तैयार करने की जरूरत है.

भारत-चीन में संतुलन जरूरी

अमेरिका को पीछे छोड़कर आसमान का नया बेताज बादशाह बनने को बेकरार चीन की एयरफोर्स से भारत की संभावित चुनौतियों पर चर्चा करें तो भारत उससे निपटने के लिए तैयार है. वर्ल्ड डायरेक्ट्री ऑफ मॉर्डन मिलिट्री एयर क्राफ्ट की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक चीनी एयरफोर्स के पास लंबी दूरी के स्ट्रैटजिक बॉम्बर्स और हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली (AWACS) के अलावा फाइटर ड्रोन्स का स्टॉक भारत की तुलना में ज्यादा है. 

जंग हथियारों के साथ-साथ हौसले और दिमाग से भी लड़ी जाती है और इस विषय में भारत की सेना बेजोड़ है. भारत भी अमेरिका की तरह स्ट्रैटजिक कमांड बना चुका है. स्पेस में मौजूदगी मजबूत कर चुका भारत अपने क्षेत्र में चीन के बाद दूसरी बड़ी महाशक्ति बन चुका है. मजबूत तैयारी और सही फैसलों की वजह है कि गलवान से लेकर एलएसी के चप्पे-चप्पे पर भारत की स्थिति मजबूत हुई है. 

अभी कुछ समय पहले आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि चीन ने अपने कदम पीछे खींचे हैं, लेकिन भारत की मौजदूगी बरकरार है. आज भारत ने भी सुदूरवर्ती इलाकों में सड़क और हवाई पट्टियां यानी एयर स्ट्रिप बनाकर चीन और पाकिस्तान के किसी  भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है.

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About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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