Explainer: क्या है NCF, प्राथमिक शिक्षक की परीक्षा में कितना जरूरी है इसका रोल, समझें ABCD
नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह स्कूली पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों, पढ़ाई के तरीके, परीक्षा पैटर्न और छात्रों के विषय चयन को लेकर दिशा-निर्देश देता है. NCF के तहत स्कूली शिक्षा, प्रारंभिक बचपन की देखभाल एवं शिक्षा, शिक्षक शिक्षा और प्रौढ़ शिक्षा को शामिल किया गया है. इसकी सिफारिशों में 5+3+3+4 शिक्षा संरचना, कक्षा 9 से विषय चयन में अधिक लचीलापन और 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार कराने जैसे बदलाव शामिल हैं. कक्षा 9वीं और 10वीं में छात्रों के लिए पास करने वाले विषयों की संख्या 5 से बढ़ाकर 8 करने का भी प्रस्ताव है.
हर शिक्षा नीति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर करिकुलम, पेपर्स, पढ़ाई के फॉर्मेट, एग्जाम पैटर्न और क्लास में विषय चयन को लेकर भी काम होता है. इसे नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क से जुड़ा एक पैनल तैयार करता है. जानते हैं कि NCF यानी नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क क्या है और इसने क्या सिफारिशें की हैं.
NCF क्या है
नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क को NCF के तौर पर जाना जाता है. इसे नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा भी कहते हैं. इस समय इसकी चर्चा काफी ज्यादा है, क्योंकि इसने न केवल स्कूली सिलेबस में कई बदलाव किए हैं, बल्कि कक्षा 9 से लेकर 12 तक परीक्षा के पैटर्न और विषयों को लेकर भी कई सिफारिशें की हैं. इसके बाद स्कूली शिक्षा और परीक्षाओं के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव होगा.
NCF दरअसल नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़ा हुआ है. NCF में बदलावों को लेकर नई सिफारिशें देने का काम केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त 12 सदस्यीय पैनल ने किया, जिसके चेयरमैन इसरो के पूर्व अध्यक्ष के कस्तूरीरंगन हैं. इस समिति ने NCF को लेकर कई सुझाव दिए हैं.
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा क्या है
NCF यानी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा नई शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन का एक हिस्सा है. मूलभूत चरण शिक्षा यानी 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए NCF अक्टूबर 2022 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा शुरू किया गया था.
नवीनतम राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा कौन सा है
भारत मौजूदा समय में चौथे राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे का पालन कर रहा है, जिसे 2005 में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT द्वारा प्रकाशित किया गया था. दरअसल NCF हमेशा ही हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दायरे में रहकर शिक्षा क्षेत्र में सिलेबस से लेकर शैक्षिक सत्र, परीक्षा और करिकुलम के बारे में तय करता है.
मौजूदा NCF नई शिक्षा नीति 2020 के तहत अपना काम कर रहा है. यह देश की चौथी शिक्षा नीति है. पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा 1968 में तैयार हुआ था. फिर 1972 में दूसरी नीति आई. तीसरी नीति 1986 में लागू हुई, जिसे 1992 में संशोधित किया गया. ताजा शिक्षा नीति वर्ष 2020 में लाई गई.
NCF किन पाठ्यक्रमों में बदलाव करता है
NCF के चार आयाम हैं
स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा
बचपन की देखभाल और शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा
शिक्षकों की शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा
प्रौढ़ शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा
यह रूपरेखा ‘पंचकोश’ अवधारणा पर केंद्रित है. यह शरीर और मन के बीच समन्वय की प्राचीन भारतीय परंपरा से प्रेरित है.
NCF के 5 भाग हैं
शारीरिक विकास, जीवन ऊर्जा का विकास, भावनात्मक और मानसिक विकास, बौद्धिक विकास और आध्यात्मिक विकास.
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से क्या बदलाव हो रहे हैं
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सबसे परिवर्तनकारी पहलुओं में नई 5+3+3+4 पाठ्यचर्या संरचना है, जो 3 से 8 वर्ष के सभी बच्चों के लिए बचपन की देखभाल और शिक्षा को साथ लाती है.
यह मानती है कि शुरुआती बचपन एक ऐसी अवस्था है, जो जीवन के लिए अहम नींव और सीखने के विकास के लिए सबसे जरूरी है. हालांकि बच्चे में यह विकास बगैर किसी दबाव के स्वाभाविक माहौल में होना चाहिए.
भारत में शिक्षा से जुड़े संवैधानिक प्रावधान क्या हैं
संवैधानिक प्रावधानों के तहत भारतीय संविधान के भाग IV में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों यानी DPSP के अनुच्छेद 45 और अनुच्छेद 39 (f) में राज्य द्वारा वित्तपोषित होने के साथ-साथ समान एवं सुलभ शिक्षा का प्रावधान है.
1976 में संविधान के 42वें संशोधन के जरिए शिक्षा को राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित कर दिया गया.
केंद्र सरकार की शिक्षा संबंधी नीतियां इसे एक व्यापक दिशा प्रदान करती हैं. राज्य सरकारों से इसका पालन करने की अपेक्षा की जाती है, हालांकि यह अनिवार्य नहीं है. उदाहरण के लिए तमिलनाडु वर्ष 1968 में पहली शिक्षा नीति द्वारा निर्धारित त्रि-भाषा फॉर्मूले का पालन नहीं करता है.
वर्ष 2002 में 86वें संशोधन ने अनुच्छेद 21-A के तहत शिक्षा को एक प्रवर्तनीय अधिकार बना दिया. संविधान का अनुच्छेद 21-A राज्य के लिए 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना अनिवार्य बनाता है.
इससे संबंधित कानून क्या है
शिक्षा का अधिकार यानी RTE अधिनियम, 2009 का उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना और शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में लागू करना है. इसके तहत समाज के वंचित वर्गों के लिए 25 फीसदी आरक्षण का भी प्रावधान है.
NCF किन फ्रेमवर्क के तहत काम करता है
ये 4 नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क हैं, जिसमें बदलाव करने या उसे मुकम्मल करने का काम NCF पैनल का होता है—
स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा यानी NCFSE
प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा यानी NCFECC
शिक्षक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा यानी NCFTE
प्रौढ़ शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा यानी NCFAE
क्या NCF शिक्षा का फॉर्मेट और पाठ्यपुस्तकों की सामग्री तय करता है
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों को डिजाइन करने के लिए एक दिशानिर्देश के रूप में कार्य करता है. भारत मौजूदा तौर पर 2005 में प्रकाशित राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे का पालन कर रहा है. NCF 2022 NEP 2020 के प्रमुख घटकों में से एक है.
NCF पैनल की सिफारिशों से क्या बदलाव होंगे
NCF पैनल की सिफारिशों के आधार पर 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार होगी.
प्रस्तावित प्रणाली में छात्र कक्षा 9 से विज्ञान के साथ कला और मानविकी के कोई भी विषय चुन सकता है.
कक्षा 9वीं और 10वीं में अब तक छात्रों को 5 विषयों के पेपर पास करने होते थे, लेकिन अब ये 8 हो जाएंगे.