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CEC चेयरमैन हैं, लेकिन 'वन-मैन कमीशन' नहीं… संविधान में बहुमत का रास्ता साफ है; क्या कहता है Article 324?

मुख्य चुनाव आयुक्त आयोग के चेयरमैन होते हैं, लेकिन उनके पास अकेले वीटो पावर नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के कानून के तहत मतभेद होने पर तीन सदस्यीय आयोग में बहुमत का फैसला मान्य होता है.

Written By Tahir Kamran
Published: Sep 23, 2026, 08:33 PM IST | Updated: Sep 23, 2026, 09:53 PM IST
Image Credit: AI की मदद से बनाई गई तस्वीर
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भारतीय चुनाव आयोग एक बार फिर सवालों के घेरे में है. 23 सितंबर 2026 को पब्लिश होने वाली इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट पूरे देश का राजनीतिक माहौल बदल दिया है. रिपोर्ट में दावा किया गया कि कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की. रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल हैं.

ऐसे में सवाल पैदा होता है कि अगर खुद चुनाव आयोग के अंदर किसी मुद्दे पर आपसी सहमति ना बन पाए, तो आखिरी फैसला किसका होता है? क्या चीफ इलेक्शन कमिश्नर के पास कोई ऐसी ताकत है कि वो आपत्तियों को दरकिनार करते हुए आगे बढ़ जाए? हम इन्हीं सवालों के जवाब संविधान के आर्टिकल 324 और चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े मौजूदा कानून के हवाले से बताने जा रहे हैं.

यह खबर भी पढ़ें: चुनाव आयोग में असहमति: सवाल सिर्फ SIR का नहीं, पारदर्शिता और संस्थागत भरोसे का भी है

चुनाव आयोग को शुरू से जानिए

सबसे पहले चुनाव आयोग के बारे में थोड़ी जानकारी हासिल कर लेते हैं. 1947 में देश आजाद होने के बाद 25 जनवरी 1950 को चुनाव आयोग वजूद में आया. देश के पहले CEC सुकुमार सेन थे, जिन्होंने 21 मार्च 1950 से 19 दिसंबर 1958 तक पद संभाला. शुरुआत से लेकर लगभग 4 दशक तक चुनाव आयोग में ही चुनाव आयुक्त होता था. इस दौरान आयोग की कमान सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त के पास होती थी. यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 1989 तक चुनाव आयोग एक सदस्यीय था.

लेकिन 16 अक्तूबर 1989 को पहली बार चुनाव आयोग को बहुसदस्यीय बनाया गया.  उस समय के मुख्य चुनाव आयुक्त CEC आरवीएस पेरी शास्त्री के साथ एसएस धनोआ और वीएस सीगल को चुनाव आयुक्त के तौर पर नियुक्त किया गया. इस तरह पहली बार चुनाव आयोग में 1 CEC और 2 EC की एंट्री हुई. यह बदलाव लंबे समय से  चुनाव आयोग में सुधारों मांग के तहत हुआ था.

हालांकि 2 जनवरी 1990 को, यानी सिर्फ ढाई महीने बाद बहुसदस्यीय वाली व्यवस्था फिर से खत्म कर दिया गया. दिलचस्प बात यह भी है कि अगले ही साल फिर से बहुसदस्यीय व्यवस्था लौट आई. 25 जनवरी 1991 को Election Commission (Conditions of Service of Election Commissioners and Transaction of Business) Act, 1991 बनाया गया. इस कानून ने बहुसदस्यीय निर्वाचन आयोग की व्यवस्था के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया. साथ ही 1 अक्तूबर 1993 को एक बार फिर से दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति हुई. तब से लेकर अब तक यही स्थिती चली आ रही है.

CEC और चुनाव आयुक्तों की ताकत: संविधान क्या कहता है?

इसका सीधा मतलब: CEC चेयरमैन जरूर हैं, लेकिन उनके पास अकेले वीटो पावर नहीं है. तीन सदस्यीय आयोग में CEC और दो EC के तीन वोट होते हैं. दो सदस्य एक तरफ हों तो उनकी राय बहुमत होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ की स्थिति

इस तरह का मामला पहली बार सामने नहीं आया. करीब तीन दशक पहले सुप्रीम कोर्ट के सामने भी यह मुद्दा आया था.

1995 के T.N. सेशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बहुसदस्यीय चुनाव आयोग को संवैधानिक माना. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि CEC आयोग के चेयरमैन हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह बाकी चुनाव आयुक्तों से ऊपर होकर अकेले फैसले ले सकते हैं.

1996 के चुनाव आयोग बनाम सुब्रमण्यम स्वामी मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बहुसदस्यीय आयोग के हर फैसले के लिए सर्वसम्मति जरूरी नहीं है. मतभेद होने पर बहुमत के आधार पर फैसला लिया जा सकता है.
 

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About the Author

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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