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Explainer: रूस से तेल, अमेरिका से LPG... भारत की एनर्जी स्ट्रैटजी में क्यों आया बड़ा बदलाव?

Crude Oil Import From Russia: जब से मिडिल ईस्ट में जंग शुरू हुई है, तब से भारत की एनर्जी खरीद को लेकर बड़ा बदलाव आया है. एक तरफ जहां क्रूड ऑयल के मामले में रूस अहम सप्लायर बना हुआ है, वहीं भारत के लिए LPG का सबसे बड़ा सप्लायर अमेरिका बन गया है.

Written By Kriyanshu Saraswat
Published: Sep 09, 2026, 11:38 AM IST | Updated: Sep 09, 2026, 11:42 AM IST
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LPG Import From America: पिछले छह महीने से भी ज्यादा समय से मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच एनर्जी सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है. इस जंग के बीच देश की एनर्जी बाइंग में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. क्रूड ऑयल के मामले में रूस अभी भी भारत का बड़ा सप्लायर है, जबकि LPG के मामले में अमेरिका तेजी से सबसे बड़ा सोर्स बन गया है. अगस्त 2026 में अमेरिका ने भारत के एलपीजी आयात का 50% से भी ज्यादा हिस्सा सप्लाई किया था. दूसरी तरफ रूस अगस्त में भी भारत का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर बना रहा. इन आंकड़ों को देखने के बाद सवाल यही है कि आखिर तेल के लिए रूस और LPG के लिए अमेरिका, भारत यह डबल एनर्जी स्ट्रेटजी (Energy Strategy) क्यों अपना रहा है? क्या यह होर्मुज संकट के कारण हुआ अस्थायी बदलाव है या भारत अपनी एनर्जी बाइंग का स्ट्रक्चर बदल रहा है? आइए समझते हैं पूरा मामला.

रूस से तेल और अमेरिका से LPG क्यों?

रूस से तेल और अमेरिका से LPG के सवाल पर आपको यह समझना जरूरी है कि क्रूड ऑयल (crude oil) और एलपीजी (LPG) देश के लिए एक जैसी खरीद नहीं है. भारत, रूस से भारत बड़ी मात्रा में क्रूड ऑयल लेता है, जबकि LPG के मामले में भारत लंबे समय से मिडिल ईस्ट पर निर्भर रहा है. साल 2025 में भारत ने करीब 21.85 मिलियन टन एलपीजी का आयात किया था. इसका करीब 90% हिस्सा मिडिल ईस्ट से आया था. लेकिन 2026 की बात करें तो होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते में भारी व्यवधान ने इस मॉडल की कमजोरी सामने ला दी. भारत को अचानक ऐसे सप्लायर की दरकार थी, जहां से पर्याप्त LPG मिल सके और समुद्री रास्ते में मिडिल-ईस्ट जैसी अनिश्चितता न हो. ऐसे में अमेरिका की भूमिका तेजी से बढ़ी. यानी भारत की स्ट्रेटजी को 'रूस बनाम अमेरिका' के रूप में देखने की बजाय इसे इस तरह देखना सही होगा कि जो एनर्जी प्रोडक्ट, जहां से बेहतर मिले, वहां से खरीद के तौर पर देखना होगा.

होर्मुज संकट ने भारत का LPG इम्पोर्ट मैप बदला

भारत की एलपीजी सप्लाई में सबसे बड़ा मोड़ 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का संकट है. मिडिल-ईस्ट से आने वाली एलपीजी सप्लाई के लिए होर्मुज बेहद अहम रास्ता है. क्राइसिस के बाद भारत के लिए यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे पुराने सप्लायर से नियमित कार्गो हासिल करना मुश्किल हो गया. एक एनालिसिस के अनुसार फरवरी से जून 2026 के बीच देश के मिडिल ईस्ट एलपीजी इम्पोर्ट (Middle East LPG import) में 85% की गिरावट आई है. ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के लिये सबसे बड़ी प्राथमिकता LPG की सप्लाई को जारी रखना था. इसके लिए-

अमेरिका की LPG हिस्सेदारी 12 से 50%+ कैसे हुई?

जनवरी 2026 में देश की तरफ से आयात की जाने वाली LPG में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 12% थी. मार्च में यह बढ़कर करीब 36.9% हो गई और मई में इसका आंकड़ा 50% के पार चला गया. जुलाई में अमेरिकी हिस्सेदारी करीब 73% तक पहुंच गई. अगस्त के महीने में भी अमेरिका करीब 55.4% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है. हालांकि, अगस्त में UAE, कुवैत और दूसरे देशों से सप्लाई बढ़ने लगी और अमेरिकी शिपमेंट भी घटी. फिर भी अमेरिका सबसे बड़ा व्यक्तिगत सप्लायर बना हुआ है. इसका मतलब साफ है भारत ने एलपीजी (LPG) के लिए नया सप्लाई चैनल तैयार कर लिया.

अमेरिका से LPG आयात महंगा, फिर भी क्यों खरीद रहा भारत?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका से LPG का आयात महंगा है और दूरी भी ज्यादा है, फिर भारत अमेरिका से गैस क्यों खरीद रहा है? हकीकत यह है कि मिडिल-ईस्ट से भारत तक एलपीजी कार्गो कम समय में पहुंच सकता है, लेकिन अमेरिका से कार्गो को लंबा समुद्री रास्ता तय करना पड़ता है. इसका सीधा सा मतलब है ज्यादा खर्च, ज्यादा समय और ज्यादा प्लानिंग. फिर भी भारत अमेरिका से एलपीजी की खरीद इसलिए जारी रख रहा है क्योंकि संकट के समय सप्लाई मिलना दाम से ज्यादा अहम हो गई. यह एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) का अहम सिद्धांत है. यदि सस्ता माल उपलब्ध ही नहीं है तो कम कीमत का कोई फायदा नहीं. भारत के लिए LPG घरों में खाना पकाने के लिए लगातार उपलब्ध होनी जरूरी है. यही कारण है कि भारत ने 'महंगी हो सकती है, लेकिन सप्लाई रुकनी नहीं चाहिए.' की स्ट्रैटजी पर काम किया.

क्या भारत का स्थायी LPG पार्टनर बन रहा अमेरिका?

भारत ने सिर्फ स्पॉट मार्केट से ही अमेरिका से एलपीजी आयात की कोशिश नहीं की, बल्कि लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट की दिशा में भी कदम बढ़ाया है. 2026 के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने अमेरिका से करीब 2.2 मिलियन टन LPG की खरीद का कॉन्ट्रैक्ट किया है. 2027 के लिए भारत अमेरिका से अपने LPG आयात का 25% हिस्सा लेने के प्लान पर काम कर रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार इसका मकसद मिडिल ईस्ट पर निर्भरता घटाना और अमेरिका के साथ एनर्जी एंड ट्रेड एग्रीमेंट को मजबूत करना है. इसका मतलब साफ है 50% से ज्यादा की हिस्सेदारी भले ही संकट के कारण से बनी हो, लेकिन भारत अब अमेरिका को परमानेंट बैकअप सप्लायर (Permanent Backup Supplier) की दिशा में बढ़ता दिख रहा है.

क्या UAE, सऊदी और कतर की भूमिका खत्म हो जाएगी?

अमेरिका से एलपीजी आयात करने का मतलब यह नहीं है कि UAE, सऊदी और कतर का रोल नहीं रहेगा. यह इस कहानी का दूसरा अहम पहलू है. अगस्त में खाड़ी देशों की तरफ से की जाने वाली एलपीजी सप्लाई में सुधार आया है और अमेरिकी शिपमेंट में करीब 19% की गिरावट आई है. इससे यह साफ है कि जैसे-जैसे मिडिल ईस्ट से सप्लाई में सुधार होगा, भारत फिर से इन देशों से खरीद बढ़ा सकता है. इसलिए आने वाले समय में भारत अमेरिका को बड़े वैकल्पिक / स्ट्रेटजिक सप्लायर के तौर पर अपने साथ रख सकता है. जबकि मिडिल ईस्ट उसका अहम सप्लायर बना रहेगा. यानी भारत किसी एक देश को पूरी तरह रिप्लेस करने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि अपने सप्लायर बॉस्केट को बड़ा कर रहा है.

भारत की एनर्जी स्ट्रैटजी में असली बदलाव क्या है?

पहले भारत की LPG सप्लाई का बड़ा हिस्सा गिने-चुने खाड़ी देशों से आता था. होर्मुज संकट ने यह बता दिया कि किसी एक ही देश पर सप्लाई के लिए निर्भर रहना आने वाले समय में रिस्की हो सकता है. अब देश की स्ट्रैटजी तीन लेवल पर बदलती दिख रही है. पहला भारत का मकसद किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भरता को कम करना है. दूसरा, केवल स्पॉट मार्केट पर निर्भर रहने के बजाय पहले से सप्लाई को सिक्योर करना और तीसरा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू LPG प्रोडक्शन और वैकल्पिक गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना है. यानी भारत की एनर्जी स्ट्रैटजी (Energy Strategy) अब 'सबसे सस्ता तेल या गैस मिलना नहीं', बल्कि यह है कि 'संकट के समय सप्लाई कहां से बनी रहेगी?'

आम आदमी पर क्या होगा असर?

भारत की एनर्जी स्ट्रैटजी बदलने का सीधा संबंध रसोई से है. अगर भारत के पास अमेरिका समेत कई देशों से LPG खरीदने का विकल्प रहेगा तो किसी एक एरिया में संकट आने पर पूरी घरेलू सप्लाई व्यवस्था के प्रभावित होने का रिस्क नहीं रहेगा. लेकिन दूसरी तरफ अमेरिकी एलपीजी की लंबी दूरी और आयात की खर्च ज्यादा है. यदि लंबे समय तक अमेरिकी कार्गो का हिस्सा बहुत ज्यादा रहता है तो आयातित एलपीजी की कुल लागत पर दबाव बना रह सकता है. इसलिए भविष्य में एलपीजी के दाम के लिए तीन चीजें अहम रहेंगी.

इस पूरे बदलाव को इस रूप में देखना कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है और अमेरिका से एलपीजी ले रहा है, इसे इस तरह देखना सही नहीं. असल में भारत अपनी एनर्जी बाइंग को एक देश या एक सेक्टर पर निर्भर रखने की बजाय डायवर्सिफाई कर रहा है. रूस से क्रूड ऑयल भारत के लिए अहम है, जबकि अमेरिका LPG का बड़ा सप्लायर बन गया है. अगस्त में अमेरिका भारत के LPG आयात में 50% से ज्यादा हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा. लेकिन आगे अमेरिकी हिस्सेदारी कितनी रहेगी, यह होर्मुज संकट और खाड़ी देशों की सप्लाई पर निर्भर करेगा.

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About the Author

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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