BRICS vs G7: कौन बड़ा, कौन ज्यादा ताकतवर और दुनिया पर किसका असर ज्यादा?
BRICS के पास बड़ी आबादी, ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधन और विशाल बाजार जैसी ताकतें हैं, लेकिन समूह के सामने कई चुनौतियां भी हैं. सदस्य देशों के बीच भू-राजनीतिक मतभेद, आर्थिक असमानता, सीमित आपसी व्यापार, वित्तीय निर्भरता और संस्थागत कमजोरियां इसकी एकजुटता और प्रभाव बढ़ाने में बाधा बन सकती हैं.
नई दिल्ली में 11 सितंबर को BRICS समिट होगी. समिट से पहले एक बार फिर तुलनात्मक चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं और कई तरह के सवाल भी पैदा हो रहे हैं. कई सवालों के बीच एक सवाल यह भी है कि क्या ब्रिक्स अब G7 को चुनौती देने का हालत में आ गया है. BRICS के पास बड़ी आबादी, उभरती अर्थव्यवस्थाएं, ऊर्जा संसाधन और ग्लोबल साउथ की आवाज है. वहीं G7 के पास वैश्विक वित्त, आधुनिक तकनीक, बड़ी कंपनियां और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर पुराना प्रभाव है.
G7 क्या है?
सबसे पहले जानते हैं कि G7 क्या है. G7 यानी Group of Seven. इसमें अमेरिका, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और कनाडा शामिल हैं. यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में भाग लेता है. इसकी शुरुआत 1970 के दशक में तेल संकट के दौर में हुई थी. उस समय दुनिया की बड़ी विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने मिलकर आर्थिक मुद्दों पर बात करने के लिए यह मंच बनाया था. इस ग्रुप में मौजूद सभी देशों की आबादी सिर्फ 80 करोड़ है, जो दुनिया की सिर्फ 10 प्रतिशद आबादी है. इतनी कम आबादी होने के बावजूद पूरी दुनिया की अर्थव्यस्था में इनका प्रभाव बहुत ज्यादा है.
G7 के 7 सदस्य कौन से हैं?
- अमेरिका
- कनाडा
- ब्रिटेन
- फ्रांस
- जर्मनी
- इटली
- जापान
G7 के पास कौन-कौन सी बड़ी संस्थाएं हैं
- IMF, World Bank: कर्ज और वैश्विक आर्थिक नीतियों में इनकी भूमिका मजबूत है.
- UN Security Council: अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं और इनके पास वीटो पावर है.
- NATO: अमेरिका समेत छह G7 देश इस सैन्य गठबंधन में हैं.
- वैश्विक वित्तीय व्यवस्था: डॉलर, यूरो, येन और पाउंड जैसी प्रमुख मुद्राओं के कारण व्यापार और निवेश में इनका असर है.
BRICS क्या है?
ब्रिक्स की शुरुआत साल 2001 में BRIC के तौर पर हुई थी. इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे. हालांकि 2010 में दक्षिण अफ्रीका भी इस ग्रुप का हिस्सा बन गया. जिसके बाद इसका नाम BRICS हो गया. हालांकि अब इसका और विस्तार हो गया है. मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया भी शामिल हैं. ब्रिक्स में शामिल सभी देशों BRICS देशों की आबादी दुनिया की लगभग आधी आबादी के बराबर है. इसमें चीन और भारत जैसे दो सबसे ज्यादा आबादी वाले मुल्क शामिल हैं.
BRICS को अक्सर G7 के विकल्प के रूप में पेश किया जाता है. इसकी वजह साफ है. BRICS में दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं, प्रमुख ऊर्जा उत्पादक और बड़े बाजार शामिल हैं. रूस, ईरान, सऊदी अरब और यूएई जैसे देश ऊर्जा बाजार में अहम भूमिका रखते हैं. चीन दुनिया का बड़ा विनिर्माण केंद्र है. भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और बड़ा डिजिटल बाजार है. ब्राजील कृषि और प्राकृतिक संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण है. दक्षिण अफ्रीका अफ्रीकी महाद्वीप में एक प्रमुख अर्थव्यवस्था है. लेकिन BRICS की सबसे बड़ी ताकत उसकी सबसे बड़ी चुनौती भी है. इसके सदस्य देश बहुत अलग-अलग राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक हित रखते हैं.
BRICS की ताकत क्या है?
- दुनिया की करीब 49% आबादी: 11 सदस्य देशों में करीब 3.9 अरब लोग.
- दुनिया की करीब 39% GDP (PPP): खरीदने की क्षमता के हिसाब से.
- दुनिया के 40% से ज्यादा तेल उत्पादन: रूस, सऊदी अरब, ईरान, UAE और ब्राजील की वजह से.
- प्राकृतिक गैस में भी बड़ी हिस्सेदारी: BRICS देशों के पास वैश्विक गैस संसाधनों और उत्पादन का बड़ा हिस्सा है.
- दुर्लभ खनिज (Rare Earths): BRICS देशों के पास दुनिया के करीब 72% rare-earth reserves बताए जाते हैं.
- बहुत बड़ा कृषि और खाद्य उत्पादन: खासकर ब्राजील, भारत, चीन और रूस के कारण.
- विशाल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता: चीन की वजह से BRICS का औद्योगिक आधार बेहद बड़ा है.
- टेक्नोलॉजी और डिजिटल क्षमता: चीन और भारत इसकी प्रमुख ताकत हैं.
- दुनिया के बड़े वन और प्राकृतिक संसाधन: BRICS देशों का वैश्विक वन क्षेत्र में भी बड़ा हिस्सा है.
- दुनिया का बड़ा व्यापारिक बाजार: BRICS देश मिलकर वैश्विक व्यापार का करीब 23% हिस्सा रखते हैं.
- New Development Bank (NDB): बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने वाला BRICS बैंक.