तिरुमाला की पहाड़ियों में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के धाम में उनकी शक्ति को हर पल महसूस किया जा सकता है. तिरुमाला को भूलोक का वैकुंठ कहा जाता है. तिरुपति बालाजी के दर्शन करने देश-दुनिया से भक्त खिंचे चले आते हैं. नवरात्रि ब्रह्रोत्सव के दौरान भगवान के गरुण दर्शन की महिमा निराली है.
वेंकटेश्वर स्वामी कुछ विशेष मौकों पर गरुण पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देते हैं. एक ऐसा ही एक शुभ अवसर पर स्वामी की मूल मूर्ति पर हमेशा की तरह दिव्य आभूषणों और रत्नों की सजावट के साथ विशेष अलंकरण किया गया है. भगवान और उनके प्रमुख सेवक गरुड़ के जिस मंगल स्वरूप के दर्शन के लिए लोग खड़े हैं, उनकी छटा भी निराली नजर आई.
शनिवार का दिन बहुत खास रहा. इस मौके पर भगवान को लक्ष्मी हार और मकर कंठी धारण कराया गया. पुराने समय के राजाओं ने जो हार और आभूषण भगवान को भेंट में अर्पित किए थे, उन्हें भगवान को पहनाया गया है. वेंकटेश्वर स्वामी का विशेष श्रंगार हुआ. भगवान के ऊपर से भक्तों की नजर नहीं हट रही थी, मानो वो अपनी आंखों में भगवान को हमेशा के लिए बसा लेना चाहते हों.

भगवान के आभूषण श्रंगार मंडप पर लाए गए. इस समारोह के लिए भी टीटीडी ने विशेष तैयारी की है. जिस समय आभूषण यहां होते हैं, उस समय भगवान बिना आभूषणों के रहते हैं.
भगवान वेंकटेश्वर स्वामी को मलयप्पा स्वामी भी कहा जाता है. उनकी मूर्ति का दिव्य अलंकरण होता है. भगवान गरुड़ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने आते हैं.
इस तरह शनिवार को भगवान वेंकटेश्वर के अवतार श्री मलयप्पा स्वामी को गरुड़ वाहन की सवारी के साथ दर्शन के लिए निकाला गया. गरुड़ सेवा तिरुपति मंदिर में आयोजित होने वाले ब्रह्मोत्सवम का एक मुख्य आकर्षण होता है. जिसमें भगवान को गरुड़ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने की परंपरा है.

गरुड़, जिन्हें भगवान विष्णु का वाहन माना जाता है, उन्हें भी इस अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया था, और इस सेवा के दौरान भक्तों ने बड़ी श्रद्धा के साथ श्री मलयप्पा स्वामी के दिव्य दर्शन किए. लाखों श्रद्धालुओं ने गरुड़ सेवा का आनंद लेते हुए भगवान मलयप्पा स्वामी से अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना की.
टीटीडी के खास इंतजाम
पिछले ब्रह्रोत्सव में दो लाख से अधिक लोगों ने गरुण पर सवार भगवान के दर्शन किए थे, इस बार ये आंकड़ा ज्यादा है, इसके लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थान ने विशेष इंतजाम किए हैं.

इस दौरान भक्ति संगीत और गोविंदा-गोविंदा की जयकार और मंत्रोच्चारण से वातावरण आध्यात्मिक और भक्तिमय बन गयाा.
नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि ब्रह्रोत्सव के आयोजन में शनिवार को काफी बारिश के बावजूद, लाखों भक्त भगवान के विशेष दर्शन के लिए पूरे भक्तिभाव से खड़े नजर आए. कुछ विशेष दिनों में ही भगवान का लक्ष्मी हार, सहस्त्रनाम हार और मकरकंठी पहनाकर अद्भुत रूप में श्रंगार किया जाता है. भगवान के इस विशेष दर्शन की इतनी महिमा है कि उनकी कृपा को पाने के लिए देश-विदेश से भक्त इस दर्शन के लिए यहां पहुंचे हैं.