स्पेन ट्रेन हादसाः 80 के दशक की तकनीकी और कंप्यूटर नेटवर्क क्रैश, जानें कैसे फेल हो गया दुनिया का बेस्ट 'ट्रेन सुरक्षा प्रणाली' सिस्टम
स्पेन के पास दुनिया के सबसे एडवांस रेलवे सिस्टम में से एक है, फिर भी इस साल देश में दूसरी बार भयानक ट्रेन हादसा देखने को मिला है. टोलेडो प्रांत में हुए रेल हादसे में करीब 68 लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं.
स्पेन के टोलेडो प्रांत में बुधवार (28 अक्टूबर) को दो हाई-स्पीड ट्रेनें आपस में टकरा गईं. ट्रेनों की टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रेन की कई बोगियों की धज्जियां उड़ गईं. इस भीषण ट्रेन हादसे में करीब 68 लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. हादसे के बाद प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने घटनास्थल का दौरा किया और दुर्घटना की विस्तृत जांच कराने का वादा किया. शुरुआती आकलन में हादसे के पीछे मुख्य सिग्नलिंग सिस्टम में खराबी की बात सामने आई है. एक्सपर्ट्स भी इस घटना के पीछे स्पेन की रेल प्रणाली की बेहद विफलता मान रहे हैं. बता दें कि स्पेन के पास दुनिया के सबसे एडवांस रेलवे सिस्टम में से एक है, फिर भी इस साल देश में दूसरी बार भयानक ट्रेन हादसा देखने को मिला है. इससे पहले 18 जनवरी को इसी हाई-स्पीड लाइन पर कॉर्डोबा के पास एडमज में एक ट्रेन पटरी से उतर गई थी, जिसमें 46 लोगों की मौत हो गई थी. अब सवाल यह है कि आखिर वो कौन से कारण थे कि दुनिया का सबसे बेस्ट 'ट्रेन सुरक्षा प्रणाली' सिस्टम फेल हो गया.
बता दें कि स्पेन में हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन के लिए 'LZB रेलवे सिस्टम' का इस्तेमाल होता है. यह एक बेहद हाईटेक सुरक्षा और संचार प्रणाली है. देश के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, इसे विशेष रूप से स्पेन के लिए ही बनाया गया है. यह सुरक्षा प्रणाली ऑटोमैटिक मोड पर काम करती है. हालांकि, जब इसमें खराबी आती है, तो मैनुअल मोड पर भी ऑपरेट करने की सुविधा है. जानकारी के मुताबिक, इस सिस्टम में रेल पटरियों पर सेंसर लगे होते हैं, जिनकी मदद से कंप्यूटर को लगातार संदेश जाते रहते हैं. एक केंद्रीय कंप्यूटर सिस्टम लगातार ट्रैक और ट्रेन की स्थिति पर नजर रखता है. ट्रेन पर लगे एंटीना भी लगातार डेटा रिसीव करते रहते हैं.
LZB रेलवे सिस्टम की खासियत
इस हाइटेक रेलवे सिस्टम की मदद से ट्रेनों की गति को नियंत्रित किया जाता है. अगर ड्राइवर गलती से तय सीमा से तेज गति में ट्रेन चलाता है, तो सिस्टम खुद ही ट्रेन की रफ्तार धीमी कर देता है. इतना ही नहीं इस सिस्टम की मदद से लोको पायलट को सिस्टम पर ही सिग्नल की सुविधा मिलती है. इससे कोहरे या खराब मौसम में उन्हें काफी मदद मिलती है. सिस्टम में लगे रडार सिग्नल भेज देते हैं. अगर लाइन खाली नहीं है या सामने से कोई ट्रेन आ जाए, इस सिस्टम में लगे रडार सिग्नल भेज देते हैं और ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक एक्टिव हो जाते हैं. इससे ट्रेनों के भिड़ने की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं.
स्पेन में कैसे फेल हो गया यह सिस्टम?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्पेन में बुधवार की सुबह करीब 8 बजे सिस्टम का मुख्य कंप्यूटर नेटवर्क अचानक से क्रैश हो गया था, जिसकी वजह से देश में रेल यातायात एक झटके में ही पूरी तरह से ठप्प हो गया था. सिस्टम फेल होने की वजहें बताई जा रही हैं. बताया जा रहा है कि इस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली तकनीक 80 के दशक की है. कई देशों में यह सिस्टम अब आउटडेटेड हो गया है. स्पेन में भी इस सिस्टम को बदलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी बड़े पैमाने पर इसी का उपयोग हो रहा है.
तकनीकि गड़बड़ी या इंसानी गलती?
बताया जा रहा है कि बुधवार को ऑटोमैटिक मोड में गड़बड़ी आ गई थी. इसी कारण से सारी ट्रेनें रुक गई थीं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वचलित सिस्टम फेल होने के बाद इंसानी नियंत्रण में रेल सेवा फिर शुरू की गई थी. स्पेन के रेलवे मंत्री ऑस्कर पुएंते ने भी इंसानी गलती की ओर ही संकेत दिया है. उन्होंने केंद्रीय कमांड सेंटर से आए एक ऐसे आदेश को जिम्मेदार ठहराया है, जिसकी वजह से रेनफे ट्रेन को बिना किसी गति सीमा के फिर से चलने का निर्देश मिला था. रेल मंत्री ने साफ कहा कि इस हादसे में ट्रेन के इंजीनियरों की कोई गलती नहीं थी.
रेल मंत्री पुएंटे के अनुसार, सुबह 8:30 बजे कंप्यूटर में खराबी आने से करीब 63 किलोमीटर के हिस्से में रेलवे सुरक्षा प्रणाली ठप हो गई थी और उस हिस्से में मौजूद सभी ट्रेनें रुक गई थीं. उन्होंने कहा कि इसके बाद सेंट्रल कमांड की ओर से रेनफे ट्रेन को बिना किसी गति सीमा के फिर से चलने का निर्देश मिला. इस वजह से रेनफे ट्रेन 200 किमी/घंटा की स्पीड के साथ आगे बढ़ी और करीब 8:53 बजे इरयो ट्रेन से टकरा गई. पुएंटे ने कहा कि 'रेड सिग्नल' सक्रिय होने के बाद भी रेनफे ट्रेन को आगे बढ़ने का आदेश दे दिया गया था. उन्होंने कहा कि अगर ट्रेन को चलाने का आदेश दिया गया था, तो कम से कम स्पीड लिमिट तय की जानी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि मैं किसी पर गलती नहीं डाल रहा हूं, बस तथ्यों को पेश कर रहा हूं.