मोदी सरकार धीरे-धीरे पूरे धैर्य के साथ अपने एक महत्वाकांक्षी एजेंडे को देशभर में लागू कर रही है. वह एजेंडा है समान नागरिक संहिता यानी UCC, जो बीजेपी का शुरुआत से ही कोर मुद्दा रहा है. पार्टी का शुरू से ही कहना रहना रहा है कि देश में एक विधान, एक प्रधान और एक निशान रहना चाहिए. इनमें से एक प्रधान और एक निशान तो कब के लागू हो चुके हैं लेकिन मुस्लिमों और हिंदुओं के लिए अलग सिविल कानून अब भी लोगों में भेदभाव का एहसास करवा रहे थे. इसे दूर करने के लिए पार्टी ने 2014 में मोदी सरकार आने के बाद कदम बढ़ाए.
इस मुद्दे पर देश में कोई बवाल न हो, इसलिए केंद्रीय स्तर पर यह कानून लागू करने के बजाय इसे सहमति बनाकर राज्यवार लागू किया जा रहा है. उत्तराखंड में सफलतापूर्वक UCC लागू होने और कोई विरोध न होता देख अब बीजेपी शासित महाराष्ट्र सरकार भी राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने जा रही है. इसके लिए राज्य सरकार की ओर से गठित मसौदा समिति ने अपना आधिकारिक पोर्टल लॉन्च कर दिया है.
इस समिति के अध्यक्ष बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज एस. जी. मेहरे हैं और उन समेत 6 लोग इस कमेटी के सदस्य हैं. इस पोर्टल के जरिए समिति ने राज्य के आम नागरिकों, विशेषज्ञों और सामाजिक-धार्मिक संगठनों से 37 मुख्य सवालों पर अपने सुझाव और फीडबैक मांगे हैं. आइए जानते हैं कि यह पूरा मुद्दा क्या है और इसे कैसे अंजाम दिया जा रहा है.
चूंकि विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति उत्तराधिकार जैसे मुद्दे हरेक नागरिक के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन से गहराई से जुड़े होते हैं. इसलिए इस काम में जबरदस्ती करने के बजाय सरकार ने जनता से राय लेने का तरीका अपनाया है. इसका मकसद ये है कि सभी लोगों को अपने सुझाव रखने का अवसर दिया जाए और किसी को यह न लगे कि कानून लागू करने में उसकी बात नहीं सुनी गई.
मसौदा समिति की ओर से जारी पोर्टल पर 37 सवालों की प्रश्नावली उपलब्ध करवाई गई है. इन सवालों के जवाब मुख्य रूप से तीन विकल्पों- हां, नहीं और टिप्पणी नहीं पर देने हैं. इसे आप एक तरह का सर्वे भी मान सकते हैं, जिससे सरकार को जनता के मूड का पता चल जाएगा.
पोर्टल में लोगों से यह भी पूछा गया है कि क्या लिव-इन रिलेशनशिप में रहने और उसे खत्म करने के लिए सरकारी पंजीकरण अनिवार्य किया जाना चाहिए?
यह सवाल भी पूछा गया है कि क्या लिव-इन रिलेशनशिप में महिला या पार्टनर को छोड़ देने पर उन्हें भरण-पोषण और संपत्ति अधिकारों का कानूनी दावा करने का मौका मिलना चाहिए?
राज्य सरकार की ओर से UCC पर काम करने के लिए बनाई गई मसौदा समिति ने लोगों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से अपने सुझाव जमा करने का विकल्प दिया है. लोगों से आग्रह किया गया है कि वे 15 नवंबर तक पोर्टल पर जाकर अपने सुझाव सबमिट करवा सकते हैं.
इसके लिए उन्हें आधिकारिक वेबसाइट ucc.maharashtra.gov.in पर जाना होगा. वहां पर जाकर आप प्रश्नावली को भर सकते हैं. अगर आप समिति को डिटेल में अपना सुझाव देना चाहते हैं तो ईमेल के जरिए ucc@maharashtra.gov.in पर भी अपना फीडबैक दे सकते हैं. इसके अलावा डाक के जरिए भी समिति को अपने सुझाव भेजे जा सकते हैं. इसके लिए समान नागरिक संहिता समिति, महाराष्ट्र, सेकंड फ्लोर, ओल्ड कस्टम हाउस, शहीद भगत सिंह रोड, फोर्ट मुंबई, महाराष्ट्र- 400001 का पता दिया गया है.
जनता से सुझाव मिलने के बाद मसौदा समिति 16 नवंबर से फीडबैक का विश्लेषण करेगी. इसके बाद महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों, कॉलेजों, महिला व नागरिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ जनसुनवाइयों का दौर शुरू होगा. यह सारे काम खत्म होने के बाद समिति UCC पर अपनी फाइनल सिफारिशें तैयार कर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंप देगी.
कमेटी का फाइनल ड्राफ्ट मिलने के बाद कैबिनेट बैठक कर उसे मंजूरी दी जाएगी. इसके बाद उस पर बिल बनाकर सदन में पेश किया जाएगा. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, सरकार की कोशिश रहेगी कि UCC बिल को नागपुर में होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश कर दिया जाए.
चूंकि विधान सभा में बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार का स्पष्ट बहुमत है. इसलिए वहां से विधेयक पास होने में कोई दिक्कत नहीं होगी. इसके बाद अंतिम मंजूरी के लिए अनुच्छेद 254(2) के तहत उसे राष्ट्रपति को भेजा जाएगा. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और राज्य सरकार की ओर से कानून से जुड़े नियम नोटिफाई करने के साथ ही UCC राज्य में लागू हो जाएगा.
आजादी के बाद देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता पर कानून उत्तराखंड में वर्ष 2024 में बना. उसने भी इस काम को अंजाम देने के लिए 2022 में ड्राफ्टिंग कमेटी बनाई थी, जिसकी सिफारिशें मिलने के 2 साल बाद इसे कानून का रूप दिया गया. इसके बाद गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में UCC से जुड़े बिल पास किए जा चुके हैं. गुजरात और असम के कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है और अब वहां पर इससे जुड़े नियम नोटिफाई करने की प्रक्रिया चल रही है. जबकि मध्य प्रदेश अपने यूसीसी बिल को राष्ट्रपति को भेजने जा रहा है.
इन राज्यों के अलावा छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी यूसीसी पर कानून बनाने के लिए ड्राफ्टिंग कमेटियों का एलान हो चुका है. यानी कि अगले कुछ महीनों में इन राज्यों में भी एक समान नागरिक कानून लागू हो सकेंगे.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का कहना है कि वर्ष 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य रखा गया है. ये सभी वे राज्य हैं, जहां पर बीजेपी अपने दम पर या सहयोगियों के साथ मिलकर सत्ता में है. बाकी बचे राज्यों में वहां पर सत्ता में आने के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने का टारगेट तय किया गया है.