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'कॉकरोच जनता पार्टी' यानी सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन बुलाया था. इसके चलते दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर जाने वाले रास्तों को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया.
टॉयस्टॉय मार्ग-संसद मार्ग चौराहे पर, कम से कम दो लेयर के बैरिकेड्स ने उस जगह की ओर जाने वाले लोगों और गाड़ियों को रोक दिया. कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल पर अशोक रोड गोलचक्कर की ओर जाने वाला रास्ता बंद कर दिया गया और ट्रैफिक को सड़क की दूसरी तरफ मोड़ दिया गया.
एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि 37 ऐसी जगहों पर बैरिकेड्स लगाए गए थे जहां से प्रदर्शनकारी आ सकते थे. साथ ही, पुलिस ने सेंट्रल और नई दिल्ली जिलों की सीमाओं पर और दक्षिण, दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम जिलों से जुड़ने वाले रास्तों पर पिकेट (चौकियां) बनाए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर वो कौन सा खास कानून है, जिसके तहत दिल्ली पुलिस राजधानी की सड़कों को बंद कर सकती है. चलिए आपको बताते हैं
दिल्ली पुलिस एक्ट, 1978 शहर की सड़कों पर पुलिस बल को खास अधिकार देता है. इसे संसद ने केंद्र शासित प्रदेश में पुलिसिंग को रेगुलेट करने के लिए पास किया था. एक नियम के तहत पुलिस कमिश्नर किसी सड़क या सार्वजनिक जगह को आम जनता के लिए बंद कर सकते हैं. एक और नियम से वह गाड़ियों को रोक सकते हैं और उनकी जांच करने के लिए बैरियर लगाने का आदेश दे सकते हैं. तीसरे नियम के तहत वह ट्रैफिक और सड़कों को बंद करने के बारे में स्थायी नियम बना सकते हैं. अब आपको नियमों के बारे में विस्तार से बताते हैं.
यह एक्ट 1 जुलाई, 1978 से लागू हुआ और इसने पूरी दिल्ली के लिए एक ही पुलिस बल बनाया. इस फोर्स के मुखिया पुलिस कमिश्नर होते हैं, जिनकी नियुक्ति एडमिनिस्ट्रेटर करते हैं. एडमिनिस्ट्रेटर वह अधिकारी होता है, जिसके जरिए राष्ट्रपति संविधान के आर्टिकल 239 के तहत केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन चलाते हैं. दिल्ली में संविधान के तहत वह अधिकारी उप-राज्यपाल यानी लेफ्टिनेंट गवर्नर हैं.
ज्यादातर अधिकार कमिश्नर को दिए गए हैं. डिप्टी कमिश्नर, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर कमिश्नर के आदेश पर इन अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं.
इस एक्ट में 'सड़क' की परिभाषा काफी बड़ी है. इसमें हाईवे, पुल, सड़कें, गलियां, फुटपाथ, चौराहे, तंग रास्ते और आम जनता के लिए खुले रास्ते शामिल हैं, चाहे वे आर-पार जाने वाले रास्ते हों या नहीं.
सेक्शन 36(1) कमिश्नर को यह अधिकार देता है कि वे सार्वजनिक सूचना जारी करके किसी सड़क या दूसरी सार्वजनिक जगह को कुछ समय के लिए किसी सार्वजनिक काम के लिए बंद कर सकते हैं. एक बार जब कोई इलाका बंद कर दिया जाता है, तो वहां लोगों की एंट्री बैन हो जाती है.
इस प्रावधान में तीन शर्तें बताई गई है. सड़क अस्थायी तौर पर बंद होनी चाहिए. इसका मकसद जनहित होना चाहिए और इसकी घोषणा एक सार्वजनिक सूचना के जरिए की जानी चाहिए।
एक्ट की धारा 36(2) में बैरियर का जिक्र है. जब भी दिल्ली पुलिस कमिश्नर को जरूरी लगेगा तो वह अधिकारियों को किसी भी सड़क पर बैरियर लगाने का आदेश दे सकते हैं. इसका मकसद उस सड़क पर चल रही गाड़ियों को कुछ समय के लिए रोकना है. गाड़ियों को रोकने का एक तय मकसद होता है. यानी यह जांच करना कि गाड़ी, उसके ड्राइवर या उसके इंचार्ज शख्स ने किसी कानून का उल्लंघन तो नहीं किया है. यही धारा कमिश्नर को ऐसे बैरियर के इस्तेमाल के तरीके के बारे में आदेश जारी करने का अधिकार भी देती है.
गाड़ी की परिभाषा भी काफी अहम है. एक्ट के तहत कैरिज, गाड़ी, वैन, ट्रक, हाथगाड़ी, साइकिल, तिपहिया वाहन, रिक्शा और मोटर वाहन को 'गाड़ी' माना जाता है. इस परिभाषा में जहाज और हवाई जहाज भी शामिल हैं.
हर मामले के हिसाब से मिलने वाले इन अधिकारों के अलावा, धारा 28 कमिश्नर को 'ऑफिशियल गजट' में नोटिफिकेशन के जरिए नियम बनाने का अधिकार देती है. ये नियम सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर हर तरह के ट्रैफिक को नियंत्रित कर सकते हैं-जैसे लोगों का चलना, साइकिल चलाना, सवारी करना या गाड़ी चलाना ताकि जनता को कोई खतरा, रुकावट या परेशानी न हो.
नियम यह भी तय कर सकते हैं कि किन शर्तों पर गाड़ियां सड़क पर खड़ी की जा सकती हैं. इसी धारा के क्लॉज (t) के तहत, वे कुछ खास सड़कों या जगहों को कुछ समय के लिए बंद करने का प्रावधान कर सकते हैं, अगर वहां जर्जर इमारतों या किसी और वजह से कोई खतरा हो.
ट्रैफिक से जुड़े ये नियम एडमिनिस्ट्रेटर के कंट्रोल में होते हैं. इस धारा के दूसरे क्लॉज के तहत बनने वाले नियमों के लिए एडमिनिस्ट्रेटर की मंजूरी पहले से लेनी जरूरी होती है.
एक्ट यह भी कहता है कि इन नियमों को पहले से पब्लिश किया जाना चाहिए. एक बार नियम बन जाने के बाद, प्रभावित इलाके में इनकी जानकारी दी जानी चाहिए. इसके लिए आसपास की प्रमुख जगहों पर इनकी कॉपी लगाई जा सकती है, ढोल बजाकर घोषणा की जा सकती है, या हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी (या इनमें से कम से कम दो भाषाओं) के स्थानीय अखबारों में विज्ञापन दिया जा सकता है. कमिश्नर किसी और तरीके का इस्तेमाल भी कर सकते हैं जिसे वे सही समझें.
फिर भी, इसमें एक अपवाद है. अगर कमिश्नर को लगता है कि हालात ऐसे हैं कि किसी नियम को तुरंत लागू करना जरूरी है, तो वह उसे पहले से पब्लिश करने की जरूरत को छोड़ सकते हैं.
इस एक्ट के तहत ट्रैफिक को रेगुलेट करना हर ऑफिसर के काम का हिस्सा है. हर पुलिस ऑफिसर की यह ड्यूटी है कि वह सड़कों पर ट्रैफिक को रेगुलेट और कंट्रोल करे. साथ ही सड़कों या उनके आसपास लागू किसी नियम या आदेश के उल्लंघन को रोके.
एक्ट को लागू करने के लिए, ऑफिसर उन लोगों को चेतावनी दे सकते हैं जो अनजाने में नियम तोड़ते हैं, और एक्ट या उसके तहत बने किसी आदेश के खिलाफ काम करने वाले किसी भी शख्स को रुकने का आदेश दे सकते हैं. सेक्शन 28 के तहत बने ट्रैफिक नियम को तोड़ना उन अपराधों में से एक है, जिनके लिए पुलिस बिना वॉरंट के किसी शख्स को गिरफ्तार कर सकती है.
सेक्शन 65 के तहत यह जरूरी है कि हर कोई एक्ट के तहत ड्यूटी के दौरान पुलिस ऑफिसर की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन करे. अगर कोई शख्स विरोध करता है या मना करता है, तो ऑफिसर उसे हटा सकते हैं और या तो उसे मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने ले जा सकते हैं. या आम मामलों में, उस स्थिति के खत्म होने पर छोड़ सकते हैं जिसके कारण उसे हटाया गया था. दोनों ही मामलों में यह 24 घंटे के भीतर होना चाहिए.
इन अधिकारों के लिए एक्ट में कुछ शर्तें बताई गई हैं. किसी सड़क को सिर्फ कुछ समय के लिए, किसी सार्वजनिक मकसद से और सार्वजनिक सूचना के जरिए ही रोका जा सकता है. गाड़ियों के बैरियर के लिए कमिश्नर की मंजूरी जरूरी होती है और ये कानून के हिसाब से गाड़ियों की जांच के लिए होते हैं. साथ ही, ट्रैफिक और सड़क बंद करने से जुड़े मौजूदा नियमों की जानकारी ऑफिशियल गजट में दी जानी चाहिए, जो आम तौर पर पहले से पब्लिश करने के बाद होता है.