ग्वालियर जिले में नगर निगम ऑफिस में अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला है. रिश्वत के आरोप में एक युवक अपने गले में 100 रुपए के 5 नोटों की माला पहनकर निगम दफ्तर पहुंचा है. जहां पर युवक ने कई गंभीर आरोप लगाए. मामला जैसे ही तूल पकड़ा, वैसे ही अपर आयुक्त ने जांच के आदेश दिए हैं. वहं पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री से दोषियों पर कार्रवाई और रिश्वतखोरी पर लगाम लगाने की मांग की है.
नोटों की माला पहने युवक ने गंभीर आरोप लगाए हैं. युवक का कहना है कि परिवार का मुखिया कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है. पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है. युवक ने आगे कहा कि रिश्वत न देने पर पहले राशन की व्यवस्था बंद की गई, उसके बाद आयुष्मान योजना का लाभ भी मिलना बंद हो गया है.
शिकायत में क्या ?
पीड़ित कल्याण सिंह की शिकायत से पता चला है कि परिवार परिवार गरीबी रेखा की श्रेणी में आता है. वह परिवार का मुखिया है, उसका कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज चल रहा है. बीमारी के चलते परिवार की आर्थिक स्थिति भी खराब हो चुकी है. परिवार को गरीबी रेखा के कार्ड को समग्र आईडी से लिंक कराना था. शिकायत के मुताबिक, इस प्रक्रिया के लिए उसे शारदा विहार स्तिथ निगम कार्यालय से संबंधित काम कराना था.
पीड़ित के आरोप
पीड़ित का आरोप है कि वार्ड क्रमांक-60 क्षेत्राधिकारी ऑफिस के संबंधित अधिकारी-कर्मचारी ने काम करने के बदले पहले 1500 रुपये की मांग की. आर्थिक असमर्थता जताने पर 1000 रुपए देने को कहा गया. शिकायत में यह लिखा है कि बाद में 500 रुपये देने पर काम करने की बात कही गई. लेकिन रकम देने में असमर्थता जताने के बाद परिवार का राशन बंद हो गया. बाद में आयुष्मान योजना का लाभ भी रुक गया. यही वजह है कि पीड़ित युवक ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया. 500 रुपये का नोट गले में लटकाकर नगर निगम पहुंच गया.
पीड़ित ने की मांग
पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत में पूरे मामले की जांच की मांग की है. परिवार का कहना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हुरावली निवासी कल्यान सिंह के इलाज के बीच सरकारी योजनाओं का लाभ बंद होना उनके लिए बड़ी परेशानी बन गया है. शिकायत में यह भी कहा गया है कि विमुक्त, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजाति से जुड़े परिवारों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाना अधिकारियों की जिम्मेदारी है. यदि किसी अधिकारी-कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर आर्थिक राशि यानी रिश्वत की मांग की गई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
जांच के दिए निर्देश
नगर निगम के अपर आयुक्त प्रदीप तोमर का कहना है कि मामला नगर निगम की जनसुनवाई में पहुंचने के बाद अपर आयुक्त प्रदीप ने जांच के निर्देश दिए हैं. शिकायतकर्ता ने संबंधित कर्मचारी पर लगाए गए रिश्वत मांगने के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है. अब जांच के बाद ही यह साफ होगा कि रिश्वत की मांग के आरोपों में कितनी सच्चाई है. परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ किस वजह से नहीं मिल पाया.