रायसेन में अनोखा महायज्ञ: धूनी में स्वाहा हुआ डेढ़ किलो सोना और 1.51 लाख किलो हवन सामग्री; संत को मिला इंटरनेशनल रिकॉर्ड
Raisen News: रायसेन जिले के उदयपुरा में दादा धूनी दरबार में संत शिवानंद महाराज द्वारा एक भव्य महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है. इस आयोजन के दौरान 1.5 किलो सोना और 1,51,000 किलो हवन सामग्री अर्पित की गई.
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के उदयपुरा में स्थित दादा धूनी दरबार में एक ऐतिहासिक और अलौकिक महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है. इस अनुष्ठान में कुल 1,51,000 किलोग्राम सामग्री की आहुति दी जा रही है. इसमें फल, फूल और मिठाइयों के साथ-साथ 251 तरह की दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियां, 1.5 किलो सोना और 4 किलोग्राम से ज्यादा चांदी के आभूषण शामिल हैं. इस अनोखे आयोजन के लिए संत शिवानंद महाराज को 'इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' की ओर से एक प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया है, जो विश्व रिकार्ड बताया जा रहा है.
8 अक्टूबर तक चलेगा दिव्य महायज्ञ
इस बीच, संत शिवानंद महाराज श्री श्री 1008 दादा धूनी वाले के आशीर्वाद से और बिना किसी से दान लिए 21 दिन तक चलने वाले नर्मदा संकीर्तन (जो 8 अक्टूबर तक चलेगा) का आयोजन कर रहे हैं. संत शिवानंद महाराज ने एक चुनौती दी है कि अगर दुनिया में कोई और ऐसा आयोजन कर सकता है, तो वे उसे ₹21 करोड़ का नकद इनाम देंगे.
धूनी में डेढ़ किलो सोना और 4-5 किलो चांदी अर्पित किए
यहां 51 दिनों तक यज्ञ की धधकती आग में मां नर्मदा को 1 लाख 51 हजार किलो फल, फूल, मिठाइयां, कपड़े, 251 तरह की दुर्लभ जड़ी-बूटियां और सोने-चांदी के गहने अर्पित किए गए. हजारों भक्त दिन-रात प्रसाद ग्रहण करते थे. संत शिवानंद महाराज ने कहा कि दादा धूनी वाले और नर्मदा जी के आशीर्वाद से वे बचपन से ही ऐसा करते आ रहे हैं और जीवन के अंत तक ऐसा करते रहेंगे. महाराज जी ने बताया कि अब तक धूनी में डेढ़ किलो सोना और 4-5 किलो चांदी के गहने अर्पित किए जा चुके हैं. महाराज जी किसी से कोई मदद नहीं लेते, वे दादा धूनी वाले महाराज के आशीर्वाद की बात कहते हैं.
महाराज को मिलेगा विश्व रिकार्ड
इतनी बड़ी मात्रा में पैसा कहां से आता है, यह एक बड़ा रहस्य है. महाराज को जल्द ही एक वर्ल्ड रिकॉर्ड मिलने वाला है. महाराज जी ने कहा कि धूनी में चांदी और सोना जलकर चांदी और स्वर्ण भस्म बन जाती है, जिसे मां नर्मदा में विसर्जित किया जाता है. ऐसे आयोजन साल में चार-पांच बार अलग-अलग जगहों पर होते हैं. यहां भोजन की कभी कमी नहीं होती. धुनी सिर्फ एक आग नहीं है. यह स्वयं मां नर्मदा का जीवंत रूप है, जिन्हें सजावट के तौर पर कपड़े, सोना और चांदी अर्पित किए जाते हैं.
जन-भक्ति का अनूठा उदाहरण
रायसेन के उदयपुरा में आयोजित 'महायज्ञ' और 21-दिवसीय नर्मदा संकीर्तन इस क्षेत्र में लोगों की अटूट आस्था का केंद्र बन गए हैं. इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बनाने और बिना किसी बाहरी दान के सफलतापूर्वक संपन्न होने वाला यह विशाल अनुष्ठान आध्यात्मिकता और जन-भक्ति का एक अनूठा उदाहरण है.