मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में पुलिस प्रशासन ने नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कड़े और सराहनीय कदम उठाए हैं. पुलिस अधीक्षक (SP) ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए शहर भर में आयोजित विभिन्न गरबा कार्यक्रमों का औचक निरीक्षण किया. साथ ही, उन्होंने वहां मौजूद महिलाओं से बातचीत की और उन्हें उनकी पूर्ण सुरक्षा का भरोसा दिलाया.
एसपी ने बताया कि महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रात 8:00 बजे से तड़के 2:00 बजे तक महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. जरूरत पड़ने पर महिलाएं पुलिस से मदद ले सकती हैं और घर तक सुरक्षित पहुंचने के लिए सहायता मांग सकती हैं. मुख्यमंत्री ने उज्जैन में शुरू किए गए 'शक्ति दल' के प्रयासों की भी सराहना की है. इसके अलावा, महिलाओं से मिले सुझावों के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.
एसपी ने बताया कि पुलिस चेकिंग का मकसद सिर्फ उपद्रवियों पर नजर रखना ही नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आम नागरिक खासकर महिलाएं और युवतियां खुद को सुरक्षित महसूस करें. शहर की प्रमुख जगहों पर पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर लोग आसानी से मदद ले सकें. एसपी ने महिलाओं से अपील की कि अगर उन्हें कभी असहज महसूस हो या किसी खतरे का अंदेशा हो, तो वे 'शक्ति स्क्वॉड' से संपर्क करें या 112 नंबर डायल करें. उन्होंने सभी को नवरात्रि और विजयादशमी की शुभकामनाएं भी दीं.
इस बीच, इंदौर के अतिप्राचीन देवी मंदिर में गरबे का एक अनोखा रूप देखने को मिला. पारंपरिक डांडियों की जगह युवतियों के हाथों में तलवारें थीं. देवी को समर्पित भजनों और देशभक्ति गीतों की धुन पर गरबा करते हुए, उन्होंने अपनी तलवारें लहराईं जो महिलाओं के आत्मरक्षा के प्रति एक सशक्त संदेश देती हैं. प्रतिभागियों ने कई शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिसमें उन्होंने भक्ति और देशभक्ति संगीत पर नाचते हुए तलवार चलाने के अलग-अलग कौशल दिखाए. उन्होंने बताया कि गरबे का यह रूप बिल्कुल अलग है. इसके माध्यम से वे न केवल देवी की आराधना कर रही हैं, बल्कि 'नारी शक्ति' और महिला सशक्तिकरण का भी उदाहरण पेश कर रही हैं.
उज्जैन में नवरात्रि और गरबा आयोजनों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की पहल बेहद सराहनीय है. रात के समय महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती और जरूरत पड़ने पर युवतियों को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था, न केवल असामाजिक तत्वों के मन में डर पैदा करेगी, बल्कि आम नागरिकों विशेषकर महिलाओं का पुलिस पर भरोसा भी और मजबूत करेगी.