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RSS की इंदौर में तीन दिवसीय बैठक: संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी, खत्म होगी प्रांत व्यवस्था

इंदौर में होने वाली RSS की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में कई सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. इस बैठक का मुख्य फोकस संगठन का पुनर्गठन करना है, जिसके तहत मौजूदा 46 प्रांतों को खत्म करके उनकी जगह 85-90 संभाग बनाए जाएंगे.

Written By Ranjana Kahar
Published: Nov 02, 2026, 07:50 AM IST | Updated: Nov 02, 2026, 07:55 AM IST
Image Credit: RSS की इंदौर में तीन दिवसीय बैठक
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक सोमवार से मध्य प्रदेश के इंदौर में शुरू हो रही है. इस महत्वपूर्ण तीन दिवसीय बैठक में मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले समेत देशभर से करीब 406 पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगे. बैठक सुबह डेली कॉलेज में शुरू होगी, जहां दिन भर विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी. अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ​​के सत्र के बाद कार्यकारी मंडल की बैठक को संगठन की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक माना जाता है. इस बैठक में पिछले एक साल में किए गए कार्यों की समीक्षा की जाएगी और आने वाले वर्ष के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी.

संघ में खत्म होगी प्रांत व्यवस्था

बैठक में चर्चा का सबसे अहम मुद्दा संघ के संगठनात्मक ढांचे में प्रस्तावित बदलाव है. इस योजना के तहत मौजूदा प्रांत व्यवस्था को खत्म करके उसकी जगह संभाग (डिविजनल) इकाइयों पर आधारित ढांचा लाया जाएगा. इस प्रस्ताव के अनुसार, अभी के 11 क्षेत्र घटाकर 9 कर दिए जाएंगे, जबकि 46 प्रांतों की जगह 85 से 90 संभाग बनाए जाएंगे. राज्य स्तर पर प्रचारकों की व्यवस्था और समर्पित कार्यालय स्थापित किए जाएंगे. मालवा प्रांत को इंदौर और उज्जैन संभागों में बांटा जा सकता है. संघ से जुड़े लोगों के मुताबिक, इस पुनर्गठन का मकसद काम के लिए छोटे और आसानी से संभाले जा सकने वाले क्षेत्र बनाना है, ताकि संगठनात्मक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके. यह नई व्यवस्था मार्च 2027 से लागू की जा सकती है.

सामाजिक मुद्दों पर चर्चा

संगठनात्मक बदलावों के अलावा, बैठक में सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा होगी. नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी अभियान की योजनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर सामग्री के दुरुपयोग को रोकने और इस विषय के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा. इन चर्चाओं के आधार पर संघ आने वाले समय के लिए अपनी रणनीति और कार्यक्रम तैयार कर सकता है.

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा तीन साल में एक बार

संघ की सबसे बड़ी बैठक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा को हर साल के बजाय हर तीन साल में एक बार आयोजित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा चल रही है. पिछली प्रतिनिधि सभा हरियाणा में हुई थी, जिसमें 1,438 प्रतिनिधि शामिल हुए थे. इसी बैठक के दौरान संभाग-आधारित संगठनात्मक ढांचा लागू करने का निर्णय लिया गया था.

बैठक में कौन शामिल होगा?

संघ प्रमुख और सरकार्यवाह की उपस्थिति में होने वाली इस बैठक में सभी सह-सरकार्यवाह और विभिन्न कार्य विभागों के प्रमुख शामिल होंगे. इसके अलावा अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य और 11 क्षेत्रों और 46 प्रांतों के संघचालक, सह-संघचालक, कार्यवाह, सह-कार्यवाह, प्रचारक और सह-प्रचारक भी इसमें शामिल होंगे.

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बैठक अहम क्यों है

संगठन के चुनाव अगले चार महीने में होने वाले हैं, इसलिए यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण है. इसमें आने वाले साल के लिए एजेंडा तय किया जाएगा और चुनावों की तैयारियों पर भी चर्चा होगी. अगले साल मार्च में नागपुर में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ​​आयोजित होनी है. उससे पहले ही संगठनात्मक चुनाव पूरे कर लिए जाएंगे. 
 

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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