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शहडोल जिले के व्यौहारी विधानसभा क्षेत्र से सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर सामने आई है. आखेटपुर वार्ड नंबर-1 के डाला टोला में करीब एक किलोमीटर सड़क पर कीचड़ ही कीचड़ है. बारिश के बाद रास्ते की हालत इतनी खराब हो गई है कि लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब होने से रोजमर्रा की परेशानी तो है ही, बीमारी या किसी इमरजेंसी में दिक्कत और बढ़ जाती है. शहडोल जिले के ग्रामीण इलाकों में सड़क व्यवस्था को लेकर यह मामला अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.
आखेटपुर वार्ड नंबर-1 के डाला टोला में निवासी श्यामकली की तबीयत खराब हुई तो परिवार ने अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई. लेकिन सड़क पर फैले कीचड़ और खराब रास्ते के कारण एंबुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकी. इसके बाद परिवार के सामने मरीज को अस्पताल पहुंचाने की बड़ी मजबूरी खड़ी हो गई. आखिरकार श्यामकली को बैलगाड़ी के सहारे अस्पताल ले जाना पड़ा. शहडोल व्यौहारी की यह तस्वीर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत बयां कर रही है. जिस समय मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की जरूरत थी, उस समय खराब सड़क ही सबसे बड़ी जी का जंजाल बनी हुई है.
गंभीर मरीजों के लिए बढ़ती मुश्किल
ग्रामीणों का कहना है कि डाला टोला की खराब सड़क सिर्फ आने-जाने की परेशानी नहीं है, बल्कि बीमारी के समय बड़ी मुसीबत बन जाती है. उनका आरोप है कि सड़क की बदहाली के कारण गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता. शहडोल जिले के व्यौहारी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जाने वाले दावों के बीच यह सवाल खड़ा हो रहा है कि अगर एंबुलेंस गांव तक ही नहीं पहुंच पाए, तो जरूरतमंद मरीजों को समय पर अस्पताल कैसे मिलेगा. ग्रामीणों के मुताबिक, ऐसी स्थिति में मरीज को बैलगाड़ी या दूसरे साधनों से ले जाना मजबूरी बन जाता है.
व्यौहारी में सिस्टम पर बड़ा सवाल
डाला टोला की यह घटना शहडोल जिले की ग्रामीण सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. एक तरफ गांवों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ खराब सड़क के कारण एंबुलेंस मरीज के घर तक नहीं पहुंच पाती. व्यौहारी विधानसभा की इस तस्वीर ने जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं. ग्रामीणों की परेशानी साफ है कि सड़क ठीक हो तो मरीज को समय पर एंबुलेंस मिल सकती है और अस्पताल पहुंचना आसान हो सकता है. अब सवाल यही है कि डाला टोला की करीब एक किलोमीटर सड़क कब सुधरेगी.