SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

चिता आंदोलन: 7वें दिन पहुंचे कमिश्नर-कलेक्टर, विस्थापितों से बोले-गांव में ही मिलेगा पैकेज, महिला की मौत पर क्यों उठे सवाल?

बुंदेलखंड इलाके के पन्ना में चल रहे चिता आंदोलन के बीच सागर कमिश्नर से लेकर कलेक्टर तक पहुंचे. जहां पर उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. उन्होंने भरोसा दिलाया कि अधिकारियों को गांव में बुलाकर उनके खाते में राशि भेज दी जाएगी. वहीं समाजसेवी अमित भटनागर ने कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं.

Written By Manish Kushawah
Published: Sep 18, 2026, 07:04 PM IST | Updated: Sep 18, 2026, 07:17 PM IST
Image Credit: ZEE Media
Join

बुंदेलखंड के पन्ना जिले में पिछले 6 दिनों से चल रहे चिता आंदोलन के बीच सातवें दिन सागर कमिश्नर दिलीप कुमार ने दौरा किया. ग्राम पटी में रह रहे विस्थापित परिवारों से जाकर कमिश्नर ने मुलाकात की. कमिश्नर के सामने कुछ लोगों ने अपने पैकेज की राशि अभी तक न मिलने की शिकायत की. जिसके बाद कमिश्नर ने विस्थापित परिवारों से वादा किया कि एक हफ्ते के अंदर सूची बनाकर बैंक के कर्मचारियों और अधिकारियों को यही गांव में बुलाकर उनके संयुक्त खातों में राशि का अंतरण कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को कहीं भी जाने या भटकने की आवश्यकता नहीं है.

साथ ही कमिश्नर ने कहा कि पशुपालन से इन सभी विस्थापित परिवारों को रोजगार देने का प्रयास किया जाएगा. पशुपालन विभाग के अधिकारी यहां आएंगे और कैंप लगाकर उनको शासकीय योजनाओं के अंतर्गत डेरी उद्योग से जोड़ा जाएगा.

बातचीत का रास्ता हमेशा खुला है
चिता आंदोलन के बारे में बात करते हुए कमिश्नर दिलीप कुमार का कहना है कि बातचीत का रास्ता हमेशा खुला है. 2 डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, जनपद पंचायत के सीईओ, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की टीम ने संयुक्त रूप से पहुंचकर चिता आंदोलन कर रहे लोगों से बातचीत की है. उनकी बातें सुनी गई और वहां सूची तैयार कराई जा रही है. यदि कोई भी पात्र परिवार सर्वे में छूट गया है, तो उसको सम्मिलित किया जाएगा. साथ ही प्रभावित गांव में ही पहुंचकर बैंक कर्मचारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्थापित हुए लोगों के संयुक्त खातों में पैकेज की राशि डाली जाएगी. जिससे कार्यालय या बैंक के चक्कर न लगाना पड़े. कमिश्नर के साथ कलेक्टर ऊषा परमार और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे.

कई परिवारों को नहीं मिली राशि
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी अमित भटनागर ने कहा कि लोगों के घर डूब रहे हैं, लेकिन कई पात्र परिवारों को अब तक मुआवजे की पूरी राशि नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि प्रशासन को सभी प्रभावित लोगों का दोबारा सर्वे कराकर उनका लंबित भुगतान करना चाहिए. अमित भटनागर का कहना है कि छह दिन बाद प्रशासन मौके पर पहुंचा है. अब अधिकारी यह देख रहे हैं कि किन लोगों का मुआवजा या दूसरी सुविधाएं बाकी हैं. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के बिजली और पानी के कनेक्शन भी काट दिए गए हैं, जिससे लोगों में नाराजगी है.

अमित भटनागर ने लगाए आरोप
वहीं अमित भटनागर ने महिला की मौत को लेकर भी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि महिला के परिवार को करीब 75 लाख रुपये का मुआवजा मिलना था, लेकिन पूरी राशि नहीं मिली. परिवार को पिछले करीब 8 साल में जो पैसा मिला था, वह भी खर्च हो चुका था. उन्होंने आगे कहा कि महिला का घर गिर गया था. एकमात्र बचा घर भी गिरने की स्थिति में था. उन्होंने आरोप लगाया कि इसी परेशानी के कारण महिला मानसिक तनाव में थी. उनका कहना है कि यदि समय पर पूरा मुआवजा देकर उसके बाद गांव को डुबोया जाता, तो महिला की जान बच सकती थी.

6वें दिन रमिया की हुई थी मौत
दरअसल, चिता आंदोलन के पांचवें दिन करीब 80 वर्षीय रमिया आदिवासी की मृत्यु हो गई. चिता आंदोलन स्थल से कुछ दूरी पर रमिया आदिवासी का अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान आंदोलन में शामिल सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर रमिया आदिवासी को श्रद्धांजलि अर्पित की. जैसे ही रमिया आदिवासी की मृत्यु की खबर सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया माध्यमों से सामने आई, जिला प्रशासन चौकन्ना हो गया. प्रशासन ने आनन-फानन में एक पत्र जारी कर खबर का खंडन किया. पत्र में दावा किया गया कि महिला की मृत्यु आंदोलन में शामिल होने के कारण नहीं हुई और उसके परिवार को मुआवजा भी दिया जा चुका है.

75 लाख रुपए मिलना बाकी है
आंदोलन के छठवें दिन रमिया आदिवासी के नाती दासी आदिवासी ने वीडियो जारी कर मुआवजा वितरण की स्थिति बताई. उसका कहना है कि पिछले आठ वर्षों में उनके 18 सदस्यीय परिवार को 48 लाख रुपये मिले हैं, जबकि अभी 75 लाख रुपये मिलना बाकी है. दासी आदिवासी ने बताया कि रमिया आदिवासी के बड़े बेटे की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई. बेटियों की शादी में भी पैसा खर्च हुआ, लेकिन शेष 75 लाख रुपये नहीं मिलने के कारण परिवार आज तक अपना मकान नहीं बना पाया है.
(रिपोर्टः पीयूष शुक्ला, पन्ना, Zee मीडिया)

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES