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भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित स्वयंसेवकों के एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने सामाजिक सद्भाव और एकता पर विशेष जोर दिया. संघ की शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ तौर पर कहा कि, जातिवाद और छुआछूत हिंदू समाज पर कलंक हैं और इनसे मुक्ति पाना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि चूंकि हम सभी भारत माता और ईश्वर की संतान हैं, इसलिए जन्म या जाति के आधार पर इंसानों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव हिंदू संस्कृति का हिस्सा कभी नहीं हो सकता.
दरअसल, 20 सितंबर को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में RSS के शताब्दी वर्ष पर बड़ा कार्यक्रम हुआ था. इसमें भोपाल संभाग के 5 जिलों से करीब 30 हजार स्वयंसेवक शामिल हुए. कार्यक्रम में RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता थे.
भोपाल में बोले RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले
होसबाले ने कहा कि जाति, पंथ, भाषा या क्षेत्र के आधार पर खुद को अलग समझना समाज और संगठन, दोनों की ताकत को कमजोर करता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बुराई को सिर्फ कानूनों, ईश्वरीय अवतारों या उपदेशों से खत्म नहीं किया जा सकता. इसके लिए हर व्यक्ति को अपने जीवन, घर और व्यवहार में बदलाव लाने की जरूरत है. उन्होंने आग्रह किया कि देशभक्ति और समाज सेवा सिर्फ संघ के स्वयंसेवकों तक ही सीमित न रहे, और देश व समाज के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए हर नागरिक से निस्वार्थ भाव से आगे आने का आह्वान किया.
#WATCH | Bhopal, Madhya Pradesh: RSS General Secretary Dattatreya Hosabale says, "... We are all children of Mother India. We are all children of God. Therefore, there should be no discrimination of any kind among humans. Discrimination based on birth is not part of Hindu… pic.twitter.com/KBAQbJktwO
— ANI (@ANI) September 20, 2026
'इंसानों के बीच भेदभाव नहीं होना चाहिए'
होसाबाले ने कहा कि, इंसानों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए. जन्म के आधार पर भेदभाव हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं है. समाज में जाति के आधार पर होने वाला बुरा बर्ताव सामाजिक ताने-बाने को कमजोर और खोखला करता है. इसलिए, जो लोग निस्वार्थ हैं और निस्वार्थ भाव से देश के बारे में सोचते हैं, उन्हें अपने व्यवहार, जीवन और घरों में इस सिद्धांत को अपनाना चाहिए. हम जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करेंगे. यह हिंदू समाज पर एक कलंक है और हमें इससे मुक्त होने की जरूरत है. यह कानूनों, ईश्वर के अवतार या केवल उपदेशों से हासिल नहीं होगा. यह हमारे अपने आचरण से ही संभव होगा.
'समाज में संगठन की भावना को बढ़ावा देना'
होसबाले ने कहा कि RSS की शाखा का मकसद लोगों के चरित्र निर्माण के साथ-साथ समाज में संगठन की भावना को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि समाज को एकजुट करके और लोगों में अच्छे चरित्र का विकास करके, राष्ट्रीय जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ना मुमकिन है. उन्होंने स्वयंसेवकों से निस्वार्थ भाव, ईमानदारी और पूरी लगन के साथ इस मिशन को आगे बढ़ाने का आग्रह किया.