SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

18 करोड़ का ओवरब्रिज 6 महीने में ही धंसा, सड़क से निकला सरिया और गहरी दरारें, इंफ्रास्ट्रक्चर पर उठे सवाल

Narsinghpur News: नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में ₹18 करोड़ की लागत से और सात साल की देरी के बाद बने रेलवे ओवरब्रिज में महज छह महीने के भीतर ही धंसाव शुरू हो गया है. स्थानीय लोग नाराज हैं और उन्होंने इस मामले की जांच की मांग की है.

Written By Ranjana Kahar
Published: Sep 09, 2026, 11:00 AM IST | Updated: Sep 09, 2026, 12:45 PM IST
Join

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में सरकारी पैसे के गलत इस्तेमाल और घटिया निर्माण का एक बड़ा मामला सामने आया है. लगभग ₹18 करोड़ की भारी लागत से बने रेलवे ओवरब्रिज की क्वालिटी पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि इस पुल को बनने में करीब सात साल लगे, लेकिन चालू होने के सिर्फ़ छह महीने के भीतर ही इसका एक बड़ा हिस्सा धंसने लगा है. ज़ी मीडिया की ग्राउंड-जीरो रिपोर्ट के मुताबिक, पुल की सड़क पर गहरी दरारें आ गई हैं और कई जगहों पर लोहे की सरिया साफ दिखाई दे रही हैं, जिससे लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है.

चौबीसों घंटे गुजरते हैं भारी वाहन
घटना के उजागर होने के बाद ठेकेदार द्वारा आनन-फानन में सीमेंट से लीपापोती और मरम्मत की कोशिश की जा रही है. चिंता की बात यह है कि NTPC और कोयला खदानों के भारी वाहन इस ओवरब्रिज से चौबीसों घंटे गुजरते हैं. ऐसे में कमजोर और धंसी हुई सड़क पर हमेशा किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहता है. स्थानीय लोग इस बात से नाराज हैं और उन्होंने निर्माण एजेंसी और इसमें शामिल इंजीनियरों के कामकाज की जांच की मांग की है. स्थिति की जानकारी मिलने पर, जिला कलेक्टर ने ओवरब्रिज की सही और प्रभावी मरम्मत के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं.

6 महीने में ही खुल गई 18 करोड़ के भ्रष्टाचार की पोल
कहते हैं इमारत की उम्र उसके मटेरियल से पता चलती है, लेकिन यहां तो 6 महीने में ही सच्चाई सामने आ गई. ₹18 करोड़ की लागत से बना यह ओवरब्रिज छह महीने भी नहीं चल पाया और धंस  गया. गड्ढे, दरारों से दिखती सरिया (rebar) और सीमेंट की सतही मरम्मत से साफ पता चलता है कि पैसा पुल पर लगने के बजाय किसी की जेब में चला गया.

आम लोगों की सुविधा के लिए बनाए गए इस ₹18 करोड़ के ओवरब्रिज ने इसके घटिया निर्माण की पोल खोल दी है. सबसे सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि इसकी मजबूती से मरम्मत करने की बजाय ठेकेदार सिर्फ सीमेंट से ऊपरी लीपापोती कर रहा है, ताकि किसी को पता न चले. ये तस्वीरें साफ दिखाती हैं कि करोड़ों रुपये अच्छी क्वालिटी के सीमेंट और स्टील में लगाने के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए. अब सवाल यह उठता है कि अगर सिर्फ़ छह महीने में इसकी यह हालत है, तो आने वाले सालों में इस पुल का इस्तेमाल करना कितना सुरक्षित होगा?

सवाल किस पर?

इस घटना के बाद 3 बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं -

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
स्थानीय लोगों ने निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों के काम करने के तरीकों पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है. यह मामला कलेक्टर के संज्ञान में भी लाया गया है और ओवरब्रिज की उचित मरम्मत और जरूरी सुधार के निर्देश दिए गए हैं. अब सवाल यह उठता है कि करोड़ों रुपये की लागत से बना ओवरब्रिज महज छह महीनों में ही इस हालत में कैसे पहुंच गया, और इसके निर्माण की गुणवत्ता के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES