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169वां बलिदान दिवस: पिता-पुत्र की कविताओं से हिल गई थी अंग्रेजी हुकूमत, जानिए कौन थे राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ? जिन्हें तोप से बांधकर दी गई थी मौत की सजा

जबलपुर में राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह का 169वां बलिदान दिवस शुक्रवार को मनाया जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जबलपुर पहुंचे. इस दौरान सीएम दोनों शहीदों की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

Written By Pooja
Published: Sep 18, 2026, 12:07 PM IST | Updated: Sep 18, 2026, 01:30 PM IST
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जबलपुर में गोंडवाना साम्राज्य के शहीद राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह का 169वां बलिदान दिवस शुक्रवार को मनाया जा रहा है. 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह करने वाले पिता-पुत्र की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 18 सितंबर (शुक्रवार) को जबलपुर दौरे पर रहे, जहां वे जनजातीय समाज द्वारा आयोजित गोंड शासक अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए. कार्यक्रम के लिए सीएम सुबह इंदौर से जबलपुर के लिए रवाना हुए और वहां पहुंचकर सबसे पहले अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी . इसके बाद वे राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह संग्रहालय का भ्रमण करेंगे और सुभाष चंद्र बोस कल्चरल एंड इंफॉर्मेशन सेंटर में आयोजित मुख्य बलिदान दिवस समारोह में शामिल होंगे. अपने इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत आयोजित रक्तदान शिविर में भी सम्मिलित होंगे.

कौन थे राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह?
1857 में जबलपुर में तैनात ब्रिटिश 52वीं रेजिमेंट के कमांडर क्लार्क बहुत बेरहम इंसान था. वह स्थानीय छोटे राजाओं और जमींदारों को परेशान करते था और उनसे मनमाना टैक्स वसूलते था. इसके जवाब में तत्कालीन गोंडवाना राज्य (जिसमें आज के जबलपुर और मंडला इलाके शामिल हैं) के राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुंवर रघुनाथ शाह ने ब्रिटिश कमांडर क्लार्क के सामने झुकने से इनकार कर दिया. दोनों ने अंग्रेजों के खिलाफ आस-पास के राजाओं को एकजुट करना शुरू कर दिया. कहा जाता है कि पिता और पुत्र दोनों ही कुशल कवि थे और उन्होंने अपनी कविताओं के जरिए राज्य के लोगों को क्रांति के लिए प्रेरित किया.

18 सितंबर को मनाया जाता है बलिदान दिवस
कमांडर क्लार्क को अपने जासूसों से इस बात का पता चला, जिसके बाद उन्होंने राज्य पर हमला कर दिया. माना जाता है कि ब्रिटिश कमांडर ने धोखे से पिता और पुत्र को पकड़ लिया था. उन्हें 14 सितंबर को बंदी बना लिया गया और 18 सितंबर को दोनों को तोप के आगे बांधकर उड़ा दिया गया. तब से 18 सितंबर को हर साल बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है. हर साल की तहर इस साल भी जबलपुर में तीन दिन का कार्यक्रम 16 सितंबर को शुरू हुआ. पहले दिन गोंडवाना और गोंडी परंपराओं के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की गई और विशेष प्रार्थनाएं की गईं. दूसरे दिन, नर्मदा घाट तक एक शौर्य यात्रा निकाली गई. नर्मदा के पवित्र जल और 52 गढ़ों (किलों) से लाई गई मिट्टी का उपयोग करके पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देवी-देवताओं की प्राण-प्रतिष्ठा की गई.

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About the Author

पूजा सिंह एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 5 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय (हाइपरलोकल) मुद्दों की सटीक व रियल-टाइम डिजिटल कवरेज पर उनकी मजबूत पकड़ है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद पूजा ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने Inshorts और नवभारत जैसे प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम करते हुए डिजिटल जर्नलिज्म, कंटेंट क्यूरेशन और न्यूज़ डेस्क ऑपरेशंस का अनुभव हासिल किया. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देती हैं, ताकि पाठकों तक हर जरूरी अपडेट तेजी से पहुंचे.पूजा सिंह से आप Pooja1.Singh@India.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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