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गांव-गांव जहर...सिस्टम बेखबर? MP में कैसे फल-फूल रहा अवैध दारू का नेटवर्क, जहरीली शराब से राज्य में कब-कितनी मौतें, देखें आंकड़े

सागर में जहरीली शराब से 22 मौतों के बाद मध्यप्रदेश में अवैध शराब के नेटवर्क पर सवाल खड़े हो रहे हैं. कई गांवों में महिलाओं ने शराब माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. वहीं पुलिस ने निगरानी बढ़ाने की बात कही. आइए आपको मध्य प्रदेश के उन आंकड़ों के बारे में बता रहे हैं, जहां पिछले वर्षों में शराब पीने से मौत हुई है.

Written By Manish Kushawah
Published: Sep 08, 2026, 11:23 PM IST | Updated: Sep 08, 2026, 11:43 PM IST
Image Credit: MP Illegal Liquor Network
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सागर में जहरीली शराब से 22  मौतों ने मध्यप्रदेश में अवैध शराब के पूरे नेटवर्क से लेकर उस पर निगरानी रखने वाले सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह सिर्फ एक जिले की घटना नहीं है, बल्कि पिछले कई सालों से से प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में सामने आ रहे ऐसे मामलों की एक और कड़ी है. पिछले पांच सालों में राज्य में जहरीली शराब से मौत की यह सातवीं बड़ी घटना बताई जा रही है. इससे पहले उज्जैन, मुरैना, खरगोन, मंदसौर, इंदौर, भिंड और छतरपुर में भी जहरीली शराब लोगों की जान ले चुकी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गांवों और छोटे कस्बों तक अवैध शराब का कारोबार पहुंच रहा है, तो इसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार विभागों को क्यों नहीं मिल पा रही है. या फिर जानकारी होने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की जा रही है.

इस मामले पर ग्रामीणों और महिलाओं की नाराजगी भी खुलकर सामने आई है. कई इलाकों में लोगों का कहना है कि अवैध शराब की बिक्री कोई छिपी हुई गतिविधि नहीं है, बल्कि गांवों और बस्तियों तक इसकी पहुंच है. श्योपुर में आदिवासी महिलाओं ने शराब माफियाओं के खिलाफ खुद मोर्चा खोल रखा है. उन्होंने खुद ही अवैध शराब को नष्ट किया है. साथ ही पूरे इलाके में विरोध प्रदर्शन भी किया है. महिलाओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि जो शराब गांव के लोगों को आसानी से दिखाई दे रही है, वह जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नहीं दिखाई देती है. महिलाओं का कहना है कि शराब के कारण कई परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है. घरों में विवाद बढ़ रहे हैं. ऐसे में उनका सवाल है कि अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है.

कई जगहों पर निगरानी
सागर की घटना के बाद पुलिस ने भी संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने की बात कही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों की सीमाओं से शराब की अवैध तस्करी की आशंका को देखते हुए विशेष टीमों की तैनाती की है. कई स्थानों पर दबिश देकर आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है. इसके अलावा, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. पुलिस का कहना है कि अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी. हालांकि सवाल यह भी है कि यदि पुलिस और प्रशासन अब विशेष अभियान चला रहे हैं तो पहले यह नेटवर्क इतने लंबे समय तक कैसे सक्रिय रहा.

कैसे निकलेगा समाधान
वहीं पूर्व आबकारी अधिकारी दीनदयाल शुक्ला ने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर मजबूत सूचना तंत्र और विभागों के बीच बेहतर समन्वय को बेहद जरूरी बताया है. उन्होंने कहा कि अवैध शराब का कारोबार तभी बड़े स्तर पर फैलता है जब शुरुआती सूचना समय पर संबंधित एजेंसियों तक नहीं पहुंचती या उस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती है. आबकारी विभाग, पुलिस, जिला प्रशासन और स्थानीय अमले के बीच लगातार सूचना साझा करने और संयुक्त कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करनी होगी. उनका मानना है कि केवल किसी बड़ी घटना के बाद अभियान चलाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. गांव और कस्बे के स्तर पर लगातार निगरानी रखनी होगी, क्योंकि अवैध शराब का नेटवर्क अक्सर स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे ठिकानों से शुरू होकर बड़े कारोबार का रूप ले लेता है.

कब-कहां कितनी मौतें?
बता दें कि प्रदेश में पिछले वर्षों में कई ऐसी बड़ी-बड़ी घटनाएं हुई हैं. जिसमें 2020 में उज्जैन में जहरीली शराब से 12 लोगों की मौत हुई थी. 2021 में खरगोन में 2, मुरैना में 24 से ज्यादा, मंदसौर में 7 और इंदौर में 5 लोगों की जान गई. 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, भिंड और छतरपुर में चार-चार लोगों की मौत हुई. इसके बाद 2023 से फरवरी 2026 के बीच जहरीली शराब को लेकर 19 गंभीर शिकायतें दर्ज की गई. हालांकि, इस अवधि में मौत की कोई घटना सामने नहीं आई. अब सागर में 22 लोगों की मौत के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर गांव-गांव तक पहुंच रहे इस जहर को रोकने की जिम्मेदारी किसकी है. क्या हर बार मौतों के बाद कार्रवाई होगी या फिर अवैध शराब के नेटवर्क को समय रहते खत्म करने के लिए कोई स्थायी और जवाबदेह व्यवस्था बनाई जाएगी.

 

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मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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