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सागर में मौतों के बाद अवैध ढाबे, होटल, टपरे जमींदोज: क्या बुलडोजर एक्शन तात्कालिक दिखावा या स्थायी समाधान? ये टॉप 10 जिले, जहां सबसे ज्यादा अवैध शराब का कारोबार

मध्य प्रदेश के 51 जिलों में 1766 अवैध शराब के ठिकाने एक्टिव हैं. सागर में जहरीली शराब से 25 से ज्यादा मौतों के बाद 70 से अधिक अवैध ढाबों पर बुलडोजर तो चला, लेकिन क्या इससे जहरीली शराब का काला कारोबार रुकेगा? सवाल ये उठता है कि जब सरकार को अड्डे पता थे, तो कार्रवाई के लिए मौतों का इंतजार क्यों किया जाता है?

Written By Sumit Rai
Published: Sep 12, 2026, 12:51 PM IST | Updated: Sep 12, 2026, 12:55 PM IST
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मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से 25 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है. इस त्रासदी के बाद प्रशासन हरकत में आया, आनन-फानन में बुलडोजर चले और 70 से ज्यादा अवैध ढाबे-होटल जमींदोज कर दिए गए. मामले के मुख्य आरोपी और गढ़ी मलहरा शराब दुकान के ठेकेदार रवि लखेरा को पुलिस ने बरायठा के जंगल से शॉर्ट एनकाउंटर के दौरान गिरफ्तार किया है. इस पूरी कार्रवाई के बीच आबकारी विभाग का एक ऐसा रिकॉर्ड सामने आया है, जिसने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है.

मध्य प्रदेश सरकार के आबकारी विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है कि राज्य के 51 जिलों में 1766 ऐसी जगहें हैं, जहां अवैध शराब बनाई और बेची जा रही है. आबकारी विभाग की सूची में सागर जिले में पहले से ही अवैध शराब के 84 ठिकाने दर्ज थे, जहां 25 से ज्यादा मौत हो चुकी है. इतना ही नहीं राजधानी भोपाल में 30 और धार्मिक नगरी उज्जैन में 28 ऐसे ठिकाने चिन्हित हैं, जहां सख्त नियमों के बावजूद अवैध शराब का धंधा जारी है. ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब इंटेलिजेंस और लोकेशन की जानकारी विभाग के पास पहले से थी, तो कार्रवाई के लिए मौतों का इंतजार क्यों किया गया?

टॉप 10 जिले, जहां सबसे ज्यादा अवैध शराब का कारोबार

जब इंटेलिजेंस मौजूद, तो फिर विफलता क्यों?

आबकारी आयुक्त का तर्क है कि जिन क्षेत्रों में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री की पुरानी 'हिस्ट्री' रही है और अब यहां निगरानी बढ़ाई जाएगी, लेकिन यह जवाब कई गंभीर सवाल खड़े करता है. अगर विभाग के पास हॉटस्पॉट्स की सूची पहले से थी, तो पहले छापेमारी और धरपकड़ क्यों नहीं की गई? सागर में लोगों ने पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं, तो क्या अवैध शराब का ये कारोबार स्थानीय अमले की मौन सहमति के चल रहा था.

क्या बुलडोजर एक्शन तात्कालिक दिखावा या स्थायी समाधान?

घटना के बाद प्रशासन ने मालथौन, बांदरी, बंडा और शाहगढ़ में मुख्य आरोपियों के अवैध निर्माणों को जमींदोज कर दिया.  हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बुलडोजर से केवल भौतिक ढांचे ढहते हैं, अवैध शराब का नेटवर्क नहीं खत्म होता है. जब तक जहरीली शराब (मेथनॉल मिलावट) की सप्लाई चेन को जड़ से नहीं काटा जाता और आबकारी अधिनियम के तहत माफियाओं को सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक ऐसे हादसे नहीं रुकेंगे.

आगे का रास्ता: क्या कदम उठाए जाने चाहिए?

अवैध शराब के नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म करने के लिए राज्य के 51 जिलोंमें चिन्हित 1766 ठिकानों की डिजिटल मैपिंग हो और किसी भी अवैध गतिविधि पर संबंधित क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक और बीट प्रभारी पर सीधी कार्रवाई हो. जहरीली शराब में इस्तेमाल होने वाले मेथनॉल की अवैध बिक्री रोकने के लिए डिस्टिलरीज और केमिकल सप्लायर्स का कड़ा ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम लागू किया जाए. शराब कांड से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाई जाएं, ताकि आरोपियों को जल्द सजा मिल सके.

जीतू पटवारी ने भी इस मामले पर उठाए सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी इस मामले पर सवाल उठाया है और कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सीएम डॉ. मोहन यादव को टैग करते हुए पोस्ट में लिखा, 'आबकारी विभाग के रिकॉर्ड बता रहे हैं कि मध्य प्रदेश में अवैध शराब के 1766 ठिकाने सक्रिय हैं. इस सूची में सरकार की नाक के नीचे, यानी राजधानी भोपाल में 30 अवैध ठिकाने हैं. जब सरकार के पास पहले से इन तमाम अवैध ठिकानों और अपराधियों की पूरी सूची मौजूद थी, तो सागर जैसी हृदयविदारक घटनाओं में मौतों का इंतजार क्यों किया गया? ​विडंबना देखिए, जहरीली शराब के 'सागर' में, जहां इतनी बड़ी त्रासदी हुई, वहां भी आबकारी रिकॉर्ड में अब भी 84 स्थानों पर धड़ल्ले से अवैध शराब बिकने की जानकारी दर्ज है. धर्म नगरियों में शामिल उज्जैन में भी 28 अवैध ठिकाने सक्रिय हैं. वही,  शहर जो मुख्यमंत्री बनाम गृहमंत्री का गृह नगर है और सरकार ने शराबबंदी कर अपनी पीठ थपथपाई, वाहवाही लूटी है. स्पष्ट है, शराब माफियाओं को सत्ता का संरक्षण है. 'सरकारी हत्याओं' के बाद बुलडोजर चलाना और निचले स्तर के महकमे को बलि का बकरा बनाना, इस नाकाबिल सरकार की फितरत है. मुख्यमंत्री जी, ​जनता देख रही है. समय पर जवाब जरूर देगी.'

सागर जहरीली शराब कांड पर CM मोहन यादव का बड़ा एक्शन

मध्य प्रदेश के सागर जिले में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौतों और जहरीली शराब के कहर पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. घटना की गंभीरता और प्रशासनिक ढिलाई को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. इस फैसले का मकसद पूरी निष्पक्षता से जांच कर उन चेहरों और कमियों को बेनकाब करना है, जिनकी वजह से यह त्रासदी हुई. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ लहजे में कहा कि आमजन की सुरक्षा और कानून का शासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इस घटना में किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही या सांठगांठ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. न्यायिक जांच की रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार पाए जाने वाले अफसरों, कर्मचारियों और अवैध शराब के सिंडिकेट से जुड़े माफियाओं पर ऐसी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई होगी, जो नजीर बनेगी.

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About the Author

न्यूज़ मीडिया में 13 सालों से अधिक के अनुभव के साथ सुमित राय एक डिजिटल पत्रकार हैं. वर्तमान में सुमित राय Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम के लीड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, प्रशासनिक फैसलों, क्राइम और हाइपरलोकल मुद्दों के सटीक और गहरे विश्लेषण पर उनकी मजबूत पकड़ है.भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद सुमित ने मीडिया जगत में अपनी पहचान बनाई. अपने करियर के दौरान उन्होंने राजस्थान पत्रिका, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, एनडीटीवी और लोकमत हिंदी जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है. ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ-साथ जटिल राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' और 'ओपिनियन' लिखना उनकी मुख्य पहचान है. वे न्यूज़ डेस्क मैनेजमेंट और क्वालिटी एश्योरेंस के उच्च मानकों को बनाए रखते हैं, ताकि पाठकों तक प्रामाणिक, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित खबरें ही पहुंचे.सुमित राय से संपर्क करने के लिए आप उन्हें sumit2.kumar@zeemedia.com पर ईमेल कर सकते हैं. इसके अलावा, आप एक्स (ट्विटर), फेसबुक और लिंक्डइन पर उनके हैंडल @imSumitKRai के जरिए उनसे सीधे जुड़ सकते हैं.
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