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MP Medical Colleges: जमीन-भवन-मशीन सब सरकारी, फिर 4000 करोड़ के 9 मेडिकल कॉलेज को निजी हाथों में क्यों सौंप रही सरकार?

MP Medical Colleges: मध्य प्रदेश सरकार लगभग ₹4,000 करोड़ की लागत से बने नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों और 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों(CHCs) को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत प्राइवेट सेक्टर को सौंपने की तैयारी कर रही है.इसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.

Written By Ranjana Kahar
Published: Sep 17, 2026, 09:27 AM IST | Updated: Sep 17, 2026, 09:48 AM IST
Image Credit: AI जनरेटेड फोटो
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मध्य प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. राज्य सरकार करीब ₹4,000 करोड़ के निवेश से बने नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत प्राइवेट सेक्टर को सौंपने की योजना बना रही है. इनमें नीमच, सिंगरौली और श्योपुर के कॉलेज शामिल हैं, जो पिछले दो सालों से चल रहे हैं और हर कॉलेज में 100 सीटें हैं. इसके अलावा, 18 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स (CHCs) को भी PPP मॉडल के तहत सौंपने की तैयारी चल रही है.

9 मेडिकल कॉलेज को निजी हाथों में क्यों सौंप रही सरकार?
इस प्रस्ताव में नीमच, सिंगरौली, श्योपुर, मंडला, राजगढ़, बुधनी, छतरपुर और दमोह के कॉलेज शामिल हैं. इनमें से नीमच, श्योपुर, सिंगरौली, मंडला और राजगढ़ के कॉलेज केंद्र सरकार की प्रायोजित योजना के तहत बनाए गए हैं, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों का योगदान है. इस फैसले पर बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जमीन, भवन, अत्याधुनिक मशीनें और इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से सरकारी पैसे से तैयार हैं, तो इनका संचालन निजी कंपनियों को क्यों दिया जा रहा है?

जमीन-भवन-मशीनें सब सरकारी
दैनिक भास्कर रिपोर्ट के मुताबिक, PPP मॉडल में बदलने के बाद फैकल्टी के भविष्य को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. नीमच, श्योपुर, सिंगरौली, मंडला और राजगढ़ के कॉलेज एक केंद्र-प्रायोजित योजना के तहत बनाए गए थे, जिसमें हर कॉलेज की बिल्डिंग पर औसतन ₹325 करोड़ का खर्च आया था. इसमें केंद्र ने 60% और राज्य ने 40% खर्च उठाया था. इस लिस्ट में बुधनी (पूर्व मुख्यमंत्री का पुराना विधानसभा क्षेत्र), छतरपुर (सांसद VD शर्मा का संसदीय क्षेत्र) और दमोह (मंत्री प्रहलाद पटेल का विधानसभा क्षेत्र) के कॉलेज भी शामिल हैं. इन्हें राज्य सरकार के खर्च पर बनाया गया था.

4,000 करोड़ की लागत
मौजूदा कॉलेजों में लगभग ₹500 करोड़ का निवेश है. इस मूल्यांकन के आधार पर, लगभग ₹4,000 करोड़ की कीमत वाले सरकारी मेडिकल कॉलेजों को PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत सौंपने की तैयारी चल रही है. शुरुआती लिस्ट में देवास शामिल था, लेकिन बदले हुए प्रस्ताव में उसकी जगह दमोह को शामिल किया जा रहा है. इस काम के लिए सबसे पहले एक ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त किया जाएगा.

18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल
कॉलेज के अलावा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत 18 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स (CHCs) को सौंपने की तैयारी चल रही है. इनमें रीवा में 8, देवास में 4 और गुना में 6 CHC शामिल हैं.

75 दिन में तैयार करना होगा रोडमैप
एडवाइजर  को 75 दिन में पूरा रोडमैप तैयार करना होगा. इसके बाद तकनीकी और वित्तीय बोली के आधार पर निजी कंपनी को चुना जाएगा. 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) के लिए भी यही समय-सीमा तय है. इस पर उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि, पीपीपी मॉडल में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं. नीति आयोग ने जो टेंडर डॉक्यूमेंट बनाया है, वही मप्र में लागू किया जाएगा. यह वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) से जुड़ा मॉडल है. पीपीपी मॉडल को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है.
 

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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