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मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई है. कांग्रेस नेता और मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक के बयान पर एमपी कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है. मुकेश नायक के इस बयान पर कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केदार सिरोही ने आपत्ति जताई है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कई सवाल खड़े किए हैं.
दरअसल, कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि, "जब जहाज आ रहा था, भोपाल में उतरते वक्त पूर्व मुख्यमंत्री की आंखें लपलपा रही थी. उनको लग रहा था कि मेरे घर पर उतरने वाला है. लेकिन दुर्भाग्य से यह सरकार जाने वाली है. अब यह जहाज, जीतू पटवारी के काम आएगा."
मुकेश नायक के इस बयान पर केदार सिरोही ने फेसबुक पर पोस्ट किया है. उसमें उन्होंने लिखा है कि, "कुछ दिनों से मीडिया में मुकेश नायक का एक बयान चर्चा में है, जिसमें सरकार के नए हेलीकॉप्टर को लेकर यह कह रहे हैं, कि यह 2028 में जीतू पटवारी के काम आएगा. सीधे शब्दों में कहें, तो बिना किसी संगठनात्मक प्रक्रिया या आधिकारिक फैसले के 2028 के लिए जीतू पटवारी को मुख्यमंत्री पद का दावेदार प्रोजेक्ट कर दिया गया है."
उन्होंने आगे लिखा है कि, "आज जब हमारी पार्टी यानी कांग्रेस पूरे देश में संविधान को बचाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने की लड़ाई लड़ रही है, ऐसे समय में बिना किसी विधायक दल की बैठक या शीर्ष नेतृत्व के निर्देश के इस तरह की बयानबाजी करना पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है."
स्वयं आगे आकर खंडन करेंइसके अलावा, उन्होंने यह भी लिखा है कि "जीतू पटवारी वर्तमान में हमारे प्रदेश अध्यक्ष हैं. संगठन के लिए मेहनत कर रहे हैं. इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन एक जिम्मेदार नेतृत्व का तकाजा यह भी है कि इस तरह के असंवैधानिक और समय से पहले उछाले गए बयानों को स्वयं आगे आकर खंडन करें. अगर इस प्रकार के बयानों पर चुप्पी साधी जाती है, तो कार्यकर्ता इसे केवल एक प्रायोजित प्रचार लगेगा."
उन्होंने लिखा कि, "आज मध्य प्रदेश गंभीर आर्थिक जटिलताओं, कर्ज के बोझ और जन-समस्याओं से जूझ रहा है. राज्य को इस समय किसी छद्म प्रचार या जल्दबाजी में तय किए गए नाम की जरूरत नहीं है, बल्कि एक बेहद गंभीर, अनुभवी, विजनरी और सभी को साथ लेकर चलने वाले संतुलित नेतृत्व की आवश्यकता है. व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पार्टी के संविधान और रीति-नीति से ऊपर रखने का यह तरीका पूरी तरह से गलत है."
"अगर हमें मध्य प्रदेश में कांग्रेस की विचारधारा को मजबूत रखना है, तो इस तरह की अपरिपक्व राजनीति और गैर-जिम्मेदाराना बयानों का खुलकर विरोध करना ही होगा. आज पूरा प्रदेश का किसान मजदूर युवा व्यापारी और हर व्यक्ति बदलाव चाह रहा है, ऐसे समय मे मुद्दों पर लड़ना और संगठन को मजबूत करना है, कांग्रेस पार्टी किसी व्यक्ति विशेष के दावों से नहीं, बल्कि अपनी परंपरा और कार्यकर्ताओं के सामूहिक संघर्ष से चलती है."
इस पूरे मामले पर केदार सिरोही ने जीतू पटवारी से इस बयान पर खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर जीतू पटवारी इस बयान का खंडन नहीं करते हैं, तो कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जा सकता है कि 2028 में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर चल रही चर्चा एक प्रायोजित प्रचार है. संगठन को मजबूत करने से पहले सीएम का दावेदार बताए जाने वाले बयानों पर अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए. अब देखना यह होगा कि जीतू पटवारी इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं. इसके अलावा, यह भी अहम होगा कि पार्टी के तमाम सीनियर नेता क्या रुख अपनाएंगे?
(रिपोर्टः अनिल नागर, भोपाल)