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नशे के खिलाफ जंग, तस्करों पर शिकंजा: भोपाल से इंदौर तक एमडी ड्रग्स का ब्लूप्रिंट बेनकाब, कब रुकेगा काला कारोबार?

DRI ने भोपाल के ISBT से एक युवक को 7.32 करोड़ रुपये की कीमत वाली मेथामफेटामाइन ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया है. वहीं, इंदौर में क्राइम ब्रांच ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए दो लोगों को 25 लाख रुपये से अधिक कीमत की ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया है.

Written ByRanjana Kahar
Published: Oct 21, 2026, 10:52 PM IST|Updated: Oct 21, 2026, 11:01 PM IST
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नशे के खिलाफ जंग, तस्करों पर शिकंजा: भोपाल से इंदौर तक एमडी ड्रग्स का ब्लूप्रिंट बेनकाब, कब रुकेगा काला कारोबार?
Image Credit: भोपाल से इंदौर तक एमडी ड्रग्स का ब्लूप्रिंट बेनकाब- (Photo Ai)

About the Author

Ranjana Kahar

Ranjana Kahar

रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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मध्य प्रदेश के दो प्रमुख शहरों राजधानी भोपाल और इंदौर में नशीले पदार्थों की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है. भोपाल के ISBT में चलाए गए एक अहम अभियान के दौरान डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने 9.139 किलो क्रिस्टलाइन मेथामफेटामाइन (ड्रग्स) जब्त किया, जिसकी कीमत 7.32 करोड़ रुपये है. यह खेप दिल्ली से बेंगलुरु जाने वाली बस के एक यात्री द्वारा दो ट्रॉली बैगों में सलवार सूट की पैकिंग के अंदर बेहद शातिराना तरीके से छिपाई गई थी.  हैरानी की बात यह है कि महज छह दिनों के भीतर ISBT में नशीले पदार्थों की यह दूसरी बड़ी बरामदगी है.

इंदौर में 25 लाख 40 हजार का ड्रग्स बरामद

इस बीच, इंदौर में क्राइम ब्रांच ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत समीर खान और जाकिर हुसैन नाम के दो लोगों को पकड़ा है, जो दिवाली से पहले MD ड्रग्स की सप्लाई कर रहे थे. मंदसौर से लाई जा रही इस खेप की कीमत करीब 25 लाख 40 हजार रुपये आंकी गई है. लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर यह काला कारोबार कब खत्म होगा?

भोपाल में  7.32 करोड़ का ड्रग्स जब्त

DRI ने भोपाल के इंटर-स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) पर एक बड़ा ऑपरेशन चलाया और 7.32 करोड़ रुपये कीमत की मेथाम्फेटामाइन ड्रग्स जब्त की. DRI को सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध व्यक्ति दिल्ली से बेंगलुरु जाने वाली बस में सवार होकर दिल्ली-नागपुर नेशनल हाईवे (NH-46) के रास्ते भोपाल आ रहा है. इस जानकारी के आधार पर, DRI की टीम ने ISBT पर जाल बिछाया और दिल्ली से पहुंचने पर उस व्यक्ति को पकड़ लिया. उसके दो ट्रॉली बैग की तलाशी लेने पर 9.139 किलो क्रिस्टल मेथामफेटामाइन मिली. पकड़े गए व्यक्ति ने ड्रग्स के 11 पैकेट नए 'सलवार-सूट' की पैकिंग के अंदर छिपा रखे थे, ताकि कानून लागू करने वाली एजेंसियों की नजर से बच सके. DRI ने नशीले पदार्थ को जब्त कर लिया है और आरोपी को हिरासत में ले लिया है. अब उससे पूछताछ की जा रही है ताकि ड्रग सिंडिकेट के मुख्य सरगना और इस खेप की मंजिल का पता लगाया जा सके. गौरतलब है कि ISBT पर 6 दिन के अंदर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

कब रुकेगा काला कारोबार?

मध्य प्रदेश में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की बढ़ती संख्या और तस्करों के नेटवर्क को लेकर कानूनी विशेषज्ञों और वकीलों ने गहरी चिंता जताई है. इस पूरे मामले में वकील पुष्पेंद्र देव पांडेय ने कई कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर प्रकाश डाला है, साथ ही जांच प्रक्रिया और अपराधियों की मानसिकता के बारे में भी जानकारी दी है.

यह भी पढ़ें:  64 करोड़ की संपत्ति मामला: हेड कांस्टेबल फिरोज खान की जांच का दायरा बढ़ा, लोकायुक्त मुख्यालय भोपाल से हो रही मॉनिटरिंग
 

क्यों नहीं आता मास्टरमाइंड का नाम?

एडवोकेट पुष्पेंद्र देव पांडेय के अनुसार, जब भी इस तरह के बड़े ड्रग रैकेट का पर्दाफाश होता है, तो पुलिस या जांच एजेंसियां ​​आमतौर पर केवल निचले स्तर के कूरियर या नशीले पदार्थों के पैडलर को ही पकड़ पाती हैं. असली मास्टरमाइंड यानी वे लोग जो इन गिरोहों को चलाते हैं, पर्दे के पीछे सुरक्षित बने रहते हैं. उनका कहना है कि जांच अधिकारी अक्सर केवल सतही या बहुत साधारण जांच ही करते हैं. वे अपनी जांच को पकड़े गए लोगों के बयानों तक ही सीमित रखते हैं और इसके पीछे की आपराधिक सोच को पूरी तरह से नहीं समझते. इस वजह से मुख्य सरगना कानून की पकड़ से आसानी से बच निकलते हैं.

काम करने के तरीके में बदलाव 

एडवोकेट ने बताया कि NDPS एक्ट जैसे कड़े कानूनों से जुड़े मामलों में ठोस सबूत और चेन ऑफ कस्टडी का का होना बहुत जरूरी है. अगर जांच अधिकारी तकनीकी और वित्तीय पहलुओं जैसे मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक लेनदेन की गहराई से जांच नहीं करते हैं, तो अदालत में मुख्य आरोपी को दोषी ठहराना मुश्किल हो जाता है. अधिवक्ता पांडे का मानना ​​है कि अगर इस अवैध कारोबार पर प्रभावी ढंग से रोक लगानी है, तो जांच एजेंसियों को अपने काम करने के तरीके में बदलाव करना होगा. केवल कूरियर या सामान ले जाने वालों को पकड़ने के बजाय असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना जरूरी है,  इसमें सप्लायर से लेकर फंडिंग देने वाले लोग तक शामिल हैं.
 

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