SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

गणेश चतुर्थी नहीं, पितृ पक्ष में आते हैं ‘मस्करिया गणेश’... इटारसी की 91 साल पुरानी परंपरा, जानिए मान्यता

नर्मदापुरम के इटारसी में एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है. गणेश भगवान की स्थापना गणेश चतुर्थी में नहीं की जाती है, बल्कि पितृ पक्ष की चतुर्थी में की जाती है. आइए इसके पीछे की मान्यता और इतिहास के बारे में बताते हैं.

Written By Manish Kushawah
Published: Oct 02, 2026, 08:17 PM IST | Updated: Oct 02, 2026, 08:21 PM IST
Image Credit: Zee Media
Join

आमतौर पर आपने देखा होगा कि भगवान गणेश की स्थापना गणेश चतुर्थी पर की जाती है. लेकिन मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले के इटारसी में गणेश उत्सव की परंपरा कुछ अलग है. यहां पर गणपति बप्पा गणेश चतुर्थी पर नहीं, बल्कि पितृ पक्ष की चतुर्थी पर विराजते हैं. यही वजह है कि इन गणेश जी को ‘मस्करिया गणेश’ के नाम से जाना जाता है.

इटारसी रेलवे स्टेशन के सामने स्थित हनुमान मंदिर परिसर में पिछले 91 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है. पितृ पक्ष में गणेश स्थापना की यह अनूठी परंपरा इटारसी को धार्मिक रूप से खास पहचान देती है.

पितृ पक्ष की चतुर्थी को स्थापना
इटारसी में पितृ पक्ष के दौरान जब लोग अपने पूर्वजों के तर्पण और श्राद्ध कर्म में जुटते हैं. उसी दौरान यहां गणपति बप्पा की आराधना भी शुरू हो जाती है. हनुमान मंदिर परिसर में पितृ पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है.

पितरों को मोक्ष की प्राप्ति
मान्यता है कि मस्करिया गणेश के दर्शन और पूजन से संकट दूर होते हैं. पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. भगवान गणेश के साथ विराजमान रिद्धि-सिद्धि को सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इस परंपरा की शुरुआत इटारसी निवासी स्वर्गीय प्रीतम चंद्र गौर ने की थी. उनके बाद गौर परिवार ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया.

कब हुई थी इसकी स्थापना ?
मस्करिया गणेश की परंपरा के पीछे इतिहास और मान्यता दोनों जुड़ी हुई हैं. धार्मिक प्रवक्ता प्रमोद पगारे ने बताया कि साल 1930 में इटारसी में पहली बार गौर परिवार द्वारा मस्करिया गणेश की स्थापना की गई थी. बताया जाता है कि मस्करिया गणेश की परंपरा की शुरुआत महाराष्ट्र के नागपुर क्षेत्र से जुड़ी मानी जाती है.

जानिए इसकी दूसरी मान्यता
उन्होंने एक मान्यता के अनुसार बताया कि भोसले राजाओं की विजय के समय पितृ पक्ष चल रहा था. विजय के बाद भगवान गणेश को स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद पितृ पक्ष में भी गणेश आराधना की परंपरा आगे बढ़ी. दूसरी मान्यता यह है कि पितृ पक्ष को केवल शोक और स्मरण तक सीमित न रखते हुए भगवान के स्मरण और आराधना का भाव बना रहे, इसलिए इन दिनों गणेश स्थापना की परंपरा शुरू हुई.

कहां है इसका प्रमुख केंद्र
धार्मिक प्रवक्ता प्रमोद पगारे ने आगे बताया कि महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में प्रचलित इस परंपरा का मध्य प्रदेश के इटारसी को इसका प्रमुख केंद्र माना जाता है. उन्होंने आगे बताया कि इसकी शुरुआत 1930 में हुई थी. यह परंपरा 91 साल बाद भी उसी श्रद्धा और आस्था के साथ कायम है.

क्या है इसकी खासियत ?
इसकी सबसे खास बात यह है कि यहां विराजमान मस्करिया गणेश का विसर्जन भी गणेश चतुर्थी के कुछ दिनों बाद नहीं, बल्कि पितृ पक्ष की चतुर्दशी के मौके पर किया जाता है. इस तरह इटारसी में गणपति उत्सव और पितृ स्मरण की परंपरा एक साथ दिखाई देती है. (रिपोर्टः अभिषेक गौर, नर्मदापुरम)

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES