गणेश चतुर्थी नहीं, पितृ पक्ष में आते हैं ‘मस्करिया गणेश’... इटारसी की 91 साल पुरानी परंपरा, जानिए मान्यता
नर्मदापुरम के इटारसी में एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है. गणेश भगवान की स्थापना गणेश चतुर्थी में नहीं की जाती है, बल्कि पितृ पक्ष की चतुर्थी में की जाती है. आइए इसके पीछे की मान्यता और इतिहास के बारे में बताते हैं.
आमतौर पर आपने देखा होगा कि भगवान गणेश की स्थापना गणेश चतुर्थी पर की जाती है. लेकिन मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले के इटारसी में गणेश उत्सव की परंपरा कुछ अलग है. यहां पर गणपति बप्पा गणेश चतुर्थी पर नहीं, बल्कि पितृ पक्ष की चतुर्थी पर विराजते हैं. यही वजह है कि इन गणेश जी को ‘मस्करिया गणेश’ के नाम से जाना जाता है.
इटारसी रेलवे स्टेशन के सामने स्थित हनुमान मंदिर परिसर में पिछले 91 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है. पितृ पक्ष में गणेश स्थापना की यह अनूठी परंपरा इटारसी को धार्मिक रूप से खास पहचान देती है.
पितृ पक्ष की चतुर्थी को स्थापना
इटारसी में पितृ पक्ष के दौरान जब लोग अपने पूर्वजों के तर्पण और श्राद्ध कर्म में जुटते हैं. उसी दौरान यहां गणपति बप्पा की आराधना भी शुरू हो जाती है. हनुमान मंदिर परिसर में पितृ पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है.
पितरों को मोक्ष की प्राप्ति
मान्यता है कि मस्करिया गणेश के दर्शन और पूजन से संकट दूर होते हैं. पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. भगवान गणेश के साथ विराजमान रिद्धि-सिद्धि को सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इस परंपरा की शुरुआत इटारसी निवासी स्वर्गीय प्रीतम चंद्र गौर ने की थी. उनके बाद गौर परिवार ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया.
कब हुई थी इसकी स्थापना ?
मस्करिया गणेश की परंपरा के पीछे इतिहास और मान्यता दोनों जुड़ी हुई हैं. धार्मिक प्रवक्ता प्रमोद पगारे ने बताया कि साल 1930 में इटारसी में पहली बार गौर परिवार द्वारा मस्करिया गणेश की स्थापना की गई थी. बताया जाता है कि मस्करिया गणेश की परंपरा की शुरुआत महाराष्ट्र के नागपुर क्षेत्र से जुड़ी मानी जाती है.
जानिए इसकी दूसरी मान्यता
उन्होंने एक मान्यता के अनुसार बताया कि भोसले राजाओं की विजय के समय पितृ पक्ष चल रहा था. विजय के बाद भगवान गणेश को स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद पितृ पक्ष में भी गणेश आराधना की परंपरा आगे बढ़ी. दूसरी मान्यता यह है कि पितृ पक्ष को केवल शोक और स्मरण तक सीमित न रखते हुए भगवान के स्मरण और आराधना का भाव बना रहे, इसलिए इन दिनों गणेश स्थापना की परंपरा शुरू हुई.
कहां है इसका प्रमुख केंद्र
धार्मिक प्रवक्ता प्रमोद पगारे ने आगे बताया कि महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में प्रचलित इस परंपरा का मध्य प्रदेश के इटारसी को इसका प्रमुख केंद्र माना जाता है. उन्होंने आगे बताया कि इसकी शुरुआत 1930 में हुई थी. यह परंपरा 91 साल बाद भी उसी श्रद्धा और आस्था के साथ कायम है.
क्या है इसकी खासियत ?
इसकी सबसे खास बात यह है कि यहां विराजमान मस्करिया गणेश का विसर्जन भी गणेश चतुर्थी के कुछ दिनों बाद नहीं, बल्कि पितृ पक्ष की चतुर्दशी के मौके पर किया जाता है. इस तरह इटारसी में गणपति उत्सव और पितृ स्मरण की परंपरा एक साथ दिखाई देती है. (रिपोर्टः अभिषेक गौर, नर्मदापुरम)