घर में प्यार से बुलाते थे ‘कछुआ’... अब एशियन गेम्स में जीता गोल्ड, जानिए भारतीय हॉकी टीम की डिफेंडर इशिका चौधरी की कहानी
साल 2026 के एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपना शानदान प्रदर्शन करते हुए चीन को 1-0 से हराया है. इसी टीम में मध्य प्रदेश की तीन बेटियां भी शामिल हैं. इनमें ग्वालियर की रहने वाली इशिका चौधरी डिफेंडर के रूप में जानी जाती है. आइए आज इनके सफर के बारे में बताते हैं.
जापान में चल रहे एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है. भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को 1-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है. इस जीत के बाद से पूरे देश में जश्न का माहौल है. वहीं मध्य प्रदेश की तीन बेटियों ने अपना जलवा बरकरार रखते हुए प्रदेश का नाम रोशन किया है. इनमें एमपी की ईशिका चौधरी, बिच्छू देवी और सुशीला चानू शामिल हैं. वहीं इशिका चौधरी के गांव में खुशी का अलग अंदाज देखने को मिला है.
दरअसल, ग्वालियर की रहने वाली बेटी इशिका चौधरी इस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा बनी हैं. इशिका की उपलब्धि पर उनके परिवार में खुशी की लहर है. परिवार के लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी. इशिका की कामयाबी का जश्न आतिशबाजी के साथ मनाया गया. वहीं, इशिका के परिवार का कहना है कि अब उनका अगला मिशन ओलंपिक में भारत के लिए कप जीतना है.
महिला हॉकी टीम में डिफेंडर
15 अप्रैल 2000 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जन्मी इशिका चौधरी भारतीय महिला हॉकी टीम में डिफेंडर के रूप में जानी जाती हैं. इशिका के पिता राजीव चौधरी, जो कि एक संविदा शिक्षक हैं. उनकी मां गायत्री चौधरी गृहिणी हैं. इशिका का एक छोटा भाई है, जिसका नाम ईशान चौधरी है. इशिका के माता-पिता चाहते थे कि दोनों बच्चे घर के बाहर निकलकर आउटडोर गेम्स खेलें. इसके बाद इशिका ने खेलना शुरू किया. उन्होंने सब-जूनियर और जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलकर अपनी पहचान बनानी शुरू की.
11 साल की उम्र में की शुरुआत
साल 2011 में महज 11 साल की उम्र में उन्होंने हॉकी की स्टिक अपने हाथ में थामी थी. तब उन्होंने ग्वालियर की मध्य प्रदेश महिला हॉकी अकादमी में प्रवेश लिया, जहां उन्होंने कोच अविनाश भटनागर की देखरेख में हॉकी की बारीकियां सीखीं. शुरुआती दिनों में इशिका अपने भाई समेत अन्य बच्चों की तुलना में काफी एक्टिव रहती थी. उनकी रफ्तार और फुर्ती को देखते हुए उनके कोच ने उन्हें मिडफील्ड के साथ-साथ डिफेंस में भी तराशा.
साल-दर-साल इशिका का सफर
2011: 11 साल की उम्र में हॉकी की स्टिक थामीं. मध्य प्रदेश महिला हॉकी अकादमी में प्रवेश लिया.
2013: 13 साल की उम्र में मध्य प्रदेश हॉकी अकादमी की जूनियर टीम में जगह बनाई. तीसरी हॉकी इंडिया जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रजत पदक जीता.
2014: चौथी हॉकी इंडिया सब-जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता.
2016: भोपाल में आयोजित जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया.
2017: नेशनल कैंप और जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम में चयन हुआ. इसी साल ऑस्ट्रेलियाई हॉकी लीग (महिला) में अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू किया.
2018: बैंकॉक क्वालीफायर में 3 गोल किए और अर्जेंटीना के यूथ ओलंपिक में भारतीय टीम के साथ सिल्वर मेडल जीता.
2019: आयरलैंड के U21 फोर-नेशन्स टूर्नामेंट और ऑस्ट्रेलिया के तीन देशों के टूर्नामेंट में भारतीय टीम के साथ खिताब जीता.
2022: सीनियर भारतीय महिला हॉकी टीम में चयन हुआ, FIH हॉकी प्रो लीग में डेब्यू किया और ब्रॉन्ज मेडल जीता. इसी साल हांग्जो एशियाई खेलों में कांस्य पदक और नेशनल गेम्स में कांस्य पदक जीता.
2023: एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम के साथ गोल्ड मेडल जीता और इंटर-डिपार्टमेंटल महिला हॉकी टूर्नामेंट की विजेता टीम का हिस्सा बनीं.
2024: एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम के साथ गोल्ड मेडल जीता.
2026: पहली बार सीनियर महिला हॉकी विश्व कप की मुख्य टीम में जगह बनाई. 2026 एशियन गेम्स के लिए भी भारतीय महिला हॉकी टीम में चुनी गईं.
चीन को भारत ने 1-0 से हराया
एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को 1-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया. इस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा इशिका चौधरी भी बनीं और उनकी इस उपलब्धि के बाद ग्वालियर स्थित उनके घर में जश्न का माहौल है.
घर में प्यार से ‘कछुआ’ बुलाते थे
इशिका की इस कामयाबी में परिवार के बीच की एक मजेदार कहानी भी जुड़ी है. इशिका की मौसी गिरिजा तिवारी बताती हैं कि घर में सभी इशिका को प्यार से 'कछुआ' कहते थे. लेकिन आज इसी कछुए ने रेस जीत ली और भारत का मान बढ़ा दिया.
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ZEE NEWS पर क्या बोली मां?
इशिका की मां गायत्री चौधरी ने ZEE NEWS की टीम से बात करते हुए कहा कि ग्वालियर-चंबल इलाके में कभी बेटियों को लेकर सोच यह थी कि जैसे ही बेटी बड़ी हो, उसकी शादी कर दी जाए. उन्होंने कहा कि अब समय बदल रहा है. हर परिवार बेटियों को पढ़ा रहा है. उन्हें खेल के मैदान में आगे बढ़ा रहा है. यही बदलाव बेटियों को अपने शहर, प्रदेश और देश का नाम रोशन करने का मौका दे रहा है.
हॉकी कोच ने दी शुभकामनाएं
वहीं, स्थानीय हॉकी कोच अविनाश भटनागर ने बताया कि ग्वालियर की इस बेटी ने एशियन गेम्स के गोल्ड के साथ अपने परिवार को जश्न का मौका दिया है. इशिका की इस उपलब्धि पर पूरा परिवार गौरवान्वित है. अब परिवार की जुबां पर एक ही बात है कि एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं, अब अगला मिशन ओलंपिक है. उन्होंने परिवार को बहुत शुभकामनाएं दी हैं.