उज्जैन गोपाल मंदिर रोड चौड़ीकरण: शाही मस्जिद हटाने के खिलाफ दोनों याचिका खारिज, आगे क्या होगा?
Ujjain News: सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रही करीब 100 साल पुरानी शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर दोनों याचिकाओं को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने खारिज कर दिया है. जस्टिस संदीप एन.भट्ट की अध्यक्षता वाली सिंगल-जज बेंच ने यह फैसला सुनाया.
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच गोपाल मंदिर रोड चौड़ीकरण का मामला एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है. बुधवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने सड़क चौड़ीकरण करने के प्रोजेक्ट के दायरे में आने वाली लगभग 100 साल पुरानी शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया. इस मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप एन. भट्ट की अध्यक्षता वाली सिंगल-जज बेंच ने की. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने याचिकाएं खारिज कर दीं. हालांकि, अभी तक कोई विस्तृत लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है, इसलिए याचिकाएं खारिज करने के ठोस कारण आदेश मिलने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे. इसके बाद उज्जैन नगर निगम के लिए मस्जिद को हटाने या दूसरी जगह शिफ्ट करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होता दिख रहा है.
मुस्लिम समाज ने किया विरोध
जब से नगर निगम ने मस्जिद को हटाने का नोटिस जारी किया है, तब से मुस्लिम समुदाय इस कदम का विरोध कर रहा है. याचिकाकर्ताओं ने मस्जिद के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का हवाला देते हुए इसे हटाने पर आपत्ति जताई थी. याचिकाकर्ताओं के वकील सैय्यद अशहर अली वारसी ने कहा कि अभी विस्तृत आदेश मिलना बाकी है. आदेश का अध्ययन करने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई के बारे में कोई फैसला लिया जाएगा. उन्होंने संकेत दिया कि डिवीजन बेंच या सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जा सकती है.
सिंहस्थ के लिए अहम है गोपाल मंदिर मार्ग
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में सड़कों के चौड़ीकरण और ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर बनाने का काम चल रहा है. गोपाल मंदिर का रास्ता शहर के मुख्य और सबसे व्यस्त रास्तों में से एक है. प्रशासन का मानना है कि सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए इस रास्ते को चौड़ा करना ज़रूरी है.
याचिकाएं किसने दायर कीं?
पहली याचिका अशफाक अहमद ने दायर की थी, जो शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान का प्रतिनिधित्व करते हैं और शाही मस्जिद इंतज़ामिया कमेटी वक्फ पंच मोचियान के वाइस चेयरमैन हैं. इस याचिका में मध्य प्रदेश सरकार, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) के संयुक्त निदेशक, उज्जैन नगर निगम, बिल्डिंग ऑफिसर और उज्जैन के कलेक्टर को पक्षकार (respondents) बनाया गया था. दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के अध्यक्ष अरशान हुसैन ने दायर की थी. इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार, उज्जैन नगर निगम और मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था.
100 साल से पुरानी ऐतिहासिक इमारत बताया गया
याचिकाकर्ताओं ने मस्जिद को 100 साल से भी पुरानी ऐतिहासिक इमारत बताया. पुराने दस्तावेजों का हवाला देते हुए, पंचायत ने बताया कि 17 मार्च 1925 को शहर काजी को टाउन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन की ओर से एक पत्र जारी किया गया था. दावा किया गया है कि इस पत्र में यह शर्त रखी गई थी कि जमीन का कुछ हिस्सा अधिग्रहित (acquire) किए जाने के बाद, मस्जिद के बाकी हिस्से को उसकी मौजूदा हालत में ही सुरक्षित रखा जाएगा.