ग्वालियर में मेडिकल कॉलेज डीन को थप्पड़ मारने का मामला: डॉक्टरों में नाराजगी, 4 सूत्रीय मांगों को लेकर मोर्चा
ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में मेडिकल कॉलेज के डीन को थप्पड़ मारे जाने की घटना के बाद जूनियर डॉक्टरों (JDA) ने OPD में काम बंद कर दिया. डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने मोर्चा खोल दिया.
मध्य प्रदेश के ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मेडिकल कॉलेज के डीन को थप्पड़ मारे जाने की घटना के बाद डॉक्टरों में भारी आक्रोश है. इसके विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया है. उन्होंने आज काम बंद कर दिया और अपनी चार मांगों की एक सूची पेश की. जब मेडिकल कॉलेज के डीन आरकेएस धाकड़ को पता चला कि आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, तो वे जूनियर डॉक्टरों से बात करने पहुंचे. इसके बाद जूनियर डॉक्टरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक (SP) से मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल हड़ताल वापस ले ली गई है. लेकिन डॉक्टरों ने अपनी मांगें पूरी करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है.
जूनियर डॉक्टरों में नाराजगी
दरअसल, पिछले सोमवार को मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान मनोज शर्मा नाम के एक मनमौजी वकील ने ट्रॉमा सेंटर में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आर.के.एस. धाकड़ को थप्पड़ मार दिया था. इसके विरोध में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने काम बंद कर दिया और अस्पताल में हुई इन घटनाओं को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने और कार्रवाई की मांग की. जब डीन आर.के.एस. धाकड़ को पता चला कि OPD में कामकाज रुक गया है, तो वे डॉक्टरों से बात करने पहुंचे.
जूनियर डॉक्टरों ने रखी चार मांगें
जूनियर डॉक्टरों ने पुलिस प्रशासन के सामने चार मांगें रखी हैं. पहली मांग यह है कि मेडिकल कॉलेज और जयारोग्य अस्पताल परिसर में डॉक्टरों खासकर इमरजेंसी या नाइट ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए. दूसरी मांग यह है कि मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक पर हुए हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. तीसरी मांग अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परिसर के भीतर एक स्थायी पुलिस चौकी स्थापित करने की है, जहां 24 घंटे पुलिस की मौजूदगी रहे. अंत में चौथी मांग यह है कि अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के भेष में घूम रहे संदिग्ध या असामाजिक तत्वों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए.
जल्द कार्रवाई का आश्वासन
SP के साथ हुई मुलाकात में जूनियर डॉक्टरों को आश्वासन दिया गया कि उनकी चारों मांगों पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी. इस बीच, मेडिकल कॉलेज के डीन आर.के.एस. धाकड़ के हस्तक्षेप के बाद डॉक्टरों ने फिलहाल अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है. हालांकि, जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) के प्रदेश सचिव धुंआराम गुर्जर ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी मांगों पर कार्रवाई के लिए 48 घंटे की समय-सीमा तय की गई है. यदि तय समय के भीतर ये मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो जूनियर डॉक्टर राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे.
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अब सवाल यह है कि अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन क्या ठोस कदम उठाएंगे. हड़ताल खत्म होने से मरीजों को तो राहत मिली है, लेकिन 48 घंटे की चेतावनी ने प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है.