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हरदा का अनोखा पीपल का पेड़: जड़ों से देवी-देवताओं की मूर्तियां निकलने का दावा, नवरात्रि पर उमड़ती है भीड़

MP News: हरदा जिले के सोडलपुर गांव में एक अनोखे पीपल के पेड़ को लेकर रहस्य बना हुआ है. कहा जाता है कि इसकी जड़ों से देवी-देवताओं की मूर्तियां निकलती हैं. नवरात्रि के दौरान यहां भारी भीड़ उमड़ती है.

Written By Ranjana Kahar
Published: Oct 13, 2026, 10:14 AM IST | Updated: Oct 13, 2026, 10:17 AM IST
Image Credit: हरदा का अनोखा पीपल का पेड़
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मध्य प्रदेश के हरदा जिले के सोडलपुर गांव में मौजूद एक पुराना पीपल का पेड़ इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इससे एक अनोखी मान्यता जुड़ी है. ग्रामीणों का कहना है कि 500 ​​से 600 साल पुराने इस पेड़ की जड़ों और तने से समय-समय पर देवी-देवताओं की प्राचीन पत्थर की मूर्तियां निकलती हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार अब तक यहां ऐसी लगभग 23 से 25 मूर्तियां मिल चुकी हैं. खास बात यह है कि नवरात्रि के त्योहार के दौरान श्रद्धालु इस जगह के प्रति गहरी आस्था रखते हैं.

मुगलकाल से जुड़ी है ग्रामीणों की मान्यता
ग्रामीणों के मुताबिक, मुगल काल में मूर्तियों को सुरक्षित रखने के लिए एक मूर्तिकार ने उन्हें जमीन में दबा दिया था. स्थानीय लोगों का कहना है कि समय के साथ पेड़ की जड़ों के आस-पास ये मूर्तियां बाहर निकलने लगीं. हालांकि, पेड़ की असल उम्र या मूर्तियों के इतिहास के बारे में अब तक कोई पक्की जानकारी सामने नहीं आई है.

पेड़ के पास मंदिर का निर्माण
ग्रामीणों ने इस प्राचीन पेड़ के पास एक मंदिर बनाया है. इसे स्थानीय लोग शीतला माता मंदिर और कुइली माता मंदिर के नाम से भी जानते हैं. यहां स्थापित मूर्तियों की पूजा-अर्चना विधिवत की जाती है. नवरात्रि के दौरान भक्त विशेष पूजा और दर्शन के लिए यहां आते हैं. मंदिर परिसर में एक कुआं भी है. गांव वालों के अनुसार, इस कुएं का पानी मीठा है और यह लोगों के आकर्षण का केंद्र भी बन गया है.

नवरात्रि पर उमड़ती है भारी भीड़
सोडलपुर का यह प्राचीन पीपल का पेड़ ग्रामीणों के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है. स्थानीय लोग इसे चमत्कारी मानते हैं और यहां पूजा-अर्चना करते हैं. हालांकि पेड़ से मूर्तियां निकलने के दावों की ऐतिहासिक और वैज्ञानिक पुष्टि अभी बाकी है, फिर भी नवरात्रि के दौरान लोग इस स्थान के प्रति विशेष श्रद्धा रखते हैं और भक्त यहां विशेष पूजा के लिए आते हैं.

अटूट आस्था का प्रतीक
हरदा के सोडलपुर गांव का यह प्राचीन पीपल का पेड़ केवल एक वानस्पतिक अजूबा नहीं, बल्कि यह सदियों पुराने इतिहास और लोगों की अटूट आस्था की एक रहस्यमयी खिड़की भी है. हालांकि चमत्कारों और मूर्तियों के प्रकट होने के दावों की वैज्ञानिक जांच अभी बाकी हो सकती है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में ऐसी जगहें लोगों को उनकी धार्मिक भावनाओं के जरिए जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनती हैं. नवरात्रि के पवित्र दिनों में इन जगहों पर जुटने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ हमारी संस्कृति में आस्था और परंपरा के बीच के अटूट बंधन की गवाह है.

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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