गुना फैंसी ड्रेस विवाद: पहली कक्षा की छात्रा के गेटअप पर ABVP ने क्यों उठाए सवाल?
गुना में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आपत्ति जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है. आइए, इस पूरे मामले के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं.
मध्य प्रदेश के गुना जिले में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. बताया जा रहा है कि शहर के क्राइस्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, जहां कक्षा एक की नन्ही छात्रा राजनीतिक और सामाजिक संदेशों से जुड़ी वेशभूषा में आई हुई थी. इसको लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद गुना इकाई ने आपत्ति जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की है. वहीं, मामले को गंभीरता से देखते हुए विद्यालय प्रबंधन ने अपना आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर असहमति जताई है.
दरअसल, मंगलवार को विद्यालय में प्रतियोगिता के दौरान कक्षा एक की छात्रा स्कूल ड्रेस में मुंह पर पट्टी बांधकर मंच पर उतरी थी. उसके बाद हाथ और पीठ पर टंगी तख्तियों पर स्कूल की पाठशाला और हाजिरी शीट का भी जिक्र था. साथ ही, बेरोजगारी, महंगाई, नफरत, भ्रष्टाचार समेत पेपर लीक जैसे मामलों को प्रजेंट किया गया था. बात यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि इसमें लोकतंत्र के लोप को भी उजागर किया गया था. छात्रा की पीठ पर लिखी लाइनों में लोकतंत्र को पाठशाला से बाहर करने जैसे तीखे तंज भी कसे गए थे. इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें सामने आने के बाद सामाजिक- राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई.
अभाविप ने क्यों जताई आपत्ति
इस पूरे घटना को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने नाराजगी जताई, जहां उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का कहना है कि शैक्षणिक-सांस्कृतिक मंच पर विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और व्यक्तित्व विकास के लिए होते हैं. ऐसे में निष्पक्ष मंचों पर मासूम बच्चों के माध्यम से राजनीतिक संदेश का प्रदर्शन शैक्षणिक गरिमा के खिलाफ है. अभाविप ने आयोजन प्रभारी और संबंधित शिक्षिकों की भूमिका की जांच करने, जिला शिक्षा अधिकारी और बाल अधिकार संरक्षण आयोग को रिपोर्ट भेजने की मांग की है. चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई संतोषजनक नहीं हुई तो सक्षम बाल अधिकार एवं शैक्षणिक प्राधिकरणों में शिकायत करने की बात कही है.
विद्यालय प्रबंधन ने क्या कहा?
दूसरी तरफ मामले को लेकर क्राइस्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य फादर बाबू थारायिल सीएमआई ने पल्ला झाड़ लिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय इस तरह की प्रस्तुति का न तो समर्थन करता है, न ही इससे सहमत है. प्रबंधन का कहना है कि यह प्रस्तुति प्रतियोगिता के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं थी. वहीं विद्यालय की तरफ से सफाई देते हुए कहा कि छात्रा को इस गेटअप या संदेश के लिए शिक्षकों ने न तो तैयार किया था न ही कोई निर्देश दिए थे. उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से अभिभावकों की तरफ से लिया गया था.
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किसी कांग्रेस नेता की पोती है
आगे बताया कि अभिभावकों ने ही बच्ची को घर से तैयार कर स्कूल भेजा था. हालांकि, प्रबंधन की तरफ से कार्यक्रम की प्रभारी शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कही गई है. विद्यालय की तरफ से कहा गया है कि समीक्षा के बाद ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोहराया न जाए, इसके लिए सख्त निगरानी रखी जाएगी. मिली जानकारी के मुताबिक, फैंसी ड्रेस में शामिल होने वाली बच्ची शहर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता की पोती बताई जा रही है. उसकी इस फैंसी ड्रेस का फोटो भी कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह समेत अन्य कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर शेयर कर बीजेपी सरकार को घेरा है.