MP में फ्री रजिस्ट्री प्रक्रिया ठप: पटवारी और तहसीलदार क्यों कर रहे विरोध? जानिए विवाद के 8 बड़े कारण
MP News: स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया सिर्फ दो दिनों में ही रुक गई है. पटवारियों और तहसीलदारों ने काम करने से मना कर दिया है. उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में कई गड़बड़ियां हैं, कई जगह नाम और आधार में फर्क है. अगर जल्दबाजी में रजिस्ट्री की और कोई गलती हुई तो उन पर सिविल और क्रिमिनल केस हो सकता है.
मध्य प्रदेश में 50 लाख ग्रामीणों को मकान का मालिकाना हक देने के लिए शुरू की गई स्वामित्व योजना की नि:शुल्क रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू होते ही ठप हो गई है. 17 सितंबर से शुरू हुई इस प्रक्रिया का पटवारियों और तहसीलदारों ने विरोध कर दिया है. विरोध के चलते दो दिन में एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी है. दरअसल, प्रदेश में एक महीने के भीतर करीब 50 लाख और अकेले भोपाल में 41,726 रजिस्ट्रियां करने का लक्ष्य रखा गया था. पहले दो दिन में ही 12 हजार से ज्यादा रजिस्ट्री का टारगेट था, लेकिन पटवारियों के बाद अब तहसीलदारों ने भी खुद को इस पूरी प्रक्रिया से अलग कर लिया है.
पटवारी और तहसीलदार क्यों कर रहे विरोध?
तहसीलदार एसोसिएशन का कहना है कि सरकार ने तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को उप पंजीयक की शक्तियां तो दे दी हैं, लेकिन इस प्रक्रिया को लागू करने से पहले उनसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया. उनकी मुख्य चिंताएं मौजूदा रिकॉर्ड, उनमें मौजूद गड़बड़ियों और भविष्य में हो सकने वाली कानूनी कार्रवाई से जुड़ी हैं. अधिकारियों के मुताबिक, स्वामित्व योजना के तहत प्रॉपर्टी का सर्वे पहले ही किया जा चुका था. इसके बाद कई प्रॉपर्टी खरीदी और बेची गईं, लेकिन रिकॉर्ड अपडेट नहीं किए गए. कुछ मामलों में आधार रिकॉर्ड और सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में नामों में अंतर है, जबकि कुछ मामलों में पिता या पति के नाम पूरी तरह से गायब हैं. अगर ऐसे रिकॉर्ड के आधार पर प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन किया जाता है और बाद में कोई विवाद होता है, तो संबंधित अधिकारी को कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है.
केस का डर
सरकार की नई व्यवस्था में पटवारी को कागज तैयार करने वाला और तहसीलदार-नायब तहसीलदार को रजिस्ट्री करने वाला बनाया गया है. दोनों संघों का कहना है कि जल्दबाजी में अगर रिकॉर्ड में कोई गलती हुई तो उन पर सिविल और क्रिमिनल केस हो सकता है. इसी वजह से तहसीलदार संघ ने सरकार से मांग की है कि पहले सारे कानूनी और तकनीकी पेंच दूर करने के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाए.
पटवारी-तहसीलदार विरोध क्यों कर रहे हैं? 8 बड़ी वजहें
1. रिकॉर्ड पहले से ही वैध है तो रजिस्ट्री क्यों?
स्वामित्व योजना में 2020 में बना रिकॉर्ड पहले से ही कानूनी रूप से वैध है. इसी से बैंक लोन जैसे काम हो सकते हैं, फिर रजिस्ट्री की जरूरत क्या है.
2. आधार और रिकॉर्ड में नाम अलग-अलग
अधिकारों का रिकॉर्ड तैयार करते समय 100% आधार ई-केवाईसी (Aadhaar e-KYC) पूरा नहीं किया गया था. इससे कई मामलों में आधार में दर्ज नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नामों से अलग हैं.
3. कोर्ट जाना पड़ सकता है
अधिकारियों का कहना है कि रजिस्ट्रेशन के बाद रिकॉर्ड में हुई गलतियों को रेवेन्यू प्रोसेस से ठीक नहीं किया जा सकता. इसके लिए सिविल कोर्ट जाना पड़ सकता है.
4. जमीन बिक गई, रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ
सर्वे के बाद कई प्लॉट बिक चुके हैं, लेकिन नए मालिकों के नाम रिकॉर्ड में अपडेट नहीं किए गए हैं. ऐसी जमीन का रजिस्ट्रेशन कराने से विवाद हो सकते हैं.
5. रिकॉर्ड में पिता या पति का नाम ही नहीं
कई गांवों के रिकॉर्ड में लाभार्थी के पिता या पति का नाम नहीं है. अधिकारी सबसे पहले यह मांग कर रहे हैं कि इसे सुधारा जाए.
6. गलती हुई तो केस हो जाएगा
नई व्यवस्था में पटवारी रजिस्ट्री का कर्ता और तहसीलदार रजिस्ट्रार होगा. गलती हुई तो सीधे उन्हीं पर केस होगा, इसलिए वे कानूनी सुरक्षा मांग रहे हैं
7. रजिस्ट्री करने का अधिकार ही सवालों में
एसोसिएशन का कहना है कि सब-रजिस्ट्रार की शक्तियां पहले से ही रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत तय हैं. बिना जरूरी कानूनी बदलावों के तहसीलदार को ये शक्तियां देने पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
8. आबादी की जमीन के लिए कलेक्टर की मंजूरी जरूरी
कुछ मामलों में जहां आबादी वाली जमीन को निजी मालिकाना हक में बदला जाता है, वहां M.P. लैंड रेवेन्यू कोड के तहत कलेक्टर की मंजूरी लेना जरूरी है.
अधिकारियों की मांग
अधिकारी मांग कर रहे हैं कि रजिस्ट्रेशन एक्ट और मध्य प्रदेश लैंड रेवेन्यू कोड में जरूरी बदलाव किए जाएं, रिकॉर्ड ठीक किए जाएं और उन्हें कानूनी सुरक्षा दी जाए. मामले में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने कहा है कि, वे समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं. उम्मीद है कि एक-दो दिन में समाधान हो जाएगा.