Explainer: भोपाल में सीलिंग के डर से क्यों बिगड़ा 70% कारोबार? बाहरी खरीदारों में कन्फ्यूज़न, सप्लायर्स की नई शर्तें और मास्टर प्लान का पेंच
Explainer: भोपाल में सीलिंग की कार्रवाई के कारण शहर का लगभग 70% कारोबार प्रभावित हुआ है. 100 से ज्यादा कारोबारी संगठनों का कहना है कि, बाजार में डर का माहौल है. सप्लायर्स ने उधार देना बंद कर दिया है और 100% एडवांस की मांग करने लगे हैं. ऐसे में आइए समझते हैं, बाहरी खरीदारों के बीच कन्फ्यूजन, सप्लायर्स की नई शर्तें और मास्टर प्लान.
राजधानी भोपाल में नगर निगम और प्रशासन की सीलिंग कार्रवाई का असर सिर्फ अवैध निर्माणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे शहर के बिजनेस साइकिल को हिला कर रख दिया है. एक दर्जन से ज्यादा व्यापारिक संगठनों और एक्सपर्ट से बातचीत में एक आम बात सामने आई है कि, कार्रवाई से ज्यादा उसके डर ने कारोबार को चौपट किया है. 100 बड़े व्यापारिक संगठनों के एक समूह का दावा है कि इस समय भोपाल का 70% व्यापार प्रभावित हुआ है. यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है. इसके पीछे खरीदारों का भरोसा कम होना, सप्लाई चेन में रुकावट और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसे कारण हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि सीलिंग के डर से पूरा बाजार बैठ गया है? क्यों सप्लायर उधारी देने से मना कर रहे हैं और क्यों खरीदार भोपाल से दूरी बना रहे हैं?
सीलिंग के डर से भोपाल के बाजार में क्या-क्या बदला?
सीलिंग की कार्रवाई ने भोपाल में रोजमर्रा के कामकाज और व्यापार के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है. इसका असर सिर्फ उन दुकानों या जगहों तक सीमित नहीं है, जिन्हें नोटिस मिले या जिन्हें सील किया गया; बल्कि यह पूरे कमर्शियल इकोसिस्टम को प्रभावित कर रहा है:
सबसे पहला बदलाव खरीदार के भरोसे पर
इसका सबसे बड़ा असर खरीदारों के भरोसे पर पड़ा है. जी हां... शहर के बाहर से आने वाले थोक खरीदार पहले की तरह अब भोपाल के बाजारों या दुकानों पर सीधे नहीं आ रहे हैं. व्यापारियों के अनुसार, लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले खरीदार अब पहले फोन करके पूछते हैं कि बाजार खुला है या नहीं और यह पक्का करते हैं कि जिस दुकान पर वे जाना चाहते हैं, उसके सील होने का कोई खतरा तो नहीं है. बता दें कि थोक बाजार सिर्फ स्थानीय ग्राहकों पर निर्भर नहीं होते. आस-पास के शहरों और जिलों से आने वाले खरीदार बिक्री का एक बड़ा हिस्सा होते हैं. अगर ये खरीदार आने से हिचकिचाते हैं, तो इसका असर सिर्फ एक दुकान तक सीमित न रहकर पूरे कमर्शियल इलाके पर पड़ता है. यहीं वजह है कि उन बाजारों में भी लोगों की आवाजाही कम हो रही है जहां सीलिंग की कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
100% एडवांस पेमेंट की मांग
दूसरा बड़ा बदलाव सप्लायर और व्यापारियों के बीच पेमेंट के तरीकों को लेकर आया है. भोपाल व्यवसायी महासंघ के महासचिव अनुपम अग्रवाल के अनुसार, कई मामलों में बाहरी सप्लायर ने उधार देना बंद कर दिया है और 100% एडवांस पेमेंट की मांग शुरू कर दी है. उधार बिजनेस चलाने का एक अहम हिस्सा है. आमतौर पर, व्यापारी पहले सामान खरीदता है और सामान बिकने के बाद ही सप्लायर को पेमेंट करता है. लेकिन, जब सप्लायर पहले ही पूरा पेमेंट मांगता है, तो व्यापारी को अपनी वर्किंग कैपिटल का इस्तेमाल करना पड़ता है. ऐसे में व्यापारी के सामने एक मुश्किल स्थिति होती है. उसे स्टॉक खरीदने के लिए पैसे लगाने पड़ते हैं, लेकिन बिक्री कितनी होगी, इसकी कोई गारंटी नहीं होती. इस बीच, दुकान का किराया, बिजली का बिल और कर्मचारियों की सैलरी जैसे फिक्स्ड खर्च तो होते ही रहते हैं.
नया सामान खरीदने पर असर
तीसरा बदलाव नया सामान खरीदने पर दिख रहा है. थोक कपड़ा व्यापारियों के अनुसार, सीलिंग को लेकर अनिश्चितता के कारण व्यापारियों ने रक्षाबंधन के सीजन में भी नया सामान खरीदने से परहेज किया. कपड़ा कारोबार में सीजन बहुत अहम होता है. त्योहारों के समय की मांग को देखते हुए व्यापारी पहले से ही स्टॉक तैयार कर लेते हैं. अगर किसी व्यापारी को भविष्य में बिक्री को लेकर पक्का भरोसा न हो, तो वह स्टॉक बढ़ाने के बजाय मौजूदा सामान बेचने पर ध्यान देता है. व्यापारियों का कहना है कि विदिशा, रायसेन, सागर और जबलपुर जैसे इलाकों से आने वाले कुछ खरीदार अब भोपाल के बजाय इंदौर और सूरत का रुख कर रहे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार मौजूदा सीजन में कपड़ा कारोबार में 15 से 20 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ है.
सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है
चौथी बात यह हो सकती है कि समस्या रिटेल सेक्टर से बढ़कर होलसेल लेवल तक पहुंच जाए. अभी तो इसका असर मुख्य रूप से रिटेलर्स और उनके कर्मचारियों पर पड़ रहा है. लेकिन अगर रिटेल बिक्री लंबे समय तक सुस्त रहती है, तो रिटेलर्स होलसेल मार्केट से अपनी खरीद कम कर देंगे. इसका सीधा असर होलसेल कारोबार पर पड़ेगा. यानी एक दुकान से शुरू हुआ संकट धीरे-धीरे पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है.
कितना बड़ा है भोपाल का व्यावसायिक तंत्र, आंकड़ों में समझें?
भोपाल न केवल एक राजधानी है, बल्कि मध्य मध्य प्रदेश का एक प्रमुख कमर्शियल हब है भी है. सीलिंग कार्रवाई की वजह से आए आर्थिक संकट की गंभीरता का अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है:
संस्थान और रोजगार का हाल: भोपाल में करीब 1.50 लाख दुकानें और कमर्शियल संस्थान हैं. इनमें से सिर्फ 60,000 ही नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज हैं. इन सभी दुकानों और संस्थानों से करीब 5 लाख लोगों का रोजगार जुड़ा है. यानी दुकान चलने से ही इन लोगों के घर का खर्च चलता है.
जीएसटी और रोज के व्यापार का गणित: टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के मुताबिक भोपाल से हर महीने करीब 680 करोड़ रुपये GST जमा होता है. अगर 12 से 14% टैक्स के हिसाब से जोड़ें तो भोपाल में रोज 156 से 182 करोड़ रुपये का व्यापार होता है.
सरकार के राजस्व को होगा बड़ा नुकसान: एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सीलिंग की वजह से सिर्फ 10% व्यापार भी प्रभावित हुआ तो रोज 15 से 18 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. अगर दुकानें लंबे समय तक बंद रहीं तो सरकार को मिलने वाला GST कम हो जाएगा और बिजली कंपनी को भी कमर्शियल बिलों से होने वाली कमाई में घाटा होगा.
मुख्यमंत्री मोहन यादव का आश्वासन और आगे की राह
सीलिंग विवाद के बीच अब सबसे अहम सवाल यह है कि सरकार आगे क्या कदम उठाएगी? सूत्रों के मुताबिक, सरकार सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल करने की तैयारी कर रही है. इस हलफनामे में सरकार के यह बताने की संभावना है कि वह जल्द ही एक नया मास्टर प्लान ला रही है, ताकि सीलिंग प्रक्रिया के दौरान सामने आई कमियों और अनियमितताओं को दूर किया जा सके और इसमें एक स्थायी समाधान भी शामिल किया जाएगा. वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि, सरकार भोपाल में आ रही दिक्कतों के बारे में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दे रही है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सबसे अच्छा फैसला लागू करेगी और सभी संबंधित पक्षों के हितों की रक्षा करेगी. कुल मिलाकर, अब फैसला सुप्रीम कोर्ट के हाथ में है. व्यापारियों को उम्मीद है कि कोर्ट के अगले निर्देशों और सरकार के मास्टर प्लान से भोपाल में कारोबार फिर से पटरी पर आ जाएगा.