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Explainer: एमपी की मंदाकिनी में क्यों आती है ऐसी बाढ़? जलस्तर बढ़ा तो डूब गए शहर के शहर, समझिए नदी का इतिहास और भूगोल

Explainer: सतना जिले के मशहूर तीर्थ स्थल चित्रकूट में भारी बारिश ने तबाही मचा दी. मंदाकिनी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से पानी घाटों से बाहर निकलकर रिहायशी इलाकों, बाजारों और आश्रमों तक पहुंच गया. आखिर मंदाकिनी नदी में ऐसी बाढ़ क्यों आती है? इस एक्सप्लेनर के जरिए नदी के इतिहास और भूगोल को समझते हैं.

Explainer: एमपी की मंदाकिनी में क्यों आती है ऐसी बाढ़? जलस्तर बढ़ा तो डूब गए शहर के शहर, समझिए नदी का इतिहास और भूगोल
Image Credit: मंदाकिनी में क्यों आती है ऐसी बाढ़?

मध्य प्रदेश के सतना जिले में भारी बारिश के कारण मंदाकिनी नदी उफान पर है. बारिश के बाद नदी का पानी रामघाट, राघव प्रयाग घाट, कामता, नयागांव, आरोग्यधाम, खटकाना, क्योतरा ​​और जानकीकुंड समेत कई इलाकों में भर गया.  हालात इतने गंभीर हो गए कि सड़कें पानी में डूब गईं और लोगों को अलग-अलग जगहों से नाव के जरिए सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा. इस भीषण बाढ़ के दौरान 42 साल पुराना एक पुल बह गया और 400 से ज्यादा दुकानें और घर पानी में डूब गए. इलाके में 20 घंटे तक बिजली गुल रही. सेना के दो हेलीकॉप्टरों और SDRF की टीमों ने 650 से ज्यादा लोगों को बचाया और उन्हें राहत शिविरों में पहुंचाया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद चित्रकूट जाकर बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की, उन्हें खाना और कपड़े बांटे और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया.

जलस्तर बढ़ा तो डूब गए शहर के शहर
शनिवार को लगातार चौदह घंटे की बारिश ने चित्रकूट का नजारा ही बदल दिया. मंदाकिनी नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि पानी घाटों से ऊपर उठकर बाजारों और घरों में घुस गया. सड़कों पर नावें चलती दिखीं, जबकि लोग अपने घरों और होटलों की छतों पर बैठकर मदद का इंतजार करते रहे. कई इलाकों में तो दो मंजिला इमारतें भी पानी में डूब गईं. चारों तरफ पानी से घिरे लोग बेबस होकर देखते रहे कि कैसे बाढ़ उनके घरों, सामान और जीवन भर की कमाई को बहा ले गई. रामघाट, राघव प्रयाग घाट, कामता, नयागांव, आरोग्यधाम, पुरानी लंका क्रॉसिंग, बाजार इलाका, खटकाना मोहल्ला, क्योतरा, रामायणी कुटी और जानकीकुंड में इसका असर सबसे ज्यादा हुआ. जैसे ही मंदाकिनी का पानी उनके घरों में घुसा लोगों ने जरूरी सामान इकट्ठा किया और छतों पर शरण ली, इस दौरान उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. बता दें कि इस बार मंदाकिनी ने 23 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. 2003 में नदी का जलस्तर लगभग 134 सेंटीमीटर दर्ज किया गया था, जबकि इस बार यह 134.02 सेंटीमीटर दर्ज किया गया.


20 घंटे अंधेरे में डूबा रहा पूरा इलाका
आमतौर पर तीर्थयात्रियों से भरी रहने वाली दुकानें पानी में डूबी हुई थीं. मंदाकिनी नदी के किनारे बनी लगभग 400 दुकानें बाढ़ की चपेट में आ गई. हालात बिगड़ने पर बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया गया और सेना के दो हेलीकॉप्टर तैनात किए गए. घरों और होटलों की छतों पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें की गईं. इस बीच, SDRF की टीमों ने बाढ़ के पानी में मोटरबोट का इस्तेमाल करके लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया. देर रात तक लगभग 650 लोगों को बचाकर राहत शिविरों में पहुंचाया जा चुका था. बाढ़ के कारण बिजली भी चली गई, जिससे पूरे इलाके में लगभग 20 घंटे तक अंधेरा छाया रहा. चारों तरफ पानी और घने अंधेरे के बीच, छतों पर फंसे परिवारों के लिए हर गुजरता पल बहुत तकलीफदेह था.

मंदाकिनी नदी का चित्रकूट से क्या रिश्ता है?
मंदाकिनी सिर्फ चित्रकूट की एक नदी नहीं है, यह इस धार्मिक शहर की पहचान का एक अहम हिस्सा है. चित्रकूट का धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन लंबे समय से मंदाकिनी के आस-पास ही फला-फूला है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सती अनसूया के तपोबल से मंदाकिनी नदी धरती पर अवतरित हुई थी. भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने वनवास का एक बड़ा हिस्सा चित्रकूट में बिताया और इसी नदी के किनारे रहे. नदी के किनारे रामघाट समेत कई प्रमुख धार्मिक स्थल मौजूद हैं. धार्मिक परंपराओं में भी मंदाकिनी नदी का खास महत्व है.

समझिए नदी का इतिहास और भूगोल
मंदाकिनी नदी मध्य प्रदेश के सतना जिले में विंध्य पर्वत शृंखला के मजगवां क्षेत्र  (सती अनुसूया के पास) से निकलती है. वहां से बहते हुए यह चित्रकूट से गुजरती है और आखिर में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में यमुना नदी में मिल जाती है. चित्रकूट के पास कई जगहों पर नदी का बहाव-मार्ग संकरा है. पहाड़ियों से होकर बहने के कारण, नदी की पानी जमा करने की क्षमता कम है. मंदाकिनी का जलग्रहण क्षेत्र घने जंगलों और पथरीली पहाड़ियों से घिरा हुआ है. जब विंध्य पहाड़ियों के ऊपरी इलाकों में भारी बारिश होती है, तो पानी तेजी से ढलान से नीचे आता है और मंदाकिनी में बहने लगता है.

क्यों आती है मंदाकिनी में ऐसी भयानक बाढ़? 
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में अचानक आई बाढ़ के लिए प्राकृतिक और इंसानी, दोनों तरह के कारण ज़िम्मेदार हैं. प्राकृतिक कारणों में बहुत ज्यादा बारिश (जैसे बादल फटने जैसी मूसलाधार बारिश) शामिल है. एक और कारण है इलाके की बनावट. सती अनुसूया और गुप्त-गोदावरी के ऊपर पहाड़ी इलाकों से पानी एक फनल की तरह नीचे बहता है और सीधे चित्रकूट के निचले घाटों पर जमा हो जाता है. इसके अलावा, यमुना का बैकवाटर इफेक्ट भी एक भूमिका निभाता है, अगर बांदा में यमुना नदी पहले से ही उफान पर है, तो मंदाकिनी का पानी आगे नहीं बढ़ पाता और उलटा चित्रकूट की ओर वापस आता है, जिससे जलभराव की समस्या और गंभीर हो जाती है.

साथ ही नदी के प्राकृतिक बाढ़ वाले मैदान पर बिना योजना के निर्माण, दुकानें और कंक्रीट के घाट बनाए गए हैं. खासकर रामघाट, जानकी कुंड और नयागांव के आसपास, जिससे नदी के प्राकृतिक फैलाव में रुकावट आती है. नदी की तलहटी में गाद और मलबे के लगातार जमा होने से इसकी गहराई कम हो गई है. पुराने हो चुके बुनियादी ढांचे जैसे 42 साल पुराना पुल और संकरे रास्ते पानी के तेज बहाव में बाधा डालते हैं, जिससे पानी पीछे की ओर मुड़ता है और रिहायशी इलाकों में फैल जाता है. ये सभी कारक मिलकर मंदाकिनी में विनाशकारी बाढ़ का कारण बनते हैं.

बाढ़ से बचाने के लिए क्या करना होगा?

  • मंदाकिनी नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जानी चाहिए और जैसे ही यह तय सीमा से ऊपर जाए, चेतावनी जारी की जानी चाहिए.
  • निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सायरन, मोबाइल अलर्ट और स्थानीय प्रशासन के जरिए पहले ही सूचित किया जाना चाहिए.
  • यह पता लगाया जाना चाहिए कि अलग-अलग जलस्तर पर नदी का पानी किन इलाकों तक पहुंच सकता है.
  • बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में पक्के ढांचों और दुकानों की स्थिति की समीक्षा करना जरूरी है.
  • इस बारे में पहले से योजना बनाई जानी चाहिए कि किन इलाकों के लिए कौन सा राहत कैंप तय किया जाएगा और वहां तक पहुंचने के सबसे सुरक्षित रास्ते कौन से होंगे.
  • मानसून के दौरान जोखिम वाले इलाकों में नावें, लाइफ जैकेट और बचाव कार्य में प्रशिक्षित टीमें तैयार रखी जानी चाहिए.
  • बाढ़ से प्रभावित इलाकों और राहत कैंपों के लिए जनरेटर और बिजली के अन्य बैकअप स्रोतों का इंतज़ाम किया जाना चाहिए.

सीएम मोहन ने बाढ़ पीड़ितों से की मुलाकात
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चित्रकूट पहुंचे, जहां उन्होंने प्राचीन मुखारबिंदु आश्रय स्थल पर बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की, उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया और कपड़े व खाने-पीने का सामान बांटा. उन्होंने चित्रकूट इलाके का जायजा भी लिया और स्थानीय लोगों से उनके घरों में जाकर मुलाकात की. इसके कुछ ही देर बाद मुख्यमंत्री आरोग्य धाम हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के जरिए ओरछा के लिए रवाना हो गए.

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Ranjana Kahar

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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