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मध्य प्रदेश के सतना जिले में भारी बारिश के कारण मंदाकिनी नदी उफान पर है. बारिश के बाद नदी का पानी रामघाट, राघव प्रयाग घाट, कामता, नयागांव, आरोग्यधाम, खटकाना, क्योतरा और जानकीकुंड समेत कई इलाकों में भर गया. हालात इतने गंभीर हो गए कि सड़कें पानी में डूब गईं और लोगों को अलग-अलग जगहों से नाव के जरिए सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा. इस भीषण बाढ़ के दौरान 42 साल पुराना एक पुल बह गया और 400 से ज्यादा दुकानें और घर पानी में डूब गए. इलाके में 20 घंटे तक बिजली गुल रही. सेना के दो हेलीकॉप्टरों और SDRF की टीमों ने 650 से ज्यादा लोगों को बचाया और उन्हें राहत शिविरों में पहुंचाया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद चित्रकूट जाकर बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की, उन्हें खाना और कपड़े बांटे और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया.
जलस्तर बढ़ा तो डूब गए शहर के शहर
शनिवार को लगातार चौदह घंटे की बारिश ने चित्रकूट का नजारा ही बदल दिया. मंदाकिनी नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि पानी घाटों से ऊपर उठकर बाजारों और घरों में घुस गया. सड़कों पर नावें चलती दिखीं, जबकि लोग अपने घरों और होटलों की छतों पर बैठकर मदद का इंतजार करते रहे. कई इलाकों में तो दो मंजिला इमारतें भी पानी में डूब गईं. चारों तरफ पानी से घिरे लोग बेबस होकर देखते रहे कि कैसे बाढ़ उनके घरों, सामान और जीवन भर की कमाई को बहा ले गई. रामघाट, राघव प्रयाग घाट, कामता, नयागांव, आरोग्यधाम, पुरानी लंका क्रॉसिंग, बाजार इलाका, खटकाना मोहल्ला, क्योतरा, रामायणी कुटी और जानकीकुंड में इसका असर सबसे ज्यादा हुआ. जैसे ही मंदाकिनी का पानी उनके घरों में घुसा लोगों ने जरूरी सामान इकट्ठा किया और छतों पर शरण ली, इस दौरान उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. बता दें कि इस बार मंदाकिनी ने 23 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. 2003 में नदी का जलस्तर लगभग 134 सेंटीमीटर दर्ज किया गया था, जबकि इस बार यह 134.02 सेंटीमीटर दर्ज किया गया.
20 घंटे अंधेरे में डूबा रहा पूरा इलाका
आमतौर पर तीर्थयात्रियों से भरी रहने वाली दुकानें पानी में डूबी हुई थीं. मंदाकिनी नदी के किनारे बनी लगभग 400 दुकानें बाढ़ की चपेट में आ गई. हालात बिगड़ने पर बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया गया और सेना के दो हेलीकॉप्टर तैनात किए गए. घरों और होटलों की छतों पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें की गईं. इस बीच, SDRF की टीमों ने बाढ़ के पानी में मोटरबोट का इस्तेमाल करके लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया. देर रात तक लगभग 650 लोगों को बचाकर राहत शिविरों में पहुंचाया जा चुका था. बाढ़ के कारण बिजली भी चली गई, जिससे पूरे इलाके में लगभग 20 घंटे तक अंधेरा छाया रहा. चारों तरफ पानी और घने अंधेरे के बीच, छतों पर फंसे परिवारों के लिए हर गुजरता पल बहुत तकलीफदेह था.
मंदाकिनी नदी का चित्रकूट से क्या रिश्ता है?
मंदाकिनी सिर्फ चित्रकूट की एक नदी नहीं है, यह इस धार्मिक शहर की पहचान का एक अहम हिस्सा है. चित्रकूट का धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन लंबे समय से मंदाकिनी के आस-पास ही फला-फूला है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सती अनसूया के तपोबल से मंदाकिनी नदी धरती पर अवतरित हुई थी. भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने वनवास का एक बड़ा हिस्सा चित्रकूट में बिताया और इसी नदी के किनारे रहे. नदी के किनारे रामघाट समेत कई प्रमुख धार्मिक स्थल मौजूद हैं. धार्मिक परंपराओं में भी मंदाकिनी नदी का खास महत्व है.
समझिए नदी का इतिहास और भूगोल
मंदाकिनी नदी मध्य प्रदेश के सतना जिले में विंध्य पर्वत शृंखला के मजगवां क्षेत्र (सती अनुसूया के पास) से निकलती है. वहां से बहते हुए यह चित्रकूट से गुजरती है और आखिर में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में यमुना नदी में मिल जाती है. चित्रकूट के पास कई जगहों पर नदी का बहाव-मार्ग संकरा है. पहाड़ियों से होकर बहने के कारण, नदी की पानी जमा करने की क्षमता कम है. मंदाकिनी का जलग्रहण क्षेत्र घने जंगलों और पथरीली पहाड़ियों से घिरा हुआ है. जब विंध्य पहाड़ियों के ऊपरी इलाकों में भारी बारिश होती है, तो पानी तेजी से ढलान से नीचे आता है और मंदाकिनी में बहने लगता है.

क्यों आती है मंदाकिनी में ऐसी भयानक बाढ़?
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में अचानक आई बाढ़ के लिए प्राकृतिक और इंसानी, दोनों तरह के कारण ज़िम्मेदार हैं. प्राकृतिक कारणों में बहुत ज्यादा बारिश (जैसे बादल फटने जैसी मूसलाधार बारिश) शामिल है. एक और कारण है इलाके की बनावट. सती अनुसूया और गुप्त-गोदावरी के ऊपर पहाड़ी इलाकों से पानी एक फनल की तरह नीचे बहता है और सीधे चित्रकूट के निचले घाटों पर जमा हो जाता है. इसके अलावा, यमुना का बैकवाटर इफेक्ट भी एक भूमिका निभाता है, अगर बांदा में यमुना नदी पहले से ही उफान पर है, तो मंदाकिनी का पानी आगे नहीं बढ़ पाता और उलटा चित्रकूट की ओर वापस आता है, जिससे जलभराव की समस्या और गंभीर हो जाती है.

साथ ही नदी के प्राकृतिक बाढ़ वाले मैदान पर बिना योजना के निर्माण, दुकानें और कंक्रीट के घाट बनाए गए हैं. खासकर रामघाट, जानकी कुंड और नयागांव के आसपास, जिससे नदी के प्राकृतिक फैलाव में रुकावट आती है. नदी की तलहटी में गाद और मलबे के लगातार जमा होने से इसकी गहराई कम हो गई है. पुराने हो चुके बुनियादी ढांचे जैसे 42 साल पुराना पुल और संकरे रास्ते पानी के तेज बहाव में बाधा डालते हैं, जिससे पानी पीछे की ओर मुड़ता है और रिहायशी इलाकों में फैल जाता है. ये सभी कारक मिलकर मंदाकिनी में विनाशकारी बाढ़ का कारण बनते हैं.
बाढ़ से बचाने के लिए क्या करना होगा?

सीएम मोहन ने बाढ़ पीड़ितों से की मुलाकात
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चित्रकूट पहुंचे, जहां उन्होंने प्राचीन मुखारबिंदु आश्रय स्थल पर बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की, उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया और कपड़े व खाने-पीने का सामान बांटा. उन्होंने चित्रकूट इलाके का जायजा भी लिया और स्थानीय लोगों से उनके घरों में जाकर मुलाकात की. इसके कुछ ही देर बाद मुख्यमंत्री आरोग्य धाम हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के जरिए ओरछा के लिए रवाना हो गए.