1 करोड़ की रिश्वतखोरी में फंसे डिप्टी CM के पूर्व OSD सस्पेंड, फर्जी FDR से दिए थे शराब के ठेके, जल्द दर्ज हो सकती है FIR
MP News: डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के पूर्व OSD दीपक रायचुरा को ₹1 करोड़ की रिश्वत लेने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है. उन पर शराब के कॉन्ट्रैक्ट देने और शराब के अवैध कारोबार से जुड़ी रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप हैं.
मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के OSD रहे दीपम रायचुरा को निलंबित कर दिया गया है. शराब दुकान टेंडर में गड़बड़ी सामने आने के बाद पहले उन्हें OSD पद से हटाया गया था, अब जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है. जांच में सामने आया कि रायचुरा ने 2.75 लाख रुपये की फर्जी FDR स्वीकार की और बिना पार्टनरशिप डीड के लाइसेंस ट्रांसफर कर दिया. उन पर भोपाल में दो शराब दुकानें दिलाने के एवज में एक करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का भी आरोप है.
फर्जी FDR के जरिए दिए शराब के ठेके
जांच से सामने आया है कि शराब के ठेके देने के लिए रिश्वत ली गई थी. इस काम से अवैध शराब का धंधा भी बढ़ रहा था. पूरे घोटाले में चालाकी से फर्जीवाड़ा किया गया. रायचुरा पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी FDR के आधार पर शराब के ठेके दिए.
₹2.75 करोड़ की FDR फर्जी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने बताया कि शराब की दुकान के लिए सिक्योरिटी के तौर पर AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से ₹2.75 करोड़ की FDR ली गई थी. FDR पर 12 मई, 2024 की तारीख और वेरिफिकेशन की तारीख 20 मई लिखी थी. बाद में बैंक ने बताया कि ऐसी कोई FDR कभी जारी ही नहीं की गई थी. हालांकि FDR के वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी आबकारी उपनिरीक्षक की थी, लेकिन उन्होंने दावा किया कि उन्हें वेरिफिकेशन के लिए कोई लेटर कभी नहीं मिला. FDR में बैंक ब्रांच का नाम तक नहीं था. बाद में जांच से पता चला कि FDR और वेरिफिकेशन रिपोर्ट दोनों ही फर्जी थे.
जल्द दर्ज हो सकती है एफआईआर
इस गंभीर अनियमितता के सामने आने के बाद आबकारी विभाग हरकत में आ गया है और मामले की पूरी जानकारी जुटाने में लगा है. विभाग की शुरुआती जांच के आधार पर आरोपी OSD दीपक रायचुरा के खिलाफ जल्द ही FIR दर्ज किए जाने की संभावना है.
ऐसे भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी में प्रशासनिक पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है. डिप्टी सीएम के OSD जैसे अहम पद पर रहते हुए एक करोड़ रुपये की रिश्वत लेना और जाली FDR के जरिए शराब के ठेके आवंटित करना एक गंभीर अपराध है. फिलहाल आबकारी विभाग इस मामले की जांच कर रहा है.