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'सिंधिया खुद बनना चाहते थे CM, कमलनाथ-ज्योतिरादित्य के बीच ईगो क्लैश...', दिग्विजय सिंह ने बताई 2020 में MP सरकार गिरने की अंदर की बात

Digvijaya Singh: पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बताया है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार 2020 में किसी बाहरी दबाव के कारण नहीं, बल्कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के अहंकार के टकराव और मतभेदों के कारण गिरी थी.

Written By Ranjana Kahar
Published: Oct 12, 2026, 11:33 AM IST | Updated: Oct 12, 2026, 11:41 AM IST
Image Credit: दिग्विजय सिंह ने बताई 2020 में MP सरकार गिरने की अंदर की बात
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने की असली वजह बताई है. उन्होंने कहा कि सरकार किसी बाहरी दबाव की वजह से नहीं, बल्कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच अहंकार की लड़ाई (ईगो क्लैश) के कारण गिरी थी. दिग्विजय के मुताबिक, सिंधिया शुरू में खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे. बाद में उन्होंने मांग की कि तुलसी सिलावट को पीसीसी चीफ और गोविंद राजपूत को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए, लेकिन कमलनाथ ने इन मांगों को ठुकरा दिया. सरकारी बंगले को अपने पास रखने और ग्वालियर में तबादलों को लेकर हुए विवादों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया, जिसके चलते आखिरकार सरकार गिर गई.

सिंधिया खुद बनना चाहते थे सीएम- दिग्विजय सिंह
दरअसल,  उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जा रही 'शिवधाम से रामधाम सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि, 2018 में 114 विधायकों में से 90 से ज्यादा ने कमलनाथ का समर्थन किया था, जबकि 20-22 विधायक ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ थे. सिंधिया मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन उनके पास जरूरी संख्याबल नहीं था. कमलनाथ ने उन्हें PCC अध्यक्ष का पद देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया. इसके बाद दोनों नेताओं के बीच तनाव बढ़ता गया.

बंगले को लेकर विवाद
दिग्विजय सिंह ने बताया कि लोकसभा चुनाव हारने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश कोटे से लुटियंस दिल्ली में 23 सफदरजंग रोड स्थित अपना सरकारी बंगला अपने पास ही रखना चाहते थे. कमलनाथ इसके लिए तैयार नहीं थे. इस विवाद को सुलझाने के लिए मैंने एक डिनर रखा. ये डिनर शोभना भरतिया के घर पर था, जिसमें सुनील मित्तल भी मौजूद थे. इस दौरान कमलनाथ और सिंधिया के बीच तीखी नोकझोंक हुई. कमलनाथ जी ने सिंधिया से कहा, "व्हाट डू यू थिंक ऑफ योरसेल्फ ज्योतिरादित्य? आई एम द चीफ मिनिस्टर!" जब मैंने मामला शांत कराने की कोशिश की तो कमलनाथ ने मुझे भी चुप करा दिया.

ईगो की वजह से गिरी सरकार
दिग्विजय सिंह ने कहा कि ग्वालियर संभाग में तबादलों को लेकर उन्होंने और ज्योतिरादित्य ने मिलकर एक सहमति वाली लिस्ट तैयार की थी, उस पर साइन किए थे और उसे कमलनाथ को सौंपा था. लेकिन डेढ़ महीने तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ. जब उन्होंने कमलनाथ से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया, "दिग्विजय, क्या मैं बेवकूफ हूं? अगर तुम दोनों एक हो जाओगे, तो मेरी क्या स्थिति रह जाएगी?" बस इसी आपसी ईगो की वजह से सरकार गिर गई.

सिंधिया की कांग्रेस में वापसी पर दो टूक
इस बीच, ज्योतिरादित्य सिंधिया की कांग्रेस में वापसी की संभावना पर बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने साफ किया कि हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. राहुल गांधी पक्के उसूलों वाले व्यक्ति हैं और वे अतीत की तरह अब राजनीतिक समझौतों या जोड़-तोड़ में विश्वास नहीं रखते.
 

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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