मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई हैं. गायनेकोलॉजी वार्ड में दो नवजातों की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अस्पताल में पिछले तीन दिनों के भीतर तीन नवजातों और एक प्रसूता की मौत ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. फिलहाल जांच रिपोर्टों का इंतजार है. जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.
पहला मामला सिवनी की रहने वाली मंगालिया डेहरिया का है. उनके परिवार का आरोप है कि प्रसव के दौरान उन्हें समय पर सही इलाज नहीं मिला, जिसकी वजह से उनकी नवजात बेटी की मौत हो गई. महिला की ननद मोनिका डेहरिया ने भी इलाज में देरी और अस्पताल के कर्मचारियों के बर्ताव को लेकर सवाल उठाए हैं. वहीं दूसरा मामला कुकड़ा जगत की रहने वाली अनीता यादव का है, जो चार दिनों से अस्पताल में भर्ती थीं. प्रसव के बाद शनिवार को उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई. परिवार को बताया गया कि बच्चे का दूध गले में अटक गया था.
गौरतलब है कि ठीक तीन दिन पहले भी प्रसूता की मौत का मामला सामने आया था. लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि, परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और इन मौतों के वास्तविक कारणों की पुष्टि अभी बाकी है. इसके लिए जांच और मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा की जानी है.
जिला अस्पताल में नवजात बच्ची की मौत के मामले में गायनिक विभागाध्यक्ष डॉ. शिरपुरकर ने बताया कि महिला की डिलीवरी की संभावित तारीख 15 नवंबर थी. लेकिन दर्द की वजह से वह रात 12:00 से 12:30 बजे के बीच अस्पताल पहुंची. शुरुआती जांच के बाद सुबह ऑपरेशन करने का फैसला लिया गया, क्योंकि महिला ने रात में खाना खा लिया था और उसे प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) भी बहुत तेज नहीं हो रही थी. डॉक्टर के अनुसार, सुबह करीब 6:00 बजे अचानक प्रसव प्रक्रिया तेज हो गई और बच्ची का जन्म मृत अवस्था में हुआ. डॉक्टर ने इसे प्रेसिपिटेट डिलीवरी बताया है. फिलहाल आगे की जांच रिपोर्ट का इंतजार है. वहीं परिवार वालों ने इलाज में देरी का आरोप लगाया है. पूरी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.
अंकित वैकर की रिपोर्ट