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दिवाली के पावन मौके पर जहां लोग मां लक्ष्मी की आराधना कर धन-धान्य की कामना करते हैं, वहीं मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक ऐसी अनूठी परंपरा निभाई जाती है, जो समाज में आपसी प्रेम और सद्भाव की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती है. आमतौर पर किन्नरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में कुछ अलग छवि आ जाती है और लोग कहीं न कहीं इन्हें लेकर अपनी अलग राय भी बना लेते है, लेकिन दमोह में दीपावली में किन्नरों का खास महत्व है. लोग धनतेरस से देव उठनी एकादशी तक किन्नरों का इंतजार करते है और लोगों की ये इच्छा होती है कि उनकी दुकान में किन्नरों के कदम पड़े और उनके घर आंगन में किन्नर आकर ढोलक की थाप पर नाच गाना करें.
लोगों का अटूट विश्वास है कि इस त्योहारी सीजन में किन्नरों का आगमन और उनका आशीर्वाद व्यापार में दिन-दूनी रात-चौगुनी बरकत लेकर आता है. मान्यता है कि किन्नर शुभ होते है और दीपावली के इस त्यौहार पर उनका आना और उनकी आवभगत से मिलने वाली दुआओं से व्यापार बढ़ता है और लोगों के घरों में बरक्कत आती है.
दमोह के बाजारों में बरसों से यह परंपरा चली आ रही है कि दीपावली के इन खास दिनों में किन्नरों की टोलियां शहर की हर एक दुकान और घर तक पहुंचती हैं. इस दौरान धर्म और जाति के बंधनों से ऊपर उठकर हर वर्ग के लोग उनका स्वागत करते हैं. दुकानों और घरों के बाहर ढोलक की थाप के साथ उनका सत्कार किया जाता है, उन्हें आदर से बैठाकर चाय-नाश्ता कराया जाता है और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा दी जाती है. इसके बदले में किन्नर दुकानदारों को 'दुआ का सिक्का' भेंट करते हैं, जिसे व्यापारी अपनी तिजोरी या गल्ले में संभाल कर रखते हैं ताकि बरकत बनी रहे. इस अनोखी परंपरा को लेकर स्थानीय लोगों और खुद किन्नर समाज में भी गहरा उत्साह देखने को मिलता है.
दमोह की रहने वाली गुड़िया बुआ बताती हैं, 'हमारे ये शुरू से परंपरा चली आ रही है और हमारे जजमान बहुत खुशी से हमारा सम्मान करते हैं, चाय पिलाते हैं और हमें नेग देते हैं.ट शहरवासियों को आशीर्वाद देते हुए वह कहती हैं, 'भगवान करे हमारे नगरवासी और सभी लोग सुखी रहें, खूब फलें-फूलें और सभी की दिवाली बहुत अच्छी हो.' इसी तरह किन्नर समाज की बेबी ने बताया, 'हम लोग दुकान में आते हैं, नाचते-गाते हैं और खुशियां मनाते हैं. आम जनता के साथ हम भी दिवाली का खूब आनंद उठाते हैं, लोग हमें बहुत सम्मान के साथ बुलाते और बैठाते हैं.'
व्यापारियों और नई पीढ़ी का भी इस परंपरा से गहरा जुड़ाव है. दमोह के व्यापारी संजय कुमार का कहना है कि वे दीपावली पर किन्नरों का इंतजार करते हैं और उनके आने पर ढोलक की थाप के साथ उनका स्वागत होता है. उनका मानना है कि किन्नरों द्वारा दी गई दुआएं और आशीर्वाद हमेशा फलीभूत होते हैं. वहीं, युवा पीढ़ी की वंशी जैन ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, 'हम बचपन से अपने परिवार को यह परंपरा निभाते देखते आ रहे हैं. जब हमने इसके बारे में बड़ों से पूछा, तो पता चला कि यह हमारे शहर की खास संस्कृति है. वे खुशी से दुकान पर आती हैं, नाचती-गाती हैं और दुआएं देकर जाती हैं.'