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दिवाली के पावन पर्व से ठीक पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत पूरा राज्य कचरे के अंबार और बदहाली से जूझ रहा है. राज्य के करीब ढाई लाख दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं और इस वजह से 16 नगर निगमों और 374 नगर पालिकाओं में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ गई है. वल्लभ भवन (मंत्रालय) से लेकर शहर की मुख्य सड़कों और बाजारों तक कचरे के ढेर लगे हैं. हड़ताली कर्मचारी किसी मध्यस्थ के बजाय सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बात की मांग पर अड़े हैं.
सफाई कर्मचारियों ने मांगें न माने जाने पर जलापूर्ति रोकने और अटल भवन में तालाबंदी की चेतावनी दी है. सफाई कर्मचारियों के हड़ताल का आज तीसरा दिन है और उन्होंने साफ किया कि सांसद, विधायक या किसी अन्य मध्यस्थ के जरिए बातचीत नामंजूर है. कर्मचारी मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत की मांग पर अड़े हैं.
भोपाल समेत पूरे मध्य प्रदेश में सफाई व्यवस्था ठप है, ऐसे में गंदगी के बीच दीपावली की शुरुआत कैसे होगी? दिवाली से ठीक पहले सड़कों पर और बाजारों में कचरे के ढेर लग गए, ऐसे में मां लक्ष्मी कैसे आएंगी? हड़ताल कर रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने नियमित स्टाफ को भी काम करने से रोक दिया है, जिस वजह से वार्ड कार्यालयों में सफाई व्यवस्था समेत कई कामों पर असर पड़ रहा है.
1. सफाई कर्मचारियों को स्थायी किया जाए और ठेका व्यवस्था बंद हो.
2. किसी भी सफाई कर्मचारी का वेतन ₹25,000 प्रतिमाह से कम न हो.
3. सेवाकाल के दौरान पति-पत्नी में से किसी की मृत्यु होने पर दूसरे को अनुकंपा नियुक्ति मिले.
4. सभी सफाई कर्मचारियों को शासकीय/सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए.
सफाई कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल से सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और राजधानी भोपाल में ही हजारों टन कचरा जमा हो गया है. नगर निगम के सभी क्षेत्रों से गुरुवार को बड़ी संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने नगर निगम मुख्यालय का घेराव कर उग्र प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की. हड़ताल के चलते लगातार 2 दिन में ही भोपाल के सभी 85 वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन पूरी तरह बंद है, जिससे सड़कों और मुख्य बाजारों में जगह-जगह कचरे का अंबार लग गया है. दो दिनों के भीतर करीब 2100 टन कचरा सड़ांध मार रहा है, जिससे त्योहारी माहौल के बीच भोपाल वासियों के सामने गंदगी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.