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"तुम्हारे बाप का राज है क्या..." अतिक्रमण पर भड़के सिटी मजिस्ट्रेट, मकान मालिक से तीखी बहस

खंडवा में जिला अस्पताल की सरकारी जमीन पर बरसों से जारी अतिक्रमण को हटाने पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट और मकान मालिक के बीच तीखी बहस हो गई. जब मकान मालिक ने शर्त रखी कि पूरे मोहल्ले की नापती के बाद ही वह नापती करने देगा, तो मजिस्ट्रेट भड़क गए.

Written By Ranjana Kahar
Published: Oct 28, 2026, 01:01 PM IST | Updated: Oct 28, 2026, 01:05 PM IST
Image Credit: अतिक्रमण पर भड़के सिटी मजिस्ट्रेट
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मध्य प्रदेश के खंडवा में कल्लनगंज इलाके में जिला सरकारी अस्पताल की लगभग 15,000 वर्ग फुट जमीन पर लंबे समय से अवैध निर्माण और अतिक्रमण है. अस्पताल प्रशासन इस जमीन को वापस पाने के लिए लगातार कोशिशें कर रहा है. इसी सिलसिले में जब सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर सिंह और उनकी टीम जमीन का सर्वे करने और अतिक्रमण हटाने पहुंची, तो वहां स्थिति तनावपूर्ण हो गई.

अतिक्रमण पर भड़के सिटी मजिस्ट्रेट

कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मकान मालिक जाहिद खान ने सिटी मजिस्ट्रेट से कहा कि जब पूरे मोहल्ले के मकानों की नपती होगी, तभी वह उन्हें नपती करने देंगे. इस बात से नाराज सिटी मजिस्ट्रेट ने कड़े शब्दों में कहा, "तुम्हारे बाप का राज है क्या, जो हमें सरकारी जमीन की नपती नहीं करने दोगे?"

जिला अस्पताल की सरकारी जमीन पर कई सालों से अवैध कब्जा

दरअसल, जिला सरकारी अस्पताल की लगभग 15,000 वर्ग फुट जमीन पर कई सालों से अवैध कब्जा है, जहां लोगों ने घर बना लिए हैं और वे वहां रह रहे हैं. अस्पताल प्रशासन लंबे समय से इस कब्जे को हटाने की कोशिश कर रहा है. इसी सिलसिले में सिटी मजिस्ट्रेट अस्पताल की जमीन का सर्वे करने पहुंचे थे. इस दौरान अवैध कब्जे वाली जमीन पर बने एक घर के मालिक के साथ उनकी बहस हो गई. घर के मालिक का तर्क था कि केवल उसने ही वहां घर नहीं बनाया है, बल्कि कई अन्य लोगों ने भी वहां घर बनाए हैं और वे सालों से वहां रह रहे हैं.

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अतिक्रमणकारियों को अल्टीमेटम

मकान मालिक ने कहा कि पूरे मोहल्ले की नापती करवाईए तभी मैं नापती करने दूंगा. इस बात पर सिटी मजिस्ट्रेट नाराज हो गए. काफी बहस के बाद कार्रवाई को एक दिन के लिए टाल दिया गया और यह निर्देश दिया गया कि सरकारी जमीन पर बने घरों में रहने वाले लोग अपने जरूरी दस्तावेज तैयार रखें. सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि अगर दस्तावेजों से साफ साबित हो जाता है कि जिस जमीन पर घर बना है वह वहां रहने वालों की ही है, तो अतिक्रमण नहीं हटाया जाएगा. वरना सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाना ही होगा. वहां रहने वालों के लिए यही बेहतर होगा कि वे खुद ही अतिक्रमण हटा लें.

अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई

यह मामला एक बार फिर सरकारी जमीन पर बढ़ते अतिक्रमण और प्रशासन द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई के बीच के तनाव को उजागर करता है. जहां एक ओर प्रशासन सरकारी जमीन को वापस लेने के अपने प्रयासों को तेज कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वहां बरसों से रह रहे स्थानीय निवासी अपने घरों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि एक दिन की मोहलत खत्म होने के बाद वहां रहने वाले लोग कौन-से वैध दस्तावेज पेश कर पाते हैं. साथ ही यह देखना भी बाकी है कि प्रशासन का तोड़फोड़ अभियान जारी रहेगा या निवासियों को कोई राहत मिलेगी. फिलहाल, खंडवा में यह मुद्दा चर्चा का मुख्य विषय बन गया है.
 

प्रमोद सिन्हा की रिपोर्ट
 

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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