‘वेलकम’ के मुश्ताक खान की कहानी: बालाघाट के बैहर से मुंबई तक, बचपन से ही था एक्टर बनने का जुनून
एक्टर मुश्ताक का 56 साल की उम्र में मुंबई के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली है. उन्होंने एमपी के बालाघाट से मुंबई पहुंचकर बचपन में ही एक्टिंग करने का सपना देखा था. आइए उनके बचपन की कहानी के बारे में बताते हैं.
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर कस्वे से निकले एक्टर मुश्ताक खाने अपनी मेहनत के दम पर मुंबई में खास पहचान बनाई थी. फेम एक्टर मुश्ताक खान ने 56 साल की उम्र में 24 सितंबर 2026 को अंतिम ले ली है. 31 दिसंबर 1969 को बैहर के एक मिडिल क्लास मुस्लिम परिवार में जन्मे मुश्ताक ने बचपन से ही एक्टिंग करने का मन बना लिया था. उन्हें कहीं भी स्टेज और माइक दिखाई देता था, तो उसी जगह पहुंचने के लिए मन मचलने लगता था.
एक बार की बात है, जब मुश्ताक खान 7वीं कक्षा में पढ़ रहे थे. तब उन्होंने स्कूल में नाटक चल रहे थे. तभी इन्होंने नाटकों में हिस्सा लेना शुरू किया. इसके बाद से इनके अंदर एक्टिंग करने का जुनून पैदा हो गया. वहीं बैहर में लोग इनके नाटकों के कद्रदान बन गए.
कॉलेज में एक्टिंग का सिलसिला
इन नाटकों में हिस्सा लेने के बाद से मुश्ताक खान की एक्टिंग का सिलसिला कॉलेज में भी जारी रहा. बताया जाता है कि उन्हें कॉलेज में आर्ट्स एंड कल्चर प्रोग्राम्स का सेक्रेटरी भी बनाया गया था. उनके नाटक और मंच पर उनका अंदाज लोगों को काफी पंसद आता था. बैहर के दोस्त-यार और टीचर भी इनकी इस कला के बारे में समझ चुके थे. वे अक्सर मुश्ताक से कहते थे कि तुम्हारी जगह इस छोटे शहर तक सीमित नहीं है. इतना ही नहीं उन लोगों ने मुश्ताक खान को FTTI पुणे या फिर सीधे मुंबई जाने की सलाह दी.
दोस्तों की बातें सुन चले गए मुंबई
दोस्तों की बात सुनकर मुश्ताक खान ने आखिरकार मुंबई जाने का फैसला किया. हालांकि, मुश्ताक का परिवार मुंबई जाने के फैसले से खुश नहीं था. घरवाले चाहते थे कि बैहर में ही रहें, पुश्तैनी कपड़ों का काम करे. मुश्ताक खान को परिवार ने बहुत समझाया, मुंबई जाने से रोकने की काफी कोशिश की. लेकिन उन्होंने परिवार की एक न सुनी. इसी बीच उनका साथ उनके बड़े भाई ने दिया. किसी तरह परिवार को मुंबई भेजने के लिए राजी किया. इसके बाद उन्होंने 1975 में मुश्ताक मुंबई पहुंच गए. लेकिन सपनों की नगरी में कदम रखते ही उनके सामने रहने के लिए मुश्किल खड़ी हो गई.
रहने तक के नहीं थे रुपए
तब मुश्ताक खान के पास रहने के लिए पैसे कम थे, लेकिन एक्टर बनने की जिद ने उन्हें हिम्मत और दी. इसके बाद से ही मुश्ताक खान के संघर्ष का असली दौर शुरू हुआ. रहने के लिए ठीक जगह मिली तो उन्हें कई बार उन्हें फुटपाथ पर सोना पड़ा. इसके अलावा, उन्होंने कई रातें रेलवे स्टेशन पर भी गुजारनी पड़ीं. घर से मिलने वाला खर्चा इतना नहीं था कि रहने, खाने और अन्य खर्च एक साथ कर सकें. कुछ महीने बीतने के बाद उनके परिवार को उनकी चिंता होने लगी. उन्होंने वापस बैहर लौटने के लिए कहा. लेकिन मुश्ताक खान ने कभी भी घरवालों को अपनी परेशानियों के बारे में नहीं बताया. वे हमेशा कहते रहे कि सब ठीक है. वह आराम से अपनी जिंदगी जी रहे हैं.
मुंबई में युवक से हुई थी दोस्ती
इसी बीच मुंबई में मुश्ताक खान की दोस्ती चेतन ठाकर नाम के एक युवक से हुई. चेतन एक अमीर परिवार का रहने वाला युवक था. उसका एक होटल भी था. उन्होंने मुश्ताक की काफी मदद की, जिससे मुंबई में रहने और खाने की परेशानी काफी हद तक दूर हो गई थी. परिवार ने जब पैसे भेजना बंद कर दिया, तब भी मुश्ताक ने मुंबई छोड़ने का फैसला नहीं किया. मुश्ताक खान अभिनेता बनने की जिद उन्हें आगे लेकर गई. वहीं उन्होंने बालाघाट के बैहर से निकलकर मुंबई तक अपनी खास पहचान बनाई.
किन-किन फिल्मों में किया काम
मुश्ताक खान ने आगे चलकर ‘वेलकम’, ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘मुझसे शादी करोगी’ और ‘हम हैं राही प्यार के’ जैसी चर्चित फिल्मों में काम किया. उन्होंने फिल्मों के साथ टीवी शोज और नाटकों में भी अपनी पहचान बनाई. अब उनके निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक है. मुश्ताक पिछले करीब 15 दिनों से मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती थे. वे पांच साल से कैंसर से जूझ रहे थे. 24 सितंबर को उन्होंने अंतिम सांस ली और अंतिम संस्कार 25 सितंबर को मुंबई में होगा.