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देसी तोप या आंखों के लिए काल: क्या है कार्बाइड गन और क्यों सरकार ने लगाया बैन? डॉक्टर से जानें कितना खतरनाक है इसका इस्तेमाल

दिवाली से ठीक पहले सीएम मोहन यादव ने 'कार्बाइड गन' पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं. पिछले साल इस खतरनाक तोप से 300 से अधिक लोगों ने आंखों की रोशनी गंवा दी थी. इसको लेकर हमने डॉक्टर से बात की, जिन्होंने कार्बाइड गन के धमाके से आंखों को होने वाले नुकसान को लेकर विस्तार से जानकारी दी है.

Written BySumit Rai
Published: Oct 24, 2026, 05:59 PM IST|Updated: Oct 25, 2026, 02:55 PM IST
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देसी तोप या आंखों के लिए काल: क्या है कार्बाइड गन और क्यों सरकार ने लगाया बैन? डॉक्टर से जानें कितना खतरनाक है इसका इस्तेमाल
Image Credit: Zee News Creatives

About the Author

Sumit Rai

Sumit Rai

न्यूज़ मीडिया में 13 सालों से अधिक के अनुभव के साथ सुमित राय एक डिजिटल पत्रकार हैं. वर्तमान में सुमित राय Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम के लीड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, प्रशासनिक फैसलों, क्राइम और हाइपरलोकल मुद्दों के सटीक और गहरे विश्लेषण पर उनकी मजबूत पकड़ है.भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद सुमित ने मीडिया जगत में अपनी पहचान बनाई. अपने करियर के दौरान उन्होंने राजस्थान पत्रिका, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, एनडीटीवी और लोकमत हिंदी जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है. ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ-साथ जटिल राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' और 'ओपिनियन' लिखना उनकी मुख्य पहचान है. वे न्यूज़ डेस्क मैनेजमेंट और क्वालिटी एश्योरेंस के उच्च मानकों को बनाए रखते हैं, ताकि पाठकों तक प्रामाणिक, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित खबरें ही पहुंचे.सुमित राय से संपर्क करने के लिए आप उन्हें sumit2.kumar@zeemedia.com पर ईमेल कर सकते हैं. इसके अलावा, आप एक्स (ट्विटर), फेसबुक और लिंक्डइन पर उनके हैंडल @imSumitKRai के जरिए उनसे सीधे जुड़ सकते हैं.
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दिवाली को देखते हुए मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है. सीएम डॉ. मोहन यादव ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खतरनाक 'कार्बाइड गन' और 'कार्बाइड लैंप' के इस्तेमाल पर पूरी तरह सख्ती से रोक लगाई जाए. दिवाली के मौके पर बाजारों में एक खतरनाक 'कार्बाइड गन' बच्चों और युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है, जिसे आम बोलचाल में 'देसी तोप' कहा जाता है. तेज धमाके का रोमांच देने वाली यह गन इतनी खतरनाक है कि पलभर में किसी की जिंदगी अंधेरे में धकेल सकती है और आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है. अकेले मध्य प्रदेश में पिछली साल दिवाली पर इस खतरनाक गन के फटने से करीब 300 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनमें कइयों को अपनी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए गंवानी पड़ी.

कार्बाइड गन से होने वाले नुकसान की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने इस बार कड़ा कदम उठाने का फैसला किया है और दिवाली से पहले ही इस पर प्रतिबंध लगा दिया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिया है कि इस पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और आदेश की अनदेखी पर सीधे तौर पर जिलों के कलेक्टर और एसपी की जवाबदेही होगी. आखिर यह कार्बाइड गन क्या है, यह काम कैसे करती है, यह कितनी खतरनाक है और इससे किस तरह के शारीरिक नुकसान का खतरा रहता है? इस पर हमने आंखों के डॉक्टर से बात की, जिन्होंने सबकुछ विस्तार से बताया है.

क्या है 'कार्बाइड गन' और कैसे करती है काम? इसको लेकर क्यों मचा है हड़कंप?

कार्बाइड गन को बनाने के लिए प्लास्टिक की पाइप यानी पीवीसी (PVC) का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें ब्लास्ट के लिए कैल्शियम कार्बाइड और पानी डाला जाता है, फिर गैस लाइटर से आग लगाई जाती है. गन के अंदर कैल्शियम कार्बाइड के साथ पानी डाला जाता है. पानी के संपर्क में आने के बाद कार्बाइड से एसिटिलीन गैस बनती है, जो गैस लाइटर से निकली चिंगारी के संपर्क में आने से तेजी से विस्फोटक आवाज करती है. इसे सस्ता बनाने के चक्कर में ज्यादातर लोग लो क्वालिटी की पीवीसी पाइप का इस्तेमाल करते हैं और तेज आवाज से प्लास्टिक की पाइप फट जाती है. पाइप फटने के बाद इसके टुकड़े किसी छर्रे से कम नहीं होते, जो आंख के अलावा फेस और शरीर के अन्य हिस्सों में घुसकर गंभीर चोट पहुंचाते हैं. इसके साथ ही कार्बाइड भी काफी नुकसान पहुंचाता है.

कार्बाइड गन बच्चों के बीच इतनी पॉपुलर कैसे हो गई?

शुरुआत में कई जगहों पर किसान कार्बाइड गन का इस्तेमाल शुरुआत में खेतों में आए जानवरों को भगाने के लिए करते थे. इसके बाद इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे और बच्चों के बीच इसका क्रेज बढ़ गया. कई जगहों पर इसे बिना प्रदूषण के पटाखे फोड़ने वाली गन के रूप में प्रचलित किया गया. फिर यह कारोबार बन गया और यह गन गली-गली बिकने लगी. दुकानदार ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसमें सस्ती क्वालिटी की पीवीसी पाइप का इस्तेमाल करने लगे और फिर प्लास्टिक से बनी ये खतरनाक गन बच्चों के आंखों के लिए काल बन गई.

'कार्बाइड गन' से आंखों को किस तरह का नुकसान पहुंचता है?

NIIMS मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के नेत्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और कंसल्टेंट डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि कार्बाइड गन में कैल्शियम कार्बाइड के साथ पानी डाला जाता है और दोनों के रिएक्शन से एसिटिलीन गैस बनती है. फिर इसमें आग लगाने से तेज आवाज होती है. बच्चे इसे खिलौना समझकर खेलते हैं और कई बार प्लास्टिक से बनी गन टूटकर गंभीर चोट पहुंचाती है. प्लास्टिक के छोटे टुकड़े आंखों के अंदर जाकर कॉर्निया को डैमेज कर देते हैं. इसके अलावा आंखों में चोट के साथ खून का रिसाव भी हो सकता है. कई बार प्लास्टिक के टुकड़े काफी गंभीर चोट पहुंचाते हैं और लेंस के साथ ही रेटिना को नुकसान पहुंचता है.

क्या इस तरह के केमिकल और ब्लास्ट इंजरी के बाद मरीज की दृष्टि (Eyesight) वापस लौटने की कोई गुंजाइश बचती है?

डॉ. राहुल सिंह ने आगे बताया कि आंखों के अंदर प्लास्टिक के टुकड़े और कार्बाइड के अंश चले जाने से विजन हमेशा के लिए जा सकती है. हालांकि, यह चोट की गंभीरता पर निर्भर करता है. कुछ गंभीर स्थिति में ऑपरेशन तक की नौबत आ सकती है, लेकिन विजन (रोशनी) के पूरी तरह वापस लौटने की गारंटी नहीं होती. हालांकि, रेटिना या ऑप्टिक नर्ब में डैमेज होने पर आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है. अगर आंखों के अंदर कैल्शियम कार्बाइड के अंश चले जाएं, तो यह कार्निया को पूरा मेल्ट कर सकता है. इससे भी दृष्टि (Eyesight) हमेशा के लिए जा सकती है.

ये भी पढ़ें- अब ग्राहक खुद भर रहे गाड़ी में पेट्रोल, इंदौर के पंप पर नई पहल की शुरुआत, जानें कैसे काम करती है ये सुविधा?

अगर कार्बाइड गन से चोट लग जाए तो सबसे पहले क्या करना चाहिए?

डॉ. राहुल सिंह ने इस तरह की खतरनाक गन इस्तेमाल ना करने की सलाह दी. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अगर किसी स्थिति में चोट लग जाती है, तो क्या करना है यह पूरी तरह मरीज को चोट कितनी गहरी है, उस पर निर्भर करता है. अगर चोट हल्की है और ऊपरी है तो पानी से धोएं. इसके बाद डॉक्टर को तुरंत दिखाएं. हालांकि, अगर चोट गहरी है तो आंख को छूना भी नहीं चाहिए और पानी से बिल्कुल धोना नहीं चाहिए. मरीज को तत्काल डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

जब कार्बाइड गन चेहरे या आंखों के पास फटती है, तो आंखों के अलावा क्या-क्या नुकसान हो सकता है?

डॉक्टर राहुल ने बताया कि कार्बाइड गन में विस्फोट से सिर्फ आंखों को नुकसान हो, ये जरूरी नहीं है. कई बार स्किन को भी नुकसान पहुंच सकता है. चेहरा जल सकता है और स्किन सफेद पड़ सकती है. लंबे समय तक इसका निशान बना रह सकता है. इसके अलावा चेहरे या हाथ की हड्डी में फ्रैक्चर हो सकती है.

कार्बाइड गन से निकलने वाले धमाके की आवाज से क्या कान को भी नुकसान पहुंच सकता है?

डॉक्टर राहुल ने बताया कि कार्बाइड गन से निकलने वाले अत्यधिक डेसिबल के धमाके से कान के पर्दे तक फट सकते हैं. हमेशा के लिए सुनने में दिक्कत हो सकती है. धमाका बहुत तेज हो, तो कान के अंदर की नसें डैमेज हो सकती हैं और कान में सीटी की आवाज सुनाई देने लग सकती है. इसके अलावा चक्कर आने और वर्टिगो की समस्या हो सकती है. हालांकि, यह सब धमाके की तीव्रता और धमाके की आवाज कितनी तेज है, उस पर डिपेंड करता है.

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