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आवासीय इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बीच भोपाल के व्यापारियों की नजर नए मास्टर प्लान पर टिकी थी. व्यापारियों को उम्मीद थी कि नए मास्टर प्लान में मौजूदा भू-उपयोग में बदलाव का प्रावधान किया जाएगा. इसके तहत रहवासी क्षेत्रों को कमर्शियल या मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्र में शामिल करने की मांग की जा सके. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां चलाने को लेकर सुनवाई हुई थी. इसके बाद, राज्य सरकार भोपाल के नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने की तैयारी कर रही है. हालांकि, नए मास्टर प्लान में जमीन के इस्तेमाल से जुड़े प्रस्तावों के बावजूद, सीलिंग की चल रही कार्रवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट का किसी भी प्रॉपर्टी या कंस्ट्रक्शन की मौजूदा कानूनी स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा. फिलहाल किसी भी कंस्ट्रक्शन या प्रॉपर्टी के लिए मौजूदा मास्टर प्लान और लागू बिल्डिंग नियम ही लागू रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर के आदेश के बाद यह साफ है कि भले ही नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में रिहायशी इलाके के लैंड यूज़ का ज़िक्र किया गया हो, लेकिन वहां चल रही कोई भी दुकान अपने-आप कानूनी नहीं हो जाएगी. प्रस्तावित बदलाव लागू होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सुप्रीम कोर्ट नई मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने की अनुमति देता है या नहीं.
22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर को सुनवाई हुई , जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट का आदेश शुक्रवार को सार्वजनिक किया गया. कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्राथमिकता के आधार पर यह सुनिश्चित करें कि खास तौर पर रिहायशी इस्तेमाल के लिए तय इलाकों में कोई कमर्शियल गतिविधि न हो. अगर ऐसे इलाकों में कोई बिजनेस चलता हुआ पाया जाता है, जहां राज्य सरकार की मंजूरी सिर्फ रिहायशी इस्तेमाल के लिए है, तो उस जगह को सबसे पहले सील कर दिया जाना चाहिए. कोर्ट का कहना है कि जिन इलाकों में जमीन और इमारतों का इस्तेमाल किसी खास कैटेगरी के लिए साफ तौर पर तय नहीं है, वहां 'मिक्स्ड यूज (मिली-जुली तरह से इस्तेमाल) का सवाल उठ सकता है. ऐसे मामलों में, अभी मौजूदा स्थिति बनाए रखने के निर्देश हैं, हालांकि इससे जुड़ी कागजी कार्रवाई जारी रह सकती है.
23 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर के लिए तय की है. सरकार और कॉर्पोरेशन प्रशासन को सुनवाई से एक हफ्ते पहले एक्शन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी. राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि भोपाल के नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है. सरकार ने इसे प्रकाशित करने और जनता से दावे और आपत्तियां मंगाने की इजाजत मांगी. सरकार ने कोर्ट को यह भरोसा भी दिलाया कि कोर्ट की इजाजत के बिना नए प्लान को फाइनल नहीं किया जाएगा. सुनवाई के दौरान मौजूद वकील सौरभ मिश्रा के मुताबिक, इसका मतलब यह है कि ड्राफ्ट में जमीन के इस्तेमाल में बदलाव का प्रस्ताव, सीलिंग से जुड़ी पाबंदियों से तुरंत राहत पाने का आधार नहीं बन सकता.