भोपाल में अतिक्रमण हटाने के लिए हर रोज 2 लाख खर्च, 3 साल में 22 करोड़ फूंके, 7 दिन में 195 बार कार्रवाई...फिर भी नहीं हटे कब्जे
भोपाल में अतिक्रमण हटाने पर नगर निगम रोजाना औसतन 2 लाख रुपए खर्च कर रहा है. पिछले तीन साल में करीब 22 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद कई इलाकों में कब्जे दोबारा हो रहे हैं.
भोपाल नगर निगम शहर से अतिक्रमण हटाने पर रोजाना औसतन 2 लाख रुपए खर्च कर रहा है. पिछले तीन साल में इस काम पर करीब 22 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, इसके बावजूद मुख्य बाजारों और सकड़ों को से स्थायी तौर पर अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराया जा सका है. हालात ये हैं कि जिन जगहों पर निगम की टीम पांच बार तक कार्रवाई कर चुकी है, वहां भी सड़क और फुटपाथ पर दोबारा ठेले और दुकानें लग गई हैं.
जानकारी के मुताबिक, 9 से 18 सितंबर के बीच सात दिनों में 195 बार कार्रवाई की गई. इनमें 35 जगह ऐसी हैं, जहां दो या उससे ज्यादा बार कार्रवाई करनी पड़ी. रॉयल मार्केट और लिंक रोड नंबर 1 से 3 पर निगम की टीम पांच-पांच बार पहुंची. रिकॉर्ड से पता चलता है कि शहर के कई इलाकों में एक ही हफ्ते में कई बार कार्रवाई की गई. इसके बाद भी इन जगहों से कब्जे पूरी करह नहीं हटा और स्थित में कोई बदलाव नहीं आया.
इन इलाकों में हुई कार्रवाई
हमीदिया रोड पर 15 सितंबर को मोबाइल की दुकानों के सामने से साइनबोर्ड और ठेले हटा दिए गए थे, वहां फिर से ठेले लगे हुए पाए गए. जांच में दुकानों के साइनबोर्ड और सामान भी सड़क पर रखे हुए मिले. वहीं सिंधी कॉलोनी चौराहे से पुतली घर बस स्टैंड तक सड़क के दोनों ओर ठेले और दुकानें लगी हुई पाई गईं. जानकारी के अनुसार हाल ही में यहां पांच बार कार्रवाई की गई है.
कार्रवाई के बाद भी नहीं बदले हालात
अशोका गार्डन रोड पर 9 सितंबर को पानी की टंकी के पास कार्रवाई की गई थी. हालांकि, बाद में वहां फिर से दुकानें लगी हुई पाई गईं. इसके साथ ही फतेहगढ़ रोड, मोती मस्जिद, हमीदिया अस्पताल के मुख्य गेट और रॉयल मार्केट के बीच कई जगहों पर ठेले पाए गए. नगर निगम इस इलाके में लगातार कार्रवाई कर रहा है. लिंक रोड 1-3 के तीनों सड़कों पर कई जगहों पर ठेले और दुकानें पाई गईं. नगर निगम के रिकॉर्ड बताते हैं कि इन जगहों पर पांच बार कार्रवाई की गई है.
अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नगर निगम ने 9 से 18 सितंबर के बीच चलाए गए सात दिन के अभियान के दौरान 51 ट्रक सामान और एक फूड ट्रक जब्त किया. सबसे ज्यादा जब्ती 10 सितंबर को हुई, जब 13 ट्रक सामान जब्त किया गया. इसके अलावा 15 सितंबर को कार्रवाई के दौरान तीन हाथ-गाड़ियां भी जब्त की गईं. अलग-अलग इलाकों में अभियान के चलाते समय, निगम की टीमों ने ऊंचे चबूतरे, कामचलाऊ स्टॉल, फूस के ढांचे, शेड और रैंप भी हटाए. 18 सितंबर को नरेला विधानसभा क्षेत्र में फूस के बीस अवैध ढांचे गिरा दिए गए.
सख्त कार्रवाई की तैयारी
नगर निगम अपर आयुक्त अभिषेक सिंह का कहना है कि, दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए सामान जब्त करने जैसी सख्त कार्रवाई करने की योजना है. हालांकि वेंडर्स के पुनर्वास के लिए गांधीनगर मंडी जैसी व्यवस्थाएं की गई थीं, लेकिन तालमेल की कमी और ग्राहकों की कमी के कारण वे वहां शिफ्ट नहीं हो पा रहे हैं. सीमित स्टाफ के साथ सभी जोन में निगरानी की जा रही है.
विशेषज्ञों की राय
शहरी मामलों के जानकार और विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ दिखावे के लिए अतिक्रमण हटाने से इस समस्या का समाधान नहीं होगा. उनका मानना है कि जब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं बनाई जाती और खाली कराई गई जगहों पर दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए पुलिस बल तैनात नहीं किया जाता, तब तक जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद होता रहेगा. प्रशासन को अब ऐसी नीति पर काम करना चाहिए, जिसमें वेंडरों के लिए अधिकृत जोन तय हों और उन पर कड़ी निगरानी रखी जाए.