भोपाल सीलिंग मामला: जबलपुर हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को किया तलब, कारोबारी 7 दिन में पेश करेंगे दस्तावेज
Bhopal News: भोपाल में सीलिंग के मामले पर जबलपुर हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को तलब किया है. कोर्ट ने नगर निगम द्वारा व्यवसायी के दस्तावेज जमा न करने और सरकार की उच्च-स्तरीय समिति द्वारा अपना जवाब दाखिल न करने पर कड़ी नाराजगी जताई.
भोपाल में सीलिंग की कार्रवाई मामले में राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के ढुलमुल रवैये पर जबलपुर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए तलब किया है. सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि भोपाल नगर निगम ने अभी तक संबंधित कारोबारी के दस्तावेज हाई कोर्ट में जमा नहीं किए हैं. इसके अलावा सरकार द्वारा गठित उच्च-स्तरीय समिति भी अब तक कोर्ट में अपना आधिकारिक जवाब दाखिल करने में विफल रही है.
कारोबारी 7 दिन में पेश करेंगे दस्तावेज
प्रशासनिक लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए हाईकोर्ट ने कारोबारियों को अपने मामले के समर्थन में जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए सात दिन का समय दिया है. अगली सुनवाई में इन दस्तावेज़ों के आधार पर सीलिंग की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की जांच की जाएगी. दूसरी तरफ, सिटीजन फोरम की याचिका पर भी अदालत में सुनवाई का दौर जारी है.
15 सितंबर को होगी अलगी सुनवाई
अदालत ने अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है. मुख्य सचिव को तलब किए जाने और हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद भोपाल नगर निगम और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है. 15 सितंबर की सुनवाई में सरकार को अपना पक्ष मजबूती से रखना होगा.
इससे पहले सोमवार को 40 मामलों की सुनवाई हुई थी
बता दें कि मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच में भोपाल में सीलिंग से जुड़े मामलों पर सुनवाई हुई थी. जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत में 60 से ज़्यादा मामलों पर सुनवाई हुई थी. बाकी मामलों पर सुनवाई बुधवार तक जारी रही. पहले दिन यानी सोमवार को करीब 40 मामलों पर सुनवाई हुई थी. इस बीच, सीलिंग की कार्रवाई को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का दावा है कि नगर निगम द्वारा सील की गई 170 से ज़्यादा दुकानें बिना किसी आधिकारिक आदेश के फिर से खुल गई हैं. उन्होंने इस मामले में नगर निगम में शिकायत दर्ज कराई है और अपने वकील के जरिए सुप्रीम कोर्ट को भी स्थिति से अवगत कराया है.
अब जानिए पूरा मामला
दरअसल, भोपाल सीलिंग मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भोपाल नगर निगम ने आवासीय इलाकों में अवैध रूप से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है. इसके तहत होटल, रेस्टोरेंट, दुकान और शोरूम जैसी व्यावसायिक गतिविधियों पर तालेबंदी की जा रही है. नगर निगम ने शहर के अरेरा कॉलोनी सहित कई पॉश इलाकों में आवासीय प्लॉट पर संचालित हो रही हजारों दुकानों और प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर बड़े पैमाने पर सीलिंग अभियान चलाया है.