सांस फूलना ही नहीं! फेफड़ों के बूढ़े होने के ये 7 साइन दिखें तो हो जाएं सावधान
causes of premature lung ageing: फेफड़ों की भी एक उम्र होती है, जो हमेशा आपकी असली उम्र के बराबर नहीं होती है. पॉल्यूशन, धूम्रपान, इंफेक्शन और खराब लाइफस्टाइल फेफड़ों की हालत समय से पहले बिगाड़ देते हैं. स्पेशलिस्ट बताते हैं कि कुछ साइन्स से पता चल सकता है कि आपके फेफड़े उम्र से पहले ही कमजोर हैं या नहीं.
हम अक्सर अपनी उम्र का हिसाब जन्म के साल से लगाते हैं, लेकिन शरीर के हर अंग की उम्र एक जैसी हो, ये जरूरी नहीं है. हो सकता है आपकी उम्र 30 या 40 साल हो, लेकिन आपके फेफड़े उससे कहीं ज्यादा उम्र के व्यक्ति की तरह काम कर रहे हों. फेफड़ों की उम्र का मतलब ये समझना है कि आपके फेफड़े आपकी उम्र, कद और जैंडर के हिसाब से कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं. इसी को लेकर 'एचटी' की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता के मुकुंदपुर स्थित नारायण आरएन टैगोर अस्पताल की पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. सौपर्णा साहा ने कहा कि किसी व्यक्ति की बर्थडेट ही केवल उसकी असली उम्र बताती है, ये नहीं बताती कि उसके फेफड़ों की क्षमता कैसी है. कुछ लोगों में 30-40 की उम्र में ही फेफड़ें काम करना बंद कर देते हैं, जबकि कुछ लोग ज्यादा उम्र तक बेहतर लंग्स फंक्शन बनाए रखते हैं.
फेफड़ों की स्थिति का अंदाजा लगाने के लिए डॉक्टर स्पाइरोमेट्री टेस्ट की सलाह दे सकते हैं. ये एक आसान सांस का टेस्ट है, जिसमें ये देखा जाता है कि आप कितनी हवा अपने फेफड़ों में भर सकते हैं और कितनी तेजी से उसे बाहर निकाल सकते हैं. इससे डॉक्टर को फेफड़ों की कार्यक्षमता का अंदाजा मिलता है. हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है कि लंग एज आपकी जिंदगी कितने साल चलेगी, इसका अनुमान नहीं है. लेकिन अगर आपकी असली उम्र और फेफड़ों की क्षमता के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
धूम्रपान और प्रदूषण फेफड़ों के बड़े दुश्मन
फेफड़ों के समय से पहले कमजोर होने की सबसे बड़ी वजहों में धूम्रपान भी है. सिगरेट का धुआं फेफड़ों में सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और वेन्स को नुकसान पहुंचा सकता है. सिर्फ खुद धूम्रपान करना ही समस्या नहीं है, बल्कि लगातार दूसरे लोगों के सिगरेट के धुएं के कॉन्टैक्ट में रहना यानी पैसिव स्मोकिंग भी गलत असर डाल सकती है. इसके अलावा, शहरों की जहरीली हवा भी फेफड़ों पर लगातार दबाव डालती है. ट्रैफिक, फैक्ट्रियों और पैट्रोल जलने से निकलने वाले बारीक कण और खतरनाक गैसें सांस की नलियों में सूजन पैदा कर सकती हैं. लंबे समय तक ऐसा होने पर फेफड़ों की कार्यक्षमता पर बुरा असर डाल सकता है.
घर और काम की जगह की हवा भी डाल सकती है असर
कई बार हम बाहर के प्रदूषण को दोष देते हैं, लेकिन घर के अंदर की हवा भी फेफड़ों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है. खाना पकाते समय पर्याप्त वेंटिलेशन न होना, लकड़ी या अन्य ठोस गैस से निकलने वाला धुआं और घर में मौजूद तंबाकू का धुआं फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसके अलावा कुछ लोगों का काम भी उन्हें लगातार धूल, केमिकल या धुएं के संपर्क में रखता है. निर्माण, खनन, कपड़ा और फैक्ट्री जैसे एरिया में काम करने वाले लोगों को स्पेशल सावधानी बरतने की जरूरत होती है. उचित मास्क, सुरक्षा उपकरण और वेंटिलेशन की कमी लंबे समय में सांस से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ा सकती है.
संक्रमण और जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार
फेफड़ों की सेहत केवल धूम्रपान या प्रदूषण से ही बुरा असर नहीं डालते. बार-बार होने वाले या गंभीर श्वसन संक्रमण, खासकर बचपन में हुए संक्रमण, आगे चलकर फेफड़ों की क्षमता पर असर डाल सकते हैं.लंबे समय तक रहने वाली सूजन भी परेशानी का कारण बन सकती है. विशेषज्ञ के अनुसार, फेफड़ों के छोटे एयरवे यानी सांस की बेहद छोटी नलिकाओं में बदलाव कई बार गंभीर समस्या के स्पष्ट लक्षण सामने आने से पहले ही शुरू हो सकते हैंय यही कारण है कि शुरुआती संकेतों को पहचानना महत्वपूर्ण है.
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत या स्किन से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.