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Explainer: झारखंड को 14,000 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा, खान और खनिज संशोधन कानून में आखिर ऐसा क्या है? धारा 9D का पेंच भी समझिए

2024 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि राज्य खनिज और भूमि पर टैक्स लगा सकते हैं, लेकिन केंद्र सरकार के नए कानून से इस पर रोक लग गई.

Written By Sunil Mishra
Published: Aug 25, 2026, 07:18 PM IST | Updated: Aug 29, 2026, 02:02 PM IST
Image Credit: खान और खनिज संशोधन कानून, 2026 पर केंद्र और झारखंड सरकार में ठन गई है.. (AI Image)
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संसद के मानसून सत्र में पारित खान और खनिज संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है. दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने राज्यों को खनिज युक्त भूमि पर टैक्स और सेस लगाने का अधिकार दिया था, लेकिन मानसून सत्र में पारित संशोधन विधेयक में धारा 9D के तहत केंद्र सरकार की ओर से खनन भूमि और खनिज पर मनमाना टैक्स और सेस लगाने से मना कर दिया है. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि MMDR कानून का झारखंड पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने कहा कि पहले ही एक लाख 36 हजार करोड़ रुपये का बकाया पेश किया है और उसे भी हाशिये पर डालने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह कानून झारखंड के हितों को नुकसान पहुंचाता है और हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं.

झारखंड के लिए नए कानून का क्या मतलब?

14,000 करोड़ रुपये का संभावित नुकसान: 2024 में जब सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के हक में फैसला दिया था, तब झारखंड विधानसभा ने झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस विधेयक पारित किया था. सरकार को उम्मीद थी कि इससे करीब 14,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त गैर कर राजस्व मिलेगा.

धारा 9D का रोड़ा: केंद्र सरकार ने संसद के माध्यम से जो नया कानून बनाया है, उसके हिसाब से कोई भी राज्य सरकार बिना केंद्र की अनुमति के नया टैक्स, सेस या लेवी नहीं लगा सकतीं.

फंस गया बकाया: राज्य सरकारों की सबसे बड़ी दिक्कत अब यह है कि अभी तक कंपनियों के पास जो बकाया रह गया है, वो अब फंस गया है, क्योंकि नए कानून के मुताबिक अब वो कंपनियां काम ही नहीं कर सकतीं, जब तक कि केंद्र सरकार की मंजूरी न हो.

कल्याणकारी योजनाओं पर असर: झारखंड की सरकार कई लोक कल्याणकारी योजनाएं संचालित करती हैं. जैसे: मईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, सर्वजन पेंशन और छात्रवृत्ति आदि. केंद्र सरकार का कानून प्रभावी होने के कारण अब इन योजनाओं के लिए धनराशि की किल्लत पैदा हो सकती है.

टकराव: संविधान पीठ के फैसले को संसद ने पलट दिया

झारखंड की सरकार इस मामले में एक बार फिर अदालत जाने की तैयारी कर रही है. दरअसल, राज्य सरकार संविधान पीठ के फैसले को संसद के माध्यम से पलटने की कोशिश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है. झारखंड सरकार का तर्क यह भी है कि संविधान की राज्य सूची की प्रविष्टि 49 और 50 राज्यों को भूमि और खनिज पर टैक्स लगाने का अधिकार देती है.

पेसा कानून का उल्लंघन

झारखंड मुक्ति मोर्चा के अलावा अन्य आदिवासी संगठनों का दावा है कि दिल्ली से खनन ब्लॉक तय होने से पेसा कानून और ग्राम सभा की सहमति की उपेक्षा की जा सकती है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय की राय

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय का कहना है कि राज्य की साढ़े तीन करोड़ जनता के अधिकारों पर हमला किया है. सहाय का कहना है कि राज्य सरकार ने 14,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया और अगर यह राशि नहीं मिली तो जनकल्याणकारी योजनाएं कैसे चलाई जाएंगी. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार लोकसभा में संख्या के बल पर विधेयक पास करा रही है. सहाय ने यह भी कहा कि राज्य में PESA कानून लागू है. ऐसे में अधिसूचित गांवों से राय ली गई है? उन्होंने कहा कि इस कानून के खिलाफ कांग्रेस चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करने वाली है. हेमंत सोरेन की लड़ाई अकेले की लड़ाई नहीं है. यह सभी झारखंडियों की लड़ाई है और हम सब मिलकर यह लड़ाई लड़ेंगे.

झारखंड विरोधी है खान और खनिज संशोधन कानून: दीपांकर

सीपीआई एमएल के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने इस कानून को झारखंड विरोधी बताया. उन्होंने कहा किा सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि खनिज संपदा पर राज्य सरकार को भी हक मिलेगा. राज्य सरकार अपने हिसाब से सेस लगा सकती है. इससे राज्य का राजस्व बढ़ेगा. राजस्व बढ़ने से वेलफेयर, शिक्षा और रोजगार के लिए नई योजनाएं लाई जा सकती हैं. केंद्र सरकार झारखंड के खनिजों पर कब्जा करके पूंजीपतियों को बांटना चाहती है. यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है. झारखंड में चलने वाली राज्य सरकार की योजनाओं पर इस संशोधन कानून का असर होगा.

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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