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'दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा', निशा भगत की आत्महत्या मामले में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता मनोज पांडे ने कही ये बात

सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता मनोज पांडे का दावा है कि निशा भगत केस में किसी को अनुचित रूप से नहीं बचाया जाएगा. उम्मीद है, ऐसा ही होगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो निशा को तो न्याय नहीं मिल पाएगा. साथ ही, सरकार की विश्वसनीयता भी प्रभावित होगी.

'दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा', निशा भगत की आत्महत्या मामले में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता मनोज पांडे ने कही ये बात
Image Credit: निशा भगत मौत केस में मनोज पांडे ने किया बड़ा दावा (AI Image)

रांची: आदिवासी नेत्री निशा भगत की आत्महत्या के मामले में झारखंड की राजनीति में उबाल आ गया है. बीजेपी इस मुद्दे पर हेमंत सोरेन सरकार पर हमलावर है और शनिवार शाम को मुख्यमंत्री का पुतला फूंकने का ऐलान कर चुकी है. अब झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेता मनोज पांडे ने इस बारे में कहा कि निशा भगत एक आदिवासी बेटी थीं और उनमें काफी संभावनाएं थीं. उन्होंने कहा कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. किसी को बचाया नहीं जाएगा और न ही किसी को झूठे मामले में फंसाया जाएगा.

मनोज पांडे ने कहा कि निशा भगत सरकार और उनके नेताओं की आलोचना करती थीं, लेकिन लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और सरकार की आलोचना करने का अधिकार है. आलोचना करने का यह मतलब नहीं है कि कोई व्यक्ति किसी का दुश्मन बन जाता है. उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद, पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

उन्होंने कहा कि प्रथमदृष्टया उन्हें लगता है कि अगले दो से पांच दिनों में मामले की पूरी सच्चाई सबके सामने आ जाएगी. जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मामले में किसी भी व्यक्ति को अनुचित तरीके से संरक्षण नहीं दिया जाएगा.

इससे पहले रांची में निशा भगत ने शुक्रवार को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. जानकारी के अनुसार, निशा भगत ने फेसबुक पर लाइव आकर कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए और फिर पिठोरिया थाना प्रभारी को फोन कर आत्महत्या करने की बात बताई. इसके बाद पुलिस और स्थानीय स्तर पर अफरा-तफरी मच गई.

गंभीर हालत में निशा भगत को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. घटना के बाद से मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं और जांच की मांग भी की जा रही है. मनोज पांडे ने कहा कि सीबीआई जांच की जरूरत तब महसूस होती है, जब पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे.

उन्होंने कहा कि यदि ऐसा लगे कि पुलिस किसी को बचा रही है, लापरवाही बरत रही है या किसी निर्दोष को झूठे मामले में फंसाया जा रहा है, तब जांच दूसरी एजेंसी को सौंपने की मांग उठती है. उन्होंने अंकिता भंडारी मामले और उज्जैन की घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य के भीतर होने वाली घटनाओं की जांच करना राज्य पुलिस की जिम्मेदारी है. पुलिस को निष्पक्ष तरीके से जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए.

-आईएएनएस

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Sunil Mishra

Sunil Mishra

इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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