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Jharkhand News: पूर्ण मारांग बुरू पारसनाथ पहाड़ पर विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष संजय जैन द्वारा मीडिया के माध्यम से अपना दावा पेश करने और अल्पसंख्यक आयोग से केंद्र व राज्य सरकार को आदेश का पालन कराने तथा संरक्षण की मांग किए जाने पर आदिवासी समुदाय ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. मारांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि आदिवासी समुदाय जैन समुदाय के संपूर्ण मारांग बुरू पारसनाथ पहाड़ पर किए जा रहे दावे को खारिज करता है और इसका पुरजोर विरोध करता है.
विज्ञप्ति में कहा गया है कि पारसनाथ पहाड़ संथाल आदिवासियों का मारांग बुरू है. संपूर्ण मारांग बुरू की आदिवासी समुदाय द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है और यह उनका पवित्र एवं सर्वोच्च धार्मिक स्थल है. संपूर्ण मारांग बुरू पारसनाथ क्षेत्र में 24 से अधिक टोले हैं, जिनमें मांझी (प्रधान) की व्यवस्था है. मोर्चा का दावा है कि न्यायालय ने आदिवासी संथालों के प्रथागत और पुरखौती अधिकारों को मान्यता दी है.
मोर्चा ने कहा कि जैन समुदाय के लिए विशेष व्यवस्था को लेकर केंद्र या राज्य सरकार की ओर से एकतरफा आदेश जारी करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 का उल्लंघन होगा. विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि इतिहास में पारसनाथ पहाड़ का उल्लेख 'शंभवेद शिखर' के नाम से कहीं नहीं मिलता, जबकि 'मारांग बुरू' का उल्लेख सरकारी दस्तावेजों और ऐतिहासिक संदर्भों में दर्ज है. आदिवासी समुदाय ने आरोप लगाया कि जैन समुदाय धन-बल के माध्यम से राज्य और केंद्र सरकार के साथ-साथ न्यायालय को गुमराह कर भोले-भाले आदिवासियों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करने का प्रयास कर रहा है.
आदिवासी संथाल समुदाय ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि जैन समुदाय के पक्ष में जारी एकतरफा आदेश को निरस्त किया जाए और न्यायालय के आदेश से संरक्षित मारांग बुरू पारसनाथ को आदिवासियों का अति प्राचीन एवं सर्वोच्च धार्मिक स्थल घोषित किया जाए, ताकि उनके पारंपरिक और प्रथागत अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके. मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से इस मामले में सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आदिवासी समुदाय बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएगा.
रिपोर्ट: मृणाल सिन्हा